स्वास्थ्य और कल्याण

क्या है लेजी आईज सिंड्रोम और कैसे करता है ये बच्चो पर असर? और जाने

Prasoon Pankaj
1 से 3 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jul 15, 2018

क्या है लेजी आईज सिंड्रोम और कैसे करता है ये बच्चो पर असर और जाने

एम्ब्लियोपिया (Amblyopia), जिसे सामान्य रूप से लेजी आईज(आलसी आँख)कहा जाता है, बच्चों में पाई जाने वाली ऐसी स्थिति है जब एक आँख में द्रिष्टि उचित प्रकार से विकसित नहीं हुई होती। द्रिष्टि में कमी तब होती है, जब एक या दोनों आँखें दिमाग को धुंधली छवि भेजती हैं। इस प्रकार दिमाग उस आँख के साथ धुंधला देखना सीखता है, भले ही चश्मा लगा हो। लेजी आईज केवल बच्चों को हो सकता है। यदि इसका उपचार ना हो, तो दृष्टि की हानि मंद से लेकर गंभीर तक हो सकती है।सामान्यतया, लेजी आईज सिंड्रोम द्वारा केवल एक आँख ही प्रभावित होती है, लेकिन दोनों आँखों का “आलसी” होना भी संभव है।

बच्चो पर इसका असर--"लेज़ी आई," बच्चों में आँखें से ना दिखने का सबसे सामान्य कारण है। यह तब होता है जब एक आँख दिमाग के साथ उचित तरीके से काम करना बंद कर देती है। आँख सामान्य लग सकती है, लेकिन दिमाग दूसरी आँख के साथ काम करता है। कुछ मामलों में, यह दोनों आँखें प्रभावित कर सकता है। इसके कारणों में शामिल है|

  • बहंगापन - एक विकार जिसमें दोनों आँखें एक ही दिशा में नहीं देख पाती हैं
  • नजर कमज़ोर होना - जब आकार में समस्या की वजह से, एक आँख फोकस नहीं कर पाती है, साथ ही दूसरी भी नहीं कर पाती है। इसमें दूर या पास की नजर कमज़ोर, और बिरकुल ना दिखना शामिल है।
  • मोतियाबिंद - आँख के लेंस में धुंधलापन आ जाना और धिरे- धिरे दिखायी देना कम हो जाना।
     

कैसे पता करे कि बच्चे को लेज़ी आई कि शिकायत है--दृष्टि का घटना, आँख का बाहर या भीतर घूमन,आँखो का एक साथ कार्य करते हुए प्रतीत ना होना, गहराई का कमजोर अंदाज (वस्तुओं के बीच अंतर पहचानने में कठिनाई), गिरती पलकें,पलकों की गाँठ जो आँख की पुतली को अवरुद्ध कर रही हों ये सारे लक्षण के है |
 

लेजी आईज सिंड्रोम का उपचार --इससे बचने के लिए, इसके कारणों को पहचाना जाना चाहिए और जितना जल्दी हो उतना जल्दी उनका उपचार, बचपन के दौरान ही, करना चाहिए।इसका का निदान कठिन हो सकता है। आमतौर पर, सामान्य दृष्टि परीक्षण के दौरान इसका पता चलता है।एम्ब्लियोपिया का उपचार बच्चे को कम दृष्टि वाली आँख का प्रयोग करने के लिए मजबूर करता है। ऐसा करने के दो तरीके हैं। एक तरीका है जिसमें बच्चे को कई सप्ताह या महीनों तक अपनी सही आँख पर हर दिन कुछ घंटों के लिए पट्टी बांधनी पड़ती है। दूसरा तरीका है आई ड्रॉप का प्रयोग करना जो अस्थायी रूप से दृष्टि धूमिल कर देता है। हर दिन, बच्चे की सही आँख में एट्रोपिन नामक दवा डाली जाती है। कभी-कभी मूलभूत कारणों का उपचार भी जरुरी होता है। इसमें चश्मे या सर्जरी शामिल हो सकते हैं। आलसी आँख से पीड़ित अधिकतर बच्चों में, उचित चिकित्सा कुछ सप्ताहों से लेकर कुछ माह में दृष्टि को बढ़ा देती है और उपचार जितनी जल्दी आरम्भ हो जाए, उतना ही अच्छा होता है।

 

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