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क्या गर्भावस्था में मछली का सेवन लाभदायक है?

Sukanya
गर्भावस्था

Sukanya के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Dec 22, 2020

क्या गर्भावस्था में मछली का सेवन लाभदायक है
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

बचपन में एक कविता पढ़ते थे, “मछली जल की रानी है”। आज की भाग दौड़ की जिंदगी में मछली, दिमाग को तंदरुस्त और स्फूर्तिवान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अगर प्राकृतिक स्त्रोत की बात करें तो, मछली ही एक जीव है जिसकी वसा में ओमेगा-3 भरपूर मात्रा में पाई जाती है। आपके बच्चो के मानसिक और शारीरिक विकास के में ये वसा संजीवनी का काम करती है। तुलनात्मक दृष्टि से देखे तो वो संतान जिनकी माताओं ने गर्भावस्था के दौरान भोजन में मछली का प्रयोग किया था, जन्म के समय दूसरे बच्चों से स्वस्थ होते हैं। तो आइये जानें कि गर्भावस्था में मछली के सेवन से होने वाले फ़ायदे क्या क्या हैं
 

गर्भावस्था में मछली के सेवन से होने वाले फायदे / Benefits Of Eating Fish During Pregnancy In Hindi

  1.  बीमारियों से बचाव-  मछली के तेल में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। इस तेल के सेवन से ह्रदय रोग, अर्थराइटिस और कैंसर जैसी घातक बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके अलावा इसमें पेटाथेनिक एसिड और डी.एच. ए (डिकॉसहेक्सिनाइक एसिड) पाया जाता है, जो तनाव से मुक्ति दिलाता है। गर्भावस्था के दौरान तेल का सेवन करती है तो यह उनके तथा होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य को बेहद लाभ पहुंचाता है। मछ्ली के प्रयोग से गर्भवती स्त्री भी आंतरिक तौर पर खुद को स्वस्थ महसूस करती है।
     
  2.  मस्तिष्क का विकास- मस्तिष्क की लगभग 75% कोशिकाए गर्भावस्था में विकसित होती हैं। शेष 25% का विकास जन्म के एक वर्ष के बाद शुरू होता है। इसलिए गर्भावस्था में मछली का उपयोग गर्भस्थ शिशु के मानसिक विकास को बढ़ाता है। मछली के तेल में पाए जाने वाले ओमेगा 3 फैटी एसिड में जो डी.एच.ए पाया जाता है वह भ्रूण के मस्तिष्क विकास और ज्ञानात्मक विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है। व्यावहारिक दृष्टि से देखे तो, बच्चों की ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता,पढने की क्षमता, भावनात्मक अभिव्यक्ति की कार्यप्रणाली मनुष्य के दिमाग के जिस हिस्से में कार्य करती है ये वसा उस हिस्से को विकसित करती है। मछली के इन्ही गुणों के कारण इसे ब्रेन फ़ूड यानी की “मस्तिष्क भोजन” का नाम दिया गया है।
     
  3. तनाव से मुक्ति- एक शोध के अनुसार खून में डी.एच. ए और सेरोटोनिन की अधिक मात्रा ही व्यक्ति को तनाव ग्रस्त कर देता है। ऐसे में अगर गर्भवती महिला डी.एच. ए युक्त मछली के तेल का सेवन करे तो इससे अवसाद, उदासी, चिंता, व्याकुलता, मानसिक थकान, तनाव, आदि मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है। मछली में पाए जाने वाली वसा कई खतरनाक बीमारियों से भी बचाता है, उदाहरण के तौर पर ओमेगा-3(वसा) के प्रयोग से अल्जाइमर, अवसाद और डिमेंशिया जैसी बीमारियों से बचाव होता है।
     
  4.  गर्भस्थ शिशु का शारीरिक विकास-  एक शोध के अनुसार गर्भवती महिला के द्वारा मछली का सेवन करने से गर्भस्थ शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। साथ ही साथ यह गर्भस्थ शिशु को एलर्जी, हृदय संबंधी एवं पाचन संबंधी घातक बीमारियों से भी बचाता है। इसलिए गर्भावस्था में महिला द्वारा मछली का सेवन अत्यधिक फायदेमंद है। इसमें प्रोटीन, विटामिन डी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो एक बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। गर्भवती महिला व शिशु की हड्डियों की इसके तेल से मालिश की जाए तो इससे दोनों की हड्डियां मजबूती होती हैं।
     
  5. पोषक तत्वों की आपूर्ति- गर्भावस्था में मछली का सेवन करने से आपको और आपके शिशु को विभिन्न पोषक तत्व मिलते हैं। इससे बच्चा डिस्लेक्सिया और एडीएचडी जैसी बीमारियों से दूर रहता है। सरकारी आंकड़ों की माने तो औसतन 100 में 5 बच्चे इन बीमारियों का शिकार होते हैं और पोषक तत्वों की कमी ही इसका कारण होती है। अविकसित मष्तिस्क होने के कारण ऐसे बच्चे सामान्य जीवन नहीं जी पाते और कई बार मानसिक विकलांगता का शिकार भी हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में खाने के रूप में मछली का उपयोग अनिवार्य हो जाता है।

नोट : गर्भावस्था के दौरान मछली का सेवन किया जाना चाहिए, लेकिन इसका सेवन कम मात्रा में करें।
 

हालांकि, प्रेगनेंसी के दौरान सारी मछलियों का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। खासकर, एक सप्ताह में तैलीय मछली की दो से ज्यादा सर्विंग न खाएं। तैलीय मछलियों में बांगड़ा, पेड़वे या माथी मीन, रावस या सामन मछली, ट्राउट, चूरा, पिलचर्ड और हिल्सा या भिंग शामिल हैं।
 

ऐसे में, आप इन मछलियों को खा सकते हैं, लेकिन वह भी एक सीमित मात्रा में :  सी ब्रीम, टरबोट, हलिबेट (कुप्पा / जेडार), डॉगफिश, एन्कोवी, हिलसा, छोटी समुद्री मछली, इंद्रधनुषी मछली, सैल्मन, सार्डिन, व्हाइटफ़िश।
 

इन मछलियों का सेवन भूलकर भी न करें : स्वोर्डफ़िश, शार्क, टाइलफिश, बांगड़ा, फ्रोजेन टूना, धारीदार बास, ब्लू फिश।

गर्भ के समय तो मां को भोजन में मछली का प्रयोग करना ही चाहिए, बच्चे के जन्म के बाद भी ये आवश्यक है,’कम से कम तब तक जब तक माँ को ही दुग्धपान कराना हो’। महत्वपूर्ण ये है कि इस समयावधि में मछली का प्रयोग माँ के स्वस्थ होने का भी पूरक होता है। सप्ताह में एक मछली का प्रयोग माँ को आंतरिक तौर पर मज़बूत रखता है। जीवविज्ञान में हो रहे शोध की मानें तो, गर्भावस्था के दौरान मछली जच्चा और बच्चा दोनों के लिए अमृत होती है। विश्व का वैज्ञानिक इतिहास हो या पौराणिक इतिहास, एक प्राकृतिक स्रोत के रूप में मछली का प्रयोग आवश्यक और अतुलनीय रहा है।

baked fish

मछली में पाए जाने वाले पोषक तत्व / Fish Nutritional Value in Hindi
 

मछली में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस टेबल की मदद ले सकते हैं।

पोषक तत्व मूल्य प्रति 100 ग्राम 
पानी 49.5 g
ऊर्जा 277 kcal
प्रोटीन 11.01 g
शुगर 1.65 g
कैल्शियम, Ca 16 mg
आयरन, Fe 0.84 mg
मैग्नीशियम, Mg 25 mg
फास्फोरस, P 191 mg
थियामिन 0.122 mg
राइबोफ्लेविन 0.116 mg
नियासिन 1.536 mg
विटामिन बी-6 0.078 mg
फोलेट 24 µg
विटामिन बी-12 0.96 µg
विटामिन ए, RAE 4 µg
विटामिन ए, IU 18 IU
विटामिन ई (अल्फा-टोकोफेरोल) 6.88 mg
कोलेस्ट्रॉल 28 mg
टोटल लिपिड (फैट) 16.23 g
कार्बोहाइड्रेट 21.66 g
फाइबर, टोटल डाइटरी 1.5 g
पोटेशियम, K 185 mg
सोडियम, Na 402 mg
जिंक, Zn 0.42 mg
कॉपर, Cu 0.059 mg
मैंगनीज, Mn 0.182 mg
सेलेनियम, Se 15.7 mg
विटामिन डी (डी 2 +डी 3) 1 IU
विटामिन-के 4.7 µg
फैटी एसिड, टोटल सैचुरेटेड 3.733 g
फैटी एसिड, टोटल मोनोअनसैचुरेटेड 3.193 g
फैटी एसिड, टोटल पॉलीअनसैचुरेटेड 7.824 g

मछली खाने के प्रमुख फायदे क्या-क्या हैं? / Benefits of Fish in Hindi

मछली खाने के बहुत सारे फायदे हैं, अपने देश के कई हिस्से हैं जहां मछली प्रमुख खाद्य पदार्थ है। 

  • हृदय के लिए-  हृदय को स्वस्थ बनाने के लिए मछली बहुत अच्छा स्रोत होता है। मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड हृदय को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कारगर है। 
  • नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफॉर्मेशन पर छपे एक रिसर्च के नतीजों के मुताबिक मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है और इसकी वजह से ये मस्तिष्क की क्षमता को बढ़ाने में मददगार है। इसका सेवन करने से बच्चों में दिमागी क्षमता के कमजोर होने के जोखिम कम होता है।
  • डिप्रेशन से राहत दिलान में भी मछली बहुत उपयोगी हो सकता है। मछली का सेवन करने से चित्त शांत होता है और गुस्सा भी नियंत्रण में होता है।
  • अस्थमा की समस्या से परेशान बच्चे को मछली का सेवन करने की सलाह दी जाती है। 
  • जिन्हें नींद से संबंधित समस्याएं हैं उनको भी मछली का सेवन करने का सुझाव दिया जाता है। शोधकर्ताओं के मुताबिक मछली में पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मौजूद होता है और इसकी वजह से नींद की समस्या दूर होती है। 
  • मछली का सेवन करने से इम्यूनिटी पावर यानि रोग प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि होती है
  • जिन्हें आंख से संबंधित समस्याएं होती है उनके लिए भी मछली बहुत फायदेमंद हो सकता है। एनसीबीआई पर छपे एक रिसर्च के मुताबिक मछली में पाया जाने वाले ओमेगा-3 फैटी एसिड के चलते आंखों को फायदा पहुंच सकता है। 
  • रक्तचाप की समस्या में भी मछली बहुत उपयोगी हो सकता है। रक्तचाप को नियंत्रण करने में मछली का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
  • त्वचा की समस्या से निजात दिलाने में भी मछली का सेवन किया जा सकता है। 
  • बालों से संबंधित समस्याएं अगर है तो उसमें भी मछली बहुत फायदेमंद हो सकता है। 


मछली का उपयोग कैसे करें? / How to Use Fish in Hindi
 

इस ब्लॉग को पढ़ने वाले बहुत सारे लोग ऐसे भी होंगे जिन्होंने अब तक मछली का सेवन नहीं किया होगा तो उनके लिए ये जानना बहुत जरूरी है कि मछली का प्रयोग अपने आहार में आप किस रूप में कर सकते हैं।

  • बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र व दक्षिण भारत के कई राज्यों में मछली प्रमुख आहार होता है।  फिश करी मछली का सबसे लोकप्रिय व्यंजन है जिसे आप चावल के साथ खा सकते हैं। 
  • मछली का टिक्का बहुत ही स्वादिष्ट होता है और इसको बनाने के दौरान मछली में पाया जाने वाला कांटा बाहर निकाल दिया जाता है तो ये खाने में भी आसान हो जाता है। 
  • मछली के शौकीन लोग फिश बिरयानी बनाकर भी खूब लुत्फ उठाते हैं।
  • शाम के स्नैक्स के रूप में मछली को फ्राई करके खा सकते हैं।
  • फिश मंचूरियन बनाकर भी मछली का आनंद ले सकते हैं।
  • सर्दी के मौसम में मछली का सूप बनाकर भी पीया जा सकता है

मछली से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या रोज मछली खाना अच्छा है?

जैसा कि हम जानते हैं कि किसी प्रकार के खाद्य पदार्थ का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने के नुकसान हो सकते हैं तो मछली का सेवन सप्ताह में दो बार मछली किया जा सकता है।

क्या  त्वचा से संबंधित समस्या के दौरान मछली का सेवन कर सकते हैं ?

 विशेषज्ञों के मुताबिक मछली का सेवन त्वचा के लिए अच्छा हो सकता है। यह सूरज की हानिकारक किरणों से त्वचा को बचा सकती है।

मछली ताजी है या बासी, इसका पता कैसे चलेगा?

ये जानना बहुत जरूरी है क्योंकि ताजी मछली का सेवन करना चाहिए। मछली की गंध से इसके ताजे होने का पता लगाया जा सकता है। अगर मछली को मरे हुए बहुत देर हो गई है, तो उसकी गंध में बदबू आने लगती है।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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कमैंट्स ()
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| Dec 29, 2018

े 2 महीने में. मैं मांस मच्छी खा सकते है

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| Feb 14, 2020

Hi

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| Dec 22, 2020

बहुत ही बढिया जानकारी। मछली से संबंधित समग्र जानकारी दी गई है इस ब्लॉग में

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| Feb 02, 2021

Hm eag kis taime kha sakte hai desi aeg morning me yaa night me

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