बाल मनोविज्ञान और व्यवहार

बच्चों में झूठ बोलने की आदत से इस तरह रोकें

Parentune Support
3 से 7 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Apr 19, 2018

बच्चों में झूठ बोलने की आदत से इस तरह रोकें

बच्चे बहुत नाज़ुक मन के होते हैं, बिलकुल गीली मिट्टी जैसे। उनके व्यक्तित्व को जैसा चाहें वैसा आकार दिया जा सकता है। जब बच्चे बड़े होने लगते हैं, स्कूल जाने लगते हैं तब वे अपने परिवार के सुरक्षित वातावरण से बाहर जाते हैं और ज्यादातर समय अपने दोस्तों के साथ बिताते हैं। इससे होता यह है कि बच्चा अलग-अलग प्रकार के बच्चों के संपर्क में आता है जिससे उसके व्यवहार में कई परिवर्तन आते हैं, वो कुछ अच्छी चीज़े सीखता है तो कुछ बुरी भी। झूठ बोलना उसी में से एक है। हर माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चे को ऐसी शिक्षा और परवरिश दें कि वे कभी झूठ न बोलें। अगर बच्चों को बचपन से ही झूठ बोलने की आदत पड़ जाए, तो यह बड़े होकर मुसीबत का कारण बन सकती है। इसलिए अगर आपको बच्चे को भी ऐसी आदत हो गई तो समय रहते इसे पहचानें और दूर करने की कोशिश जरूर करें।


बच्चों के आपसे या औरों से झूठ बोलने के कई कारण हो सकते हैं। अक्सर बच्चे सज़ा के डर से झूठ बोलते हैं। इसके लिए ज़रूरी है कि बच्चों को बचपन से ही अपने विचार और अपने मन की बात कहने की स्वतंत्रता मिले। बच्चे को समझाये कि कैसी भी परिस्थितियां हो सच अपने आप में एक ऐसा अस्त्र हैं जो इंसान को बड़ी से बड़ी मुसीबत से लड़ने की ताकत देता हैं।  परवरिश का एक बड़ा हिस्सा है कि चाहे कितनी भी बड़ी ग़लती हो जाए लेकिन बच्चा अपने माता- पिता से हमेशा सच बोले। ऐसा न हो कि आपकी नाराजगी या डांट के डर से आपके बच्चे आपसे झूठ बोले और किसी मुसीबत में फंस जाएं।


अगर बच्चे कुछ गलत चीज़ या बहुत महंगी चीज़ की मांग करते हैं तो उन्हें आपके मना करने का उचित कारण बताएं कि आपने ऐसा क्यों किया। बच्चे को कनविंस करें और आगे से वह आपकी बात मानने लगेगा। माता-पिता और शिक्षकों को अपने बर्ताव में पारदर्शिता यानी कि ट्रांसपरेंसी रखनी ज़रूरी है। अगर आप अपने बच्चे से कोई प्रॉमिस करते हैं तो उसे ज़रूर निभाएं। उनको ये एहसास दिलाएं कि आप उन पर विश्वास करते हैं तो वे कोई गलत काम नही करेंगे और अगर कोई गलती करेंगे भी तो आपको बताने में डरेंगे नहीं। वे हर काम करने से पहले आपकी अनुमति लेंगे और हमेशा सच बोलेंगे क्योंकि वे आपसे डरते नहीं हैं बल्कि आप पर विश्वास करते हैं और जानते हैं कि आप सब ठीक कर देंगे।

 

  • 3 से 7 साल की उम्र के बच्चे थोड़ा ज्यादा झूठ बोलते हैं क्योंकि इस उम्र में वे सच और झूठ के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं। वे अपनी कल्पनाओं को शब्दों में पिरोकर और उसे दूसरों को बताकर सच का रूप दे देते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि आपका बच्चा झूठ बोलने लग गया है। इसके लिए आपको उसका वास्तविकता से परिचय कराना होगा। उसकी मानने लायक इच्छाओं को पूरा करें और जो नही हो सकतीं उसके लिए उसकी समझ पैदा करवाएं।
     
  • बात करते समय बच्चे के चेहरे और हाव- भाव भी पर ध्यान दें। अकसर झूठ बोलते समय बच्चे नज़रें चुराते हैं, कपड़े के कोने से खेलते हैं, उनके माथे पर बल पड़ने लगता है या फिर पसीना भी आने लगता है। आपका बच्चा झूठ बोल रहा है या नहीं, यह जानने के लिए बात बदल कर देखें। अगर इससे वह सहज महसूस करें और उसका रिएक्शन चेंज हो, तो समझ जाएं कि दाल में कुछ काला है। अगर आपको बच्चा झूठ बोल रहा हैं तो वह बात करते हुए हड़बड़ाएगा। वो साफ-साफ अपनी बात नहीं कह पाएगा। और अगर बच्चा किसी बात पर अचानक गुस्सा करने लगे और बार-बार एक ही सवाल पूछे जाने से चिड़चिड़ा हो जाए, तो समझ जाना चाहिए कि वो कोई बात छिपा रहा है। पैरेंट्स के डर से कई बार बच्चे झूठ बोल देते हैं और अपने इस झूठ को छिपाने के लिए वह अजीबोगरीब हरकतें करना शुरु कर देते हैं।
     
  • बचपन में मम्मी-पापा की नाराजगी से बचने के लिए बच्चे छोटे-छोटे झूठ बोलना शुरु करते हैं। धीरे-धीरे वे सच न बोलने के इतने आदी हो जाते हैं कि उन्हें ख़ुद ही पता नहीं होता कि एक दिन में वे कितनी बार झूठ बोलते हैं। इसी सच न बोलने की आदत के चलते बच्चों और माता-पिता के बीच संवादहीनता आ जाती है और आगे चल कर इसका परिणाम इतना भयानक होता है कि छोटी-छोटी समस्या भी वे माता-पिता से शेयर नहीं कर पाते और अकेलेपन से जूझते हुए आत्महत्या तक कर बैठते हैं!! ग़लती होने पर उन्हें डरा कर नहीं बल्कि प्यार से पूछें। इससे वे आपसे बात करने में हिचकिचाएंगे नहीं।
     
  • बच्चे के पहले आदर्श उसके माता-पिता होते हैं। अगर आप खुद ही अक्सर झूठ बोलेंगे तो कैसे अपने बच्चे से सच बोलने की उम्मीद कर सकते हैं। ये सही है कि कभी-कभी ऐसी परिस्थिति आ जाती है कि हमें झूठ बोलना पड़ जाता है, तब अपने बच्चे को बताएं कि आपने ऐसा क्यों किया। इससे बच्चा एक निश्चित व्यवहार करना सीखता है।
     
  • यह बात बच्चों के मन में अच्छी तरह बैठा दें कि यदि कोई व्यक्ति ख़ुद होकर अपनी ग़लती स्वीकार करता है तो सामनेवाले व्यक्ति का आधा क्रोध वैसे ही शांत हो जाता है। बच्चे की ईमानदारी और सच्चाई पर उसे शाबाशी दें, इससे उसे प्रोत्साहन मिलेगा। अब पुराना समय नहीं है कि बच्चे एक बार में बात सुन लिया करते हैं। अब उन्हें गुमराह करने के लिए बहुत-सी चीज़ें है, इसलिए माता-पिता बच्चों को डांटे और पिटाई ना करें बल्कि प्यार से उन्हें सब सिखाएं। अपने बच्चे को समझाइए कि सच बोलने से हमने कब किसको कौनसी बात बोली थी यह याद रखने के लिए अपने दिमाग पर जोर नहीं डालना पड़ता। इससे हमारे मन में किसी भी प्रकार का कोई तनाव नहीं रहता। सच बोलने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि हमारे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती हैं। क्योंकि हमें झूठ पकडे जाने का डर नहीं रहता। सच बोलने से हम अपनी खुद की नजरों में उपर उठते हैं। हम अपने आप में खुश रहते हैं। जब हम अंदर से खुश रहते हैं तो अपने काम में अपना 100% दे सकते हैं!

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  • 1
कमैंट्स()
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| Apr 20, 2018

Nice information

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