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हिप्नोथेरेपी की मदद से दूर करें डिलीवरी का दर्द

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Updated on Jan 19, 2018

हिप्नोथेरेपी की मदद से दूर करें डिलीवरी का दर्द

मां बनना एक औरत के लिए इस दुनिया का सबसे खूबसूरत अहसास होता है। बच्चे को जन्म देकर मां बहुत ही खुश होती है, लेकिन इस खुशी के लिए मां को बहुत दर्द भी सहना पड़ता है। गर्भधारण से लेकर 9 महीने तक एक महिला अलग-अलग कई दर्दों से गुजरती है। इसके बाद प्रसव के वक्त महिला को सबसे ज्यादा तकलीफ उठानी पड़ती है। हालांकि प्रसव के दौरान दर्द से बचने के लिए हिप्नोथेरेपी काफी कारगर है। इसका इस्तेमाल एक दशक से पहले से चल रहा है। पर कई लोग इसे काला जादू व अन्य गलत चीज समझकर इसका इस्तेमाल करने से बचते हैं। इसी वजह से इस पद्धति से डिलीवरी के आंकडों में कमी आई है।  यहां हम बात करेंगे आखिर कैसे हिप्नोथेरेपी की मदद से पेन फ्री डिलीवरी की जा सकती है।
 

क्या है हिप्नोथेरेपी

हिप्नोथेरेपी या यूं कहें कि रम्मोहन एक कला है, जिसके माध्यम से किसी को अर्धचेतनावस्था में लाया जाता है। इस अवस्था को समाधि या स्वपनावस्था भी कहा जाता है। पर सम्मोहित अवस्था में मनुष्य की कुछ या सभी इंद्रियां उसके वश में रहती हैं। वह बोल सकता है, वह चल सकता है। इस थेरेपी का यूज कई तरह की बीमारियां के इलाज में किया जाता है।
 

कैसे करता है काम

सम्मोहन की अवस्था में चिंता, डर और दर्द से मानव शरीर की दूरी बन जाती है। इसके अभ्यास से इंद्रियां जाग जाती हैं और मन एकाग्रता के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है। इस अवस्था में हमारी इंद्रियां 200-300 प्रतिशत अधक जागरूक हो जाती है और हमें न तो दर्द का अहसास होता है और न ही किसी तरह की चिंता मन में रहती है।
 

डिलीवरी के लिए कैसे कारगर

  • दरअसल आजकल सिजेरियन डिलिवरी के केस लगातार बढ़ रहे हैं, इससे कई बार गर्भवती महिला को नुकसान भी पहुंचता है। वहीं नॉर्मल डिलीवरी में दर्द की समस्या है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए हिप्नोथेरेपी बेहतर विकल्प है। न तो इससे कोई नुकसान पहुंचता है और न ही गर्भवती को दर्द से गुजरना पड़ता है।
     
  • हिप्नोथेरेपी का इस्तेमाल एक दशक से पहले भी होता रहा है, पर अस्पतालों ने कमाई व अन्य कारणों से इस पद्धति को अपनाना बिल्कुल कम कर दिया है, जबकि इसकी मदद से प्राकृतिक प्रसव, वो भी बिना दर्द के संभव है।
     
  • कई रिसर्च में ये बात सामने आ चुकी है कि हिप्नोथेरेपी से प्रसव कराने में न तो मां को कोई नुकसान पहुंचता है और न ही बच्चे को। इसके अलावा इस पद्धति से न तो दवाई का झंझट रहता है और न ही ऑपरेशन का।
     
  • सम्मोहन से गर्भवती पर नियंत्रण हो जाता है और न तो वह दर्द का अहसास करती है और न ही किसी तरह की चिंता का। ऐसे में डिलीवरी में ज्यादा समय भी नहीं लगता। 

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