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कैसे तय करें कब आपके बच्चे को चाहिए ट्यूशन? इसे पढ़ें

Gaurima
3 से 7 वर्ष

Gaurima के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jul 24, 2018

कैसे तय करें कब आपके बच्चे को चाहिए ट्यूशन इसे पढ़ें

हम में से ज्यादातर लोगों का मानना है कि बच्चे को ट्यूशन दिलाया जाना इसलिए जरूरी है क्योंकि बच्चा स्कूली शिक्षा के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहा है, लेकिन असल में यह एक आम गलतफहमी है। बच्चे को ट्यूशन दिलाया जाना न केवल उसके पढ़ाई-लिखाई के नतीजों को बेहतर बनाता है बल्कि किसी विषय की पूरी और व्यवहारिक समझ भी देता है, जो आमतौर पर स्कूली शिक्षा के जरिए मुमकिन नहीं होता लेकिन इसके अलावा और भी वजहें हैं जिनकी वजह से बच्चे को ट्यूशन दिलाया जाना जरूरी हो जाता है।

हालांकि यह लेख बच्चों को ट्यूशन दिलाए जाने की पैरवी नहीं करता पर इस बारे में कोई फैसला करने से पहले आपको नीचे दी गई बातों पर गौर करना चाहिए -

 

1. माता-पिता का बच्चे को पढ़ाने के लिए समय दे पाना

यह एक जानी-मानी बात है कि माता-पिता जितना ज्यादा अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में दिलचस्पी लेते हैं, बच्चों का प्रर्दशन और स्कूली नतीजे उतने ही अच्छे होते हैं। पर आजकल के भाग-दौड़ भरे जीवन, माता-पिता के कामकाजी होने और एकल परिवार जैसी वजहों से ज्यादातर पैरेंट्स न तो बच्चों की अच्छी परवरिश पर ध्यान दे पाते हैं और न ही उनकी पढ़ाई-लिखाई पर। ऐसी स्थिति में बच्चे को ट्यूशन दिलाया जाना बेहतर होता है।

 

2. होमवर्क पूरा करने में लापरवाही या कठिनाई

रोजाना होमवर्क में बच्चे को स्कूल में पढ़ाई गई चीजें शामिल होती हैं और यह बच्चे को उन चीजों को दोहराने और उनका अभ्यास करने का सबसे बेहतर जरिया होता है। इसके अलावा यह बच्चे को किसी विषय को स्कूल के तय समय से ज्यादा देर तक पढ़ने और जानकारी हासिल करने का मौका भी देता है पर देखने में आता है कि बहुत से बच्चे होमवर्क पूरा करने को लेकर संजीदा नहीं होते और और पूरा समय खेलने-कूदने या दूसरे कामों को करने में बर्बाद कर देते हैं। ट्यूशन के जरिए बच्चे को होमवर्क पूरा करने की आदत में सुधार लाया जा सकता है।

 

3. बच्चे का किसी खास विषय में कमजोर होना

अक्सर देखने में आता है कि बच्चे किसी खास विषय में बहुत कमजोर होते हैं। स्कूल में पर्याप्त ध्यान दिए जाने के बावजूद यदि उस विषय में बच्चे के प्रर्दशन में सुधार न हो तो इसका मतलब है कि बच्चे को अतिरिक्त सहायता की जरूरत है। ऐसे में बच्चे को उस विषय के किसी विशेषज्ञ शिक्षक के जरिए ट्यूशन दिलाया जाना चाहिए जिससे बच्चे की कठिनाईयों को दूर करके बच्चे को उस विषय में निपुण बनाया जा सके।

 

4. स्कूल/कॉलेज में बेहतर टीचर्स की कमी

बच्चे की अच्छी पढ़ाई-लिखाई में एक कुशल और अच्छे शिक्षक का अहम किरदार होता है। स्कूलों में अच्छे टीचर्स को लेकर की गई जांचों में पाया गया है कि शुरुआती शिक्षा के समय अयोग्य और अकुशल शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जाना बच्चे को उसकी वास्तविक काबिलियत को हासिल करने और निखरने से रोक देता है। अगर आपको बच्चे के स्कूल में शिक्षा और शिक्षकों के स्तर को लेकर किसी तरह का संदेह हो तो इससे बचने के लिए बच्चे को ट्यूशन दिलाना जरूरी हो सकता है। 

 

पैरेंट्यून से जुड़े माता-पिता को हमारी सलाह है कि जहां तक मुमकिन हो बच्चों को ट्यूशन दिलाने से बचें। बच्चों को घर पर खुद ही पढ़ाएं और होमवर्क पूरा करने में उनकी मदद करें लेकिन इसके बाद भी यदि बच्चे को ट्यूशन की जरूरत हो तो इन बातों का ध्यान रखें-

 

  • बच्चे को जिस ट्यूटर से पढ़वाना है, उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल करें।
  • ट्यूटर को लेकर बच्चे की पसंद भी जानें और उसकी जरूरतों के मुताबिक ही बेहतर ट्यूटर की तलाश करें। 
  • बच्चे से जानें कि वह अपने ट्यूटर से संतुष्ट है या नहीं। बच्चे को जो भी पढ़ाया जाता है वह उसे समझता है या नहीं।
  • बच्चे के ट्यूटर से कभी-कभी मिलते रहें ताकि बच्चे के व्यवहार एवं उसकी अन्य गतिविधियों के बारे में पता चले।
  • बच्चे को ट्यूटर से किसी तरह की समस्या होने पर इसे अनदेखा न करें। बच्चे की समस्या का पता लगाएं और फिर फैसला लें कि बच्चे को उस ट्यूटर के पास भेजना है या नहीं।
  • पूरी तरह से बच्चे के ट्यूटर के भरोसे ही न रहें। खुद भी बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दें।

 

 

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