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शिशु की देख - रेख

क्या शिशु को किस करना सुरक्षित है? किन बातों का रखें ध्यान?

स्पर्धा रानी
0 से 1 वर्ष

स्पर्धा रानी के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Mar 31, 2021

क्या शिशु को किस करना सुरक्षित है किन बातों का रखें ध्यान
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

रोहित को बार- बार अपने बच्चे को किस करना बहुत अच्छा लगता है। वह उस दिन से अपने नन्हे को दुलारने का सपना देखा करता था, जिस दिन से उसे यह पता चला था कि उसकी पत्नी शिखा प्रेगनेंट है। एक बार ऐसे ही अपने शिशु के पीडियाट्रिशियन (Pediatrician) के क्लिनिक में उसने डॉक्टर के सामने अपने शिशु को किस कर लिया। वह भी एक बार नहीं, बार- बार! डॉक्टर को यह बड़ा अजीब लगा और उन्होंने रोहित को शिशु को किस करने से मना कर दिया। साथ ही उन्होंने रोहित और शिखा को शिशु को किस करने के दुष्प्रभावों के बारे में बताया। उन्होंने यह भी बताया कि अगर आपको अपने बच्चे को किस करने का बहुत मन ही कर रहा है तो उसके लिए कुछ सुरक्षात्मक रवैया अपनाने की जरूरत है।

शिशु को किस करने के क्या-क्या जोखिम हो सकते हैं?/ The Dangers of Kissing Babies In Hindi

यह स्वाभाविक है कि आप जब किसी भी शिशु को देखते हैं तो आपका मन उसे चूमने का, प्यार करने का करेगा ही। लेकिन उसी समय यह उस शिशु के पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे अपने बच्चे को इन्फेक्शन से बचाकर रखें। एक शिशु को किस करने से निम्न जोखिम हो सकते हैं –

  • ब्लिस्टर- इसे कोल्ड सोर्स भी कहा जाता है। जब एक बड़ा व्यक्ति आपके शिशु को किस करता है और उसे ब्लिस्टर है तो आपके शिशु को भी यह होने का जोखिम रहता है। यह होंठों और मुंह के पास छोटे से ब्लिस्टर से शुरू होता है। लेकिन यह जल्दी ही चेहरे के अन्य हिस्सों में भी फैल जाता है। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को कोल्ड सोर्स हैं तो उसे शिशु को किस नहीं करना चाहिए।
     
  • सांस संबंधी परेशानी- यह एक ऐसी परेशानी है, जिसमें शिशु के फेफड़े इन्फेक्टेड हो जाते हैं और उसे सांस लेने में तकलीफ होती है। यह तेजी से फैलता है, इसलिए ध्यान रखना जरूरी है कि इससे इन्फेक्टेड कोई वयस्क आपके शिशु को किस न करे।
     
  • फूड एलर्जी- महिलाएं इस बात से अनजान होती हैं कि उनकी लिपस्टिक में ग्लूटेन होता है, जो शिशु के लिए ठीक नहीं। साथ ही लोगों को नहीं पता होता कि शिशु को किस फूड से एलर्जी हो सकती है। ऐसे में, उनके मुंह में खाया गया फूड शिशु के लिए एलर्जी का सबब बन सकता है।
     
  • किसिंग डिजीज- मोनोन्यूक्लियोसिस एक ऐसी बीमारी है, जिसे किसिंग डिजीज कहा जाता है। यह सलाइवा से पास होता है, यानी किस करने से। हालांकि, यह टीनएज और बड़ों को ज्यादा होता है, लेकिन शिशु भी इससे अछूते नहीं हैं। इसके तहत शिशु की नाक बहने लग सकती है या वे क्रैंकी हो सकते हैं। उन्हें सांस संबंधी परेशानी भी हो सकती है। यह एक वायरल डिजीज है और शिशु को तब तक इससे जूझना पड़ सकता है, जब तक कि उसका अपना इम्यून सिस्टम अपने आप इस इन्फेक्शन को दूर ना कर ले।
     
  • कैविटीज- ओरल हाइजीन के बारे में हम सबको पता है। अगर हम इसका पालन नहीं करते हैं तो कैविटीज होने का खतरा रहता है। बहुत कम लोग जानते हैं कि किस करने से भी बच्चों को कैविटीज हो सकते हैं। जब किसी और के सलाइवा से स्ट्रेपटोकोक्कस म्यूटंस नामक बैक्टीरिया बच्चे तक पहुंचते हैं तो उनके छोटे- छोटे दांतों में कैविटीज होने का खतरा रहता है।
     
  • कमजोर इम्यून सिस्टम- जब शिशु के गट बैक्टीरिया डेवलपमेंट फेज में रहते हैं तो उनके बीमार होने के ज्यादा चांसेज रहते हैं। जब कोई बड़ा व्यक्ति बिना साफ- सुथरे हाथों के बच्चे को किस करता है तो जर्म्स उसके पास से बच्चे तक आ जाते हैं। और उसका कमजोर इम्यून सिस्टम उन जर्म्स से लड़ता है।
     
  • हैंड फुट एंड माउथ डिजीज- इसमें बच्चे की पूरी बॉडी और मुंह पर सोर्स हो जाते हैं। यह क्लोज कॉन्टैक्ट से होता है, जिसमें किस करना भी शामिल है। ऐसे में बच्चे थकान महसूस करते हैं, उनका गला खराब हो जाता है और वे क्रैंकी हो जाते हैं।

बच्चे को किस करते समय किन बातों का रखें ध्यान 

हर व्यक्ति के शरीर में कुछ बैक्टीरिया और वायरस होते हैं, जो बड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाते लेकिन बच्चों को प्रभावित कर सकते हैं।ऐसे इसलिए क्योंकि शिशुओं का इम्यून सिस्टम पूरी तरह से विकसित नहीं होता है। इसलिए शिशुओं को किस करते समय निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए –

  1. अपना पर्सनल और ओरल हाइजीन को बनाए रखें।
     
  2. बच्चे बहुत ज्यादा सलाइवा वनाते हैं तो उनकी ओरल हाइजीन का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
     
  3. अपने बच्चे को नियमित तौर पर नहलाते रहें।
     
  4. उसे छूने से पहले अपने हाथ अच्छी तरह से साफ कर लें।
     
  5. अपने बच्चे के मुंह और चेहरे को साफ करने के लिए वाइप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह से वे फ़्रेश भी महसूस करेंगे।
     
  6. अपने साथ, अपने नजदीकी लोगों को बच्चे को छूने से पहले अपने हाथ साफ करने बोलें। अगर किसी की तबियत ज़रा भी खराब है तो उसे प्यार से समझाएं और बच्चे को स्पर्श करने से मना करें।
     
  7. बच्चे की चीजों को लगातार सैनिटाइज करते रहें और परिवार के अन्य लोगों की चीजों से दूर रखें।

ध्यान रखें कि अगर आपने इन सावधानियों को बरता तो आपका शिशु पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा। कुछ लोगों की आदतें होती हैं, बल्कि कई बार घर के बड़े बुजुर्ग जैसे की दादा-दादी भी शिशु को किस करके ही अपने प्यार का एहसास कराना चाहते हैं। कुछ ऐसी भी परिस्थितियां बन जाते होंगे कि आप चाहते तो होंगे मना करना लेकिन फिर मन मसोस कर रह जाते होंगे। लेकिन यहां सवाल आपके बेबी के स्वास्थ्य और सुरक्षा से संबंधित है इसलिए आप प्यार से ही सही, शिशु को किस करके दुलार जताने वालों को विनम्रतापूर्वक ऐसा करने से मना कर दें। आप चाहें तो अपने डॉक्टर का हवाला देकर कह सकते हैं कि डॉक्टर ने कहा है कि बेबी को किस करने से इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है। 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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