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अपने बच्चे के लिए ऐसे करे 2018 की प्लानिंग

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Updated on Jan 28, 2018

अपने बच्चे के लिए ऐसे करे 2018 की प्लानिंग

समय तेजी से बदल रहा है और उसी के साथ बदल रही है आने वाली जनरेशन की सोच और उनके सपने। हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा जिंदगी में कुछ बेहतर करे, अपनी एक अलग पहचान बनाए और जिंदगी से संघर्षों से जूझना सीखे।नये साल की शुरुआत हो चुकी है ,हर कोई अपने नए साल की प्लानिंग जरुर करता है पर एक माता-पिता होने के कारण आपको अपने बच्चे के नये साल की प्लानिंग करना बहुत जरूरी है | बच्चों को इस लायक बनाते हैं कि वो अपने फैसले खुद कर सकें। 

निचे कुछ टिप्स दिए गए है जो आपके बच्चे के 2018 को प्लान करने और अच्छा बनाने में मदद करेंगे
 

बच्चे में गॉड गिफ्ट को पहचानें- हर बच्चे में कोई न कोई अलग बात जरूर होती है, जिसे हम गॉड गिफ्ट कहते हैं। कई बार ये गॉड गिफ्ट बच्चों में शुरू से ही नजर आने लगता है और कई बार थोड़ा वक्त गुजरने के बाद नजर आता है। लेकिन जोर, जबरदस्ती और अनावश्यक दबाव से कई बार ये गॉड गिफ्ट सामने नहीं आ पाता है। इसलिए बच्चों के साथ थोड़ा नर्मी बरतें और उन्हें अपना गॉड गिफ्ट पहचानने में मदद करें। कई बार टोकने से अच्छा है कि आप बच्चों के कामों को ध्यान से देखें और एनलाइज़ करें। इससे आपको अपने बच्चे और उसके गॉड गिफ्ट को समझने में मदद मिलेगी।
 

सिर्फ किताबी कीड़ा ना बनाये - कई मां-बाप पढ़ाई को लेकर गलत धारणा पाल लेते हैं। उन्हें लगता है कि किताबी ज्ञान ही सबकुछ है और वो बच्चों को दिनभर किताब में ही उलझाये रखना चाहते हैं। इस चक्कर में कई बार बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान ठीक से नहीं मिल पाता, जिसकी जरूरत स्कूल के बाद उन्हें सबसे ज्यादा पड़ती है। इसलिए बच्चों को पढ़ाई से अलग थोड़ा समय खेल-कूद, टीवी और सिलेबस से बाहर की बुक्स पढ़ने के लिए दें।
 

बच्चों को हर बात पर न टोकें- आजकल की जनरेशन को हर बात पर टोका जाना अच्छा नहीं लगता है। इसलिए बच्चों को थोड़ी-थोड़ी सी बात पर टोकें और डाटें नहीं, इससे बच्चे झूठ बोलने लगते हैं। जब बच्चे छोटे हों, तभी उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को पूरी करने की आदत डालें, जिससे थोड़ा बड़ा होने पर आप उनके फैसलों पर भरोसा कर सकें। अगर आपने बचपन से बच्चे को जिम्मेदार बनाया है तो बाद में उन्हें टोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
 

डिसिप्लिन और सजा के अंतर को समझें- हर मां-बाप चाहते हैं कि उनका बच्चा डिसिप्लिन सीखे और डिसिप्लिन में रहे। लेकिन बचपन में मन चंचल होता है इसलिए कई बार नियमों को तोड़ने में एक अलग तरह का आनंद मिलता है। ऐसे में बच्चे मन मुताबिक काम करते हैं तो कभी-कभी उनसे कुछ गलती भी हो जाती है। ऐसे समय में उन्हें सजा देने या उनको मारने-पीटने से उन पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसी तरह कई मां-बाप डिसिप्लिन और सजा में अंतर नहीं समझते हैं, जिसकी वजह से बच्चे गुस्सा करना सीख जाते हैं और चिड़चिड़े हो जाते हैं। जैसे- टीवी देखते हुए खाना खाना गलत है लेकिन इस बात के लिए बच्चों को मारना और सजा देना उससे भी ज्यादा गलत है।
 

घर के कामों में बच्चों की राय लें- छोटा बच्चा हो या कोई बड़ा व्यक्ति, घर-परिवार में अहमियत मिलना सबको अच्छा लगता है। इसलिए बच्चा जब थोड़ा समझदार हो जाए, तो घर के छोटे-मोटे फैसलों में उनकी भी राय लें और अगर सही लगे तो उन पर अमल भी करें। कम से कम बच्चा ये फैसला तो कर ही सकता है कि नाश्ते और खाने में क्या बने, उसके कमरे की दीवारों का रंग कैसा हो या घर में कौन से पेट्स पालना चाहिए।

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