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कैसे छुड़ाएं हर चीज को मुंह में लेने की आदत से अपने बच्चे को ?

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कैसे छुड़ाएं हर चीज को मुंह में लेने की आदत से अपने बच्चे को

क्या आपका बच्चा भी आजकल हर चीज को अपने मुंह में डालने लगा है?

अगर ऐसा है तो इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं है बल्कि यह बहुत ही सामान्य व्यवहार है और ऐसा करके आपका बच्चा आस-पास के माहौल में बढ़ती हुई रूचि का संकेत देता हैं।

जन्म के बाद तीन साल तक शिशु को जो कुछ मिले वह उसे मुंह में डालते हैं और हर चीज को छूना चाहते हैं क्योंकि उनके लिए उनका सेंसर उनकी जीभ और उंगलियां ही होती हैं और टीवी का रिमोट हो, पेन या कार की चाबी सब बच्चों के मुंह में पहुंच जाता है।

बच्चे को इस आदत से छुटकारा दिलाने के लिए क्या करें-

इस बारे में की गई जाचों के मुताबिक बच्चे ऐसा करके जिंदगी जीना (Survival) सीखने का स्वभाव दर्शाते हैं जो कि अच्छा संकेत है लेकिन हर चीज उठा के मुंह डालना बच्चे के लिए खतरनाक भी हो सकता है।

यहाँ हम आपको कुछ सुरक्षा उपायों के बारे में बताएंगे जिससे आप बच्चे की कुछ भी मुंह में डालने की आदत पर रोक लगाने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षित भी रख सकती हैंः

खतरनाक चीजों को बच्चों की पहुंच से दूर करें- बच्चे नहीं जानते कि कौन सी चीज उनके लिए खतरनाक है और कौन सी नहीं। इसके अलावा बच्चा अपने आस-पास मौजूद हर चीज में दिलचस्पी लेता है और उसे पाना चाहता है जिससे अपनी आदत के मुताबिक उसे छू या मुंह में डालकर उसका अनुभव ले सके इसलिए बेहतर है कि आप पहले से सावधान रहें और उसकी पहुंच से सारी खतरनाक चीजों को दूर कर दें।

बच्चे को डांटने या धमकाने से बचें- बच्चा किसी चीज को अपनी जिज्ञासा मिटाने के लिए अपने मुंह में डालता है। ऐसे में अगर आप उसे डांटती या धमकाती हैं तो यह बात उसे हतोत्साहित करेगी और इससे उसकी चीजों के बारे में जानने और सीखने की ललक कम होगी तो उसे डांटने के बजाय पक्का करें कि उसके चारों ओर केवल सुरक्षित चीजें हों जिनसे वह खेल सके। इस समय आप उसके आस-पास ही रहें और उस पर नजर रखें।

बच्चे को न का मतलब समझायें- हो सकता है कि आपका बच्चा शरारत या मौज-मस्ती करते हुए कोई ऐसी चीज उठा ले जो उसके लिए नुकसानदेह है, तो उसे ऐसा करने से मना करें।

बच्चे को सही-गलत का फर्क बतायें और समझायें कि यदि किसी बात के लिए मना किया जाए या न कहा जाए तो इसका मतलब है उसे वह काम नहीं करना। हो सकता है कि वह एक बार में आपकी बात न माने लेकिन इसे दोहराए जाने पर वह इसका मतलब आसानी से समझ जाएगा।

टीथर का इस्तेमाल करें- कभी कभी बच्चे दांत निकलने के समय भी चीजों को मुंह में लेते हैं क्योंकि ऐसा होने पर उनके मसूड़ों में संवेदन होता है और मसूड़ों को आराम देने के लिए उन्हे चीजों को चबाने की आदत हो जाती है। ऐसे में बेहतर है बच्चे को एक टीथर लाकर दें। आजकल बाजार में रसभरी टीथर, रबर टीथर, चिनार की लकड़ी के टीथ रिंग के अलावा ऐसे मुलायम खिलौने भी मौजूद हैं जो न केवल बच्चों के मसूडों को आराम देते है बल्कि उन्हें व्यस्त भी रखते हैं।

यहाँ एक बात जो सबसे जरूरी है वो है बच्चे की इस्तेमाल की चीजों को किटाणूमुक्त रखना, खासकर उन चीजों को जिन्हें वह मुंह में डालता है जिससे आपका बच्चा मुंह के जरिए होने वाले संक्रमण के खतरे से बचा रहे।

आमतौर पर किसी बच्चे का जिज्ञासा में चीजों को अपने मुंह में लेना उसके लगभग दो साल का होने तक जारी रहता है। कुछ बच्चों में यह उनके दो साल का हो जाने के बाद भी जारी रह सकता है और अगर ऐसा होता है तो इसमें डरने जैसा कुछ भी नहीं है क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ सभी बच्चे अपनी इस आदत से खुद ही छुटकारा पा लेते हैं। 

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