पेरेंटिंग बाल मनोविज्ञान और व्यवहार समारोह और त्यौहार

इंटरनेशनल डे ऑफ इनोसेंट चिल्ड्रेन विक्टिम्स ऑफ एग्रेशन

Parentune Support
7 से 11 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 04, 2018

इंटरनेशनल डे ऑफ इनोसेंट चिल्ड्रेन विक्टिम्स ऑफ एग्रेशन

 

कहाँ है वो बचपन जो छूटे तो पछताए
क्यों है वो परेशां ये बचपन छटपटाये

खिलने से पहले ही मुरझाता ये बचपन
ये शोषित ये कुंठित ये अभिशप्त बचपन 

 

मशहूर कवि अनामिका घटक की इन पंक्तियों से आप आज के दौर में बच्चों के हालात का अनुमान लगा सकते हैं। बच्चों की हंसी और उनके खिलाखिलाहट को तो हम देखते हैं लेकिन इस हंसी के पीछे छुपे दर्द को महसूस नहीं कर पाते हैं। हम लोग अपनी समस्या और तनाव को एक दूसरे के साथ शेयर भी कर लेते हैं लेकिन एक बच्चे का क्या, आखिर कोई बच्चा अपनी समस्या किसके साथ शेयर करे? हम ये मानकर चलते हैं  कि हाई प्रोफाइल सोसाइटी और मध्यमवर्गीय परिवार के बच्चों को  किसी तरह की कठिनाई का सामना नहीं करना होता है लेकिन वास्तव में  देखा जाए तो इनमें से भी कई बच्चे अपने अंदर दर्द को दबा कर रखे हुए हैं। परिवार में कलह का माहौल, परीक्षा में अच्छे नंबर लाने का दबाव, यौन शोषण के मामले जैसी कई अन्य वजहों से भी बच्चे परेशान हो सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक आज के समय में अधिकांश बच्चों को मुख्य रूप से  युद्ध, नरसंहार, यौन शोषण, अपहरण, स्कूलों और अस्पतालों पर किए जा रहे आतंकी हमले जैसी घटनाएं परेशान कर देती हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से प्रत्येक साल 4 जून को इंटरनेशेनल डे ऑफ इनोसेंट चिल्ड्रेन विक्टिम्स ऑफ एग्रेसन के तौर पर मनाया जाता है। UNO का प्रयास है कि दुनिया भर के वैसे बच्चे जो किन्हीं कारणों से भी पीड़ित हैं उनकी मदद की जाए और उनके चेहरे की मुस्कान को फिर से वापस लौटाया जा सके।

 

कई बड़े सितारों का बचपन में बनाया गया शोषण का शिकार

 

आपको जानकर हैरानी होगी की बॉलीवुड और यहां तक की हॉलीवुड के सितारों को भी बचपन में यौन शोषण का शिकार होना पड़ा था। मशहूर गायिका लेडी गागा ने भी जब अपने साथ हुए रेप के बारे में बताया तो सब सन्न रह गए थे। अब अगर बात बॉलीवुड की करें तो एक्ट्रेस कल्कि कोचलिन ने भी बताया था कि जब वे काफी छोटी थीं तब उनके साथ यौन शोषण किया गया।  निर्देशक अनुराग कश्यप को भी कई सालों तक लगातार यौन शोषण का शिकार होना पड़ा था। अपनी जिंदगी के इस तीखे अनुभव को शेयर करते हुए अनुराग कश्यप ने बताया कि बचपन के इस दौर को वे एक भयानक सपना मानते हैं और बहुत प्रयास के बाद वो खुद  को संभाल पाए। इसके अलावा मशहूर मॉडल सोफी हयात और सितार वादक अनुष्का शंकर जैसी हस्तियों को भी बचपन में इर तरह के दौर से गुजरना पड़ा था ।

 

क्या बताते हैं आंकड़े ?

 

 आंकड़ों के मुताबिक बच्चों के साथ दुर्व्यहार के मामलों में प्रत्येक साल वृद्धि होती जा रही है। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि पिछले दो दशक में अलग-अलग जगहों पर हुए संघर्षों में तकरीबन 20 लाख बच्चों की जान जा चुकी है। तकरीबन 1 करोड़ शरणार्थी बच्चों को यूएन की तरफ से पुनर्वास के इंतजाम किए गए हैं ।   इंटरनेशेनल डे ऑफ इनोसेंट चिल्ड्रेन विक्टिम्स ऑफ एग्रेसन को मनाए जाने के पीछे का मुख्य उद्देष्य यही है कि जो बच्चे आज की तारीख में किसी भी तरह के दुर्व्यहार के मामलों के पीड़ित हैं उनके अंदर जागरुकता फैलाई जा सके और हम अपने आसपास के माहौल और परिवेश को भी बच्चों के लिए सुखद बना सकें

 

भारत मे कैसे मनाया जाता है इंटरनेशन डे ऑफ इनोसेंट चिल्ड्रेन विक्टिम्स ऑफ एग्रेशन 

 

4 जून को भारत में भी कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। चाइल्ड केयर के क्षेत्र में काम कर रही संस्थाओं की तरफ से बच्चों के अधिकार व संरक्षण विषय पर डिबेट कराए जा रहे हैं। इस तरह के कार्यक्रमों का मकसद यही होता है कि बच्चों के अंदर इस तरह की भावना को प्रबल बनाया जाए कि उन्हें भी सम्मानपूर्व जीवन जीने का अधिकार है और वे अपने साथ हुए शोषण या दुर्व्यवहार का खुलकर विरोध करें। इस मौके पर कई जगहों पर डांसिंग, सिंगिंग और पेंटिंग कंपटीशन भी आयोजित किए जाते हैं।   

 

विशेषज्ञों के मुताबिक वैसे बच्चे जो इस तरह के दौर से गुजरते हैं उनके अंदर क्रिमिनल एक्टिविटीज में शामिल होने की संभावना सामान्य बच्चों के मुकाबले 9 गुना बढ़ जाती है। ये सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हमारा भी नैतिक दायित्व बनता है कि हम अपने आसपास के बच्चों को अच्छा और खुशहाल बचपन दे सकें।  चूंकि बच्चे ही आने वाले कल के भविष्य हैं तो ऐसे में हम सबको मिलकर आने वाले भविष्य की रक्षा करनी होगी। 

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

  • कमेंट
कमैंट्स()
Kindly Login or Register to post a comment.
+ ब्लॉग लिखें
Loading
{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}

{{trans('web/app_labels.text_Heading')}}

{{trans('web/app_labels.text_some_custom_error')}}