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शिशु की देख - रेख स्वास्थ्य

गर्मी के मौसम में नवजात शिशु का कैसे रखें ख्याल?

स्पर्धा रानी
0 से 1 वर्ष

स्पर्धा रानी के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 09, 2021

 गर्मी के मौसम में नवजात शिशु का कैसे रखें ख्याल
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

कोमल की डिलीवरी बस होने ही वाली है। वह रोज बढ़ती गर्मी से खुद ही बहुत परेशान है। अब उसे डर लग रहा है कि जब मई- जून की चिलचिलाती गर्मी में उसका शिशु इस धरती पर आएगा तो वह किस तरह से उसे इस तेज गर्मी से बचा पायेगी। वह यह भी सोच रही है कि उसे कितनी बार नहलाना पड़ेगा ताकि उसे कम गर्मी महसूस हो, उसे रैशेज ना हो। आपकी मां और सासू मां ने इस बारे में आपको सौ सलाहें दी होंगी। आपके दोस्त और अन्य रिश्तेदारों ने भी गर्मी के मौसम में शिशु का ख्याल रखने से संबंधित कई तरह की बातें बताई होंगी। इसमें सौ फीसद सचाई है कि तेज गर्मी किसी को रास नहीं आती। और बात जब अपने जिगर के टुकड़े की हो, तो एक नई मां और पापा के नाते आप यही सोचते होंगे कि उसे कैसे इन गर्मियों में कूल- कूल रखा जाए। इसलिए कोमल जैसी कई नई मांओं के लिए यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं, जिनकी मदद से आप गर्मी के मौसम में अपने नवजात शिशु का ख्याल रख सकते हैं।

इन टिप्स की मदद से गर्मी के मौसम में अपने शिशु को रखें कूल

गर्मी के मौसम में हाइपर होने से कुछ नहीं होने वाला है। बेहतर तो यह होगा कि आप मां लें कि गर्मी का मौसम 3-4 महीना रहने ही वाला है। इस बात पर रजामंद होने के बाद आप गर्मी के मौसम को भी इंजॉय करने लगेंगी। अपने शिशु को इन गर्मियों में ठंडा रखने के कुछ टिप्स निम्न हैं।

  • बच्चे को नहलाना- यह एक बहुत बड़ा सवाल है, जिससे अमूमन नए पैरेंट्स जूझते रहते हैं कि उन्हें अपने शिशु को कितनी बार और कैसे नहलाना चाहिए। यहां सबसे जरूरी बात यह है कि पानी बिल्कुल भी ठंडा नहीं होना चाहिए। पानी का हल्का गुनगुना या रूम टेम्परेचर पर रहना ही सही है। इसकी जांच के लिए आप अपनी हथेली के पिछले हिस्से को पानी में डुबोकर देख सकते हैं। इस पानी से नहाकर ही आपका शिशु ठंडा महसूस करेगा। आप इस टेम्परेचर के पानी से अपने शिशु को गर्मी के मौसम में एक- दो बार नहला सकते हैं।
     
  • बच्चे की मालिश- नन्हे शिशु के बॉडी की मालिश बहुत जरूरी है। इससे उनकी बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है जो बहुत जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि शिशु की मूवमेंट बहुत कम रहती है। इसलिए गर्मी के मौसम में भी उसकी मालिश जरूर करे, बस ध्यान यह रखें कि बॉडी पर तेल लगा ना रह जाए। क्योंकि गर्मी के मौसम में बॉडी पर लगा तेल रोमछिद्रों को ब्लॉक कर देता है। आप अपने शिशु को तेल लगाने के बाद उसे नहला सकते हैं। इसके बाद वह नींद की आगोश में चला जाएगा, यह उसे गर्मी के मौसम में भी ठंडा रखेगा। उसके साथ मां भी एक नैप ले सकती हैं
     
  • टैल्कम पाउडर का प्रयोग- कुछ लोग अपने शिशु की बॉडी पर भरकर ढेर सारा टैल्कम पाउडर लगा देते हैं। यह ठीक नहीं है। हालांकि यह भी माना जाता है टैल्कम पाउडर रैशेज दूर करते हैं लेकिन कई बार ये एलर्जी का कारण भी बन सकते हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में अपने शिशु को टैल्कम पाउडर लगाते समय पाउडर को पाने हाथ में लें और उसे हल्के से उसकी बॉडी पर लगा दें।
     
  • शिशु का खान- पान- यदि आपका शिशु ब्रेस्ट फ़ीडिंग करता है तो उसे हमेशा हाइड्रेटेड रखें। यदि आप उसे ब्रेस्ट फ़ीड नहीं करा रही हैं तो उसे अपनी इम्युनिटी बनाने की जरूरत है क्योंकि उसे अपनी मां के ब्रेस्ट फ़ीड से एंटीबॉडीज नहीं मिल रही हैं। यदि वह 7-8 महीने का हो चुका है तो आप उन्हें फल दे सकती हैं, जिसे वह चूस सकता है। यदि उसने कुछ ही दिन पहले सॉलिड खाना शुरू किया है तो उसे उबला खाना ठंडा करके ब्रेस्ट फ़ीड के साथ ही दें। अगर आपको अपने शिशु की डाइट को लेकर कोई कन्फ्यूजन है तो उसके पेडियाट्रिशियन से बात कर लें।
     
  • हाइजीनिक पानी-अपने शिशु को कभी भी डायरेक्ट पानी ना दें। उसे पानी देने से पहले उसे उबाल जरूर लिया करें ताकि कोई बैक्टीरिया पानी के जरिए उसकी बॉडी में न पहुंचे। इस मौसम में डिहाइड्रेशन के चिह्नों पर नजर जरूर रखा करें। अपने शिशु के पेशाब के साथ ही बुखार, उलटी, डायरिया, पानी पीने में दिक्कत, छह घंटों तक पेशाब नहीं, ड्राउजीनेस, सूखे होंठ और मुंह जैसे डिहाइड्रेशन के चिह्नों पर नजर रखें।
     
  • दिन में बाहर ना निकलें-सूरज की किरणें दिन के 10 बजे से दोपहर के 2 बजे तक बहुत तेज होती हैं। इसलिए इस समय आप अपने शिशु को लेकर घर से बाहर ना निकला करें। शिशु की स्किन सूरज की तेज किरणों को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगी। यदि आपका निकलना बहुत जरूरी है तो ध्यान रखें कि आपका शिशु सही तरह से ढका हो। अतिरिक्त सुरक्षा के लिए आप छतरी लेकर निकलें।
     
  • मच्छर और कीटाणु से दूर- गर्मी के मौसम में मच्छर और कई तरह के कीटाणु भी हो जाते हैं। इसलिए इस समय अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत रहती है। आप इसके लिए स्प्रे का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि वह ऑर्गेनिक हो ताकि इससे आपके शिशु को कोई नुकसान न पहुंचे। ऐसे एयर कंडीशनर या एयर कूलर का इस्तेमाल करें, जिन्हें नियमित तौर पर साफ किया जाता हो।
     
  • सही कपड़े-हल्के और ढीले कपड़े आपके शिशु को सांस लेने देते हैं और उनकी स्किन को भी कम्फर्टेबल महसूस होता है। इससे उन्हें रैशेज होने का खतरा कम रहता है। उन्हें घर के अंदर टोपी पहनाकर न रखें।
     
  • रूम टेम्परेचर- कई पैरेंट्स समझ्ही नहीं पाते कि शिशु के लिए कितना रूम टेम्परेचर सही रहेगा ताकि उन्हें ठंड ना लगे और ना ही ज्यादा गर्मी महसूस हो। एयर कंडीशनर उनके लिए सही है लें तब जब उसका टेम्परेचर 25 डिग्री सेल्सियस पर सेट हो। यदि आप एयर कूलर का इस्तेमाल आकर रहे हैं तो ध्यान रखें कि वह पूरी तरह से साफ हो।

कब मिलें डॉक्टर से

यदि आपके शिशु को डिहाइड्रेशन हो गया है तो उसके पेडियाट्रिशन से मिलना बहुत जरूरी है। हर स्टेज पर शिशु का विकास अपने साथ नई चुनौतियां लेकर आता है। उनके लिए पहली गर्मी बहुत कठिन हो सकती है लेकिन आप उसकी जरूरत के अनुसार उसे रखेंगी तो परेशान होने वाली कोई बात नहीं रह जायेगी। यदि आपको लग रहा है कि आपका शिशु अच्छा महसूस नहीं कर रहा है तो कभी भी डॉक्टर से मिलने में पीछे नहीं रहें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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