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कुछ असरदार मंत्र प्रेग्नेंसी के दौरान मन को शांत रखने के लिए

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संशोधित किया गया Mar 01, 2020

कुछ असरदार मंत्र प्रेग्नेंसी के दौरान मन को शांत रखने के लिए
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

प्रेगनेंसी अर्थात गर्भावस्था के दौरान तनाव होना एक आम समस्या है और इसके कई कारण हो सकते हैं जैसे, स्वास्थ्य, कही-सुनी बातें का डर व बच्चे की सेहत की चिंता आदि। इन सारी परेशानियों से बचने के लिए गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान कुछ एहतियात बरतने की जरूरत होती है। मां बनना किसी भी महिला के लिए एक सुखद अनुभव है, लेकिन साथ ही सबसे बड़ी चुनौती भी है। ऐसी नाजुक स्थिति में खुद की सेहत को ज़रा भी नजरअंदाज न करें। जरूरी है कि स्वस्थ रहने के लिए अपने खान-पान व सेहत के साथ अपने मन को शांत रखें। तो चलिये जानते हैं गर्भावस्था के दौरान खुद को शांत रखने के तरीके

सकारात्मक रहें

सकारात्मकता का भाव व आचरण मन को सकारात्मक विचारों से भरता है। इस तरह आप डर व भय से भी अछूती रह पाती हैं। आपका मन शांत रहा है और आप खुश रहती हैं। और फिर यह खुशी आपको सेहतमंद बनाती है। आपके मन की ये सुखद भावनाएं बच्चे के पूर्ण विकास में भी एक सकारात्मक छाप छोड़ती हैं। गर्भावस्था में सभी गर्भवती महिलाओं को खुश रहने की सलाह दी जाती है और ये खुशी हमें अपने रिश्तेदारों व दोस्तों के साथ समय बिताने पर अधिक मिलती है। उनके साथ बिताए गए खुशनुमा पल जीवन में रस भर देते हैं। परिवार से मिला समर्थन और प्यार भीतर बसे डर से लड़ने की शक्ति देता है और जीवन में सकारात्मकता प्रवेश करती है। इस दौरान खुश रहने का एक पहलू यह भी है कि आर इस दौरान के अपने अनुभवों को हमेशा सहेज कर रख सकती हैं। आपका ये आशावादी रवैया किसी और के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है। इसके लिये आप डायरी बना सकती हैं, ब्लॉग बना सकती हैं या फिर तस्वीरें खिंचवा कर रख सकती हैं। इन सभी उपायों को अपनाकर आप गर्भावस्&था के चुनौतीपूर्ण समय में खुश और सकारात्मक रह सकती हैं।

पौष्टिक खायें और कसरत करें

गर्भावस्&&था के दौरान आपके मन को शांत रखने में आपका आहार बेहद अहम भूमिका निभाता है। क्योंकि गर्भावस्था में भी जिंदगी अपनी पुरानी गति से ही चल रही होती है। खासतौर पर यदि आप एक कामकाजी महिला हैं तो अपने काम व पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच में खुद के लिए कुछ समय जरूर निकालें। सही समय पर खाना खाएं व नियमित व्यायाम करें। इन दोनों चीजों का सही संतुलन गर्भावस्था के दौरान आपको स्वस्थ बनाए रखता है। क्योंकि जब आप स्वस्थ& रहेंगी तो अधिक सक्रिय और सकारात्मक भी रहेंगी। ओमेगा-3 से भरपूर फैटी एसिड भी अवसाद से लड़ने में मदद करते हैं, साथ ही ये गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क के विकास के लिए भी जरुरी होते हैं। वहीं बादाम, काजू व अन्य मावे मूड को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। साथ ही पूरी नींद भी लें और इन दिनों में सोने से पहले कभी भी भारी भोजन न करें। इससे भोजन को पचाने में शरीर को अधिक ऊर्जा लगानी पड़ेगी और नींद में भी खलल पैदा होगा। दिन भर में थोड़ा-थोड़ा कर पानी पीती रहें। आप इस दौरान हल्के व्यायाम, जैसे पैदल चलना, तैराकी व योग आदि का सहारा ले सकती हैं। ध्यान मन के भीतर की हलचल को शांत करने का एक अच्छा तरीका है। ध्यान, लौकिक शक्तियों से जोड़ता है व आत्मविश्वास को बढ़ाता है। तो हर रोज कम से कम 15 मिनट के लिए ध्यान लगाएं। साथ ही योग भी करें, ये हार्मोन संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। योग मन को शांत व स्थिर रहने में भी मदद करता है। लेकिन गर्भावस्था के दौरान योग का अभ्यास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह जरुर लें। आपको सही अनुपात में उचित व्यायाम करना चाहिए।

भरपूर नींद लें

गर्भावस्&था के दौरान महिलाओं के शरीर की प्रक्रिया अलग हो जाती है, जिसके कारण संभव है रात के समय नींद न आए। इस दौरान महिलाओं को बहुत सारी शारीरिक और मानसिक परेशानियों से गुजरना पड़ता है। हालांकि इन परेशनियों के चलते गर्भवती को भरपूर आराम की जरूरत होती है। लेकिन गर्भावस्था में नींद न आने की समस्या आम देखी जाती है। इस वजह से डिप्रेशन और बेचैनी दोनों ही बढ़ने लगती हैं। ऊपर दिए गए सभी बिन्दुओं का यदि सही से पालन किया जाए तो सही नींद आने में ज्यादा मदद मिल सकती है। अर्थात मन में हमेशा सकारात्मक व खुशी लाने वाले विचार रखें व परिवार तथा दोस्तों के साथ अच्छा समय बिताएँ। सही खान- पान और उचित हल्के व्यायाम आपको स्वस्थ रखेंगे। इससे आपका मन शांत रहेगा और सही नींद आएगी।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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