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स्वास्थ्य

क्या आपके बच्चे भी बन रहे हैं टेक्नोलॉजी के एडिक्ट? इन टिप्स से रोकें उन्हें

Parentune Support
3 से 7 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Feb 17, 2020

क्या आपके बच्चे भी बन रहे हैं टेक्नोलॉजी के एडिक्ट इन टिप्स से रोकें उन्हें
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

आजकल छोटे-छोटे बच्चों के हाथ में मोबाइल दिखना बड़ी आम बात हो गयी है. कुछ बच्चे तो इसके इतने आदि हो जाते हैं कि मोबाइल न मिलने पर रोने लगते हैं और तब तक शांत नहीं होते, जब तक उन्हें मोबाईल न दे दिया जाये. मोबाइल आपके लिए तो अच्छा है, लेकिन आपके बच्चे के हाथ में इतनी छोटी उम्र में मोबाईल आ जाना ठीक नहीं है.
 

ये एक ऐसी समस्या है जिससे आजकल लगभग हर माता-पिता को दो-चार होना पड़ता है. वो दिन गए जब बच्चे बाहर निकल कर खेलना पसंद किया जरते थे, आज बच्चे घरों में वीडियो गेम खेलते ज़्यादा नज़र आते हैं.
 

आज हम आपको बता रहे हैं कि आप कैसे अपने बच्चे के टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने की सीमा तय कर सकते हैं और उसे इसकी लत लगने से बचा सकते हैं.
 

ध्यान रखें कि वो टीवी पर वो क्या देखते हैं

अगर बच्चा टीवी देखता है तो आपको नज़र रखनी चाहिए कि वो टीवी पर अच्छी क्वालिटी के शो देखे, जिनसे उसे कुछ सीखने को मिले. रिमोट उसे देने के बाद भी आपको नज़र रखनी चाहिए कि वो ऐसा कुछ न देखें, जो उनके लिए सही नहीं है.
 

तय करें समय

अगर आप अपने बच्चे को रोकेंगे नहीं, तो शायद वो दिनभर टीवी के सामने बैठा कार्टून देखता रहेगा. टीवी की लत लगने के बाद उसका अन्य कामों में मन लगना बंद हो जायेगा. इसलिए टीवी देखने का समय तय कर दें और उसके बाद उन्हें टीवी बंद कर देने के लिए कहें.
 

कहानी सुनाएं

मोबाईल टीवी में कितने ही गेम आ जायें, लेकिन आज भी बच्चों को अपने माता-पिता से कहानी सुनना बेहद पसंद होता है. उन्हें कहानियां सुनाएं, जिससे उनका ध्यान बंटा रहे और वो टेक्नोलॉजी से थोड़ी दूरी बनाएं.
 

गैजेट्स गिफ्ट न करें

बच्चों को तोहफ़े में प्ले स्टेशन, वीडियो गेम आदि न देकर किताबें या ऐसे गेम्स देने चाहियें, जिन्हें वो अपने दोस्तों के साथ खेल सकते हैं. उन्हें बाहर निकल कर खेलने के लिए प्रेरित करें.
 

उनके साथ ज़्यादा समय बिताएं

आजकल माता-पिता अपनी बिज़ी दिनचर्या में बच्चों के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं. इस कारण भी बच्चे मोबाईल आदि में ज़्यादा लगे रहने लगते हैं. उन्हें बाहर घुमाने लेकर जायें, हफ़्ते में एक पूरा दिन उनके साथ ज़रूर बिताएं.
 

उन्हें बताएं क्या हैं नुकसान

उन्हें फ़ोन में लगे रहने के नुकसान और बाहर जाकर खेलने के फ़ायदों से अवगत कराएं, उन्हें हानिकारक रेडिएशन से होने वाली परेशानियों के बारे में बताएं.
 

इंटरनेट से रखें दूर:

आपको बच्चों को समझाना चाहिए कि इंटरनेट और सोशल मीडिया असली दुनिया से बेहद अलग है. उन्हें असल दुनिया में ज़्यादा समय बिताना चाहिए. उनके किशोरावस्था में पहुँचने से पहले आपको उन्हें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने से रोकना चाहिए.

जो वो असल ज़िन्दगी में खेल-कूद कर सीख सकते हैं, वो उन्हें वीडियो गेम और मोबाईल नहीं सिखा सकते. इसलिए ये आपकी ज़िम्मेदारी बनती है कि आप उनके लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की सीमा तय करें.
 

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

  • 1
कमैंट्स ()
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| Sep 01, 2018

Hlw

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Sadhna Jaiswal

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