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क्या है स्पीच थेरेपी और इससे होने वाले फायदे।

Anubhav Srivastava
0 to 1 years

Created by Anubhav Srivastava
Updated on May 25, 2018

क्या है स्पीच थेरेपी और इससे होने वाले फायदे।

जब एक शिशु बोलना शुरू करता है या बोलना सीखता है, तो इस प्रक्रिया में कई पड़ाव आते हैं। अपनी  उम्र के हिसाब से सभी शिशु धीरे-धीरे अक्षर, शब्द और वाक्य बोलना सीखते हैं। उम्र बढ़ने के साथ ही उनका भाषा ज्ञान भी बढ़ता है और उनकी बोलचाल साफ और शुद्ध होने लगती है जो कि एक साधारण प्रक्रिया है।

लेकिन कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जिनका उम्र बढ़ने के साथ भाषाई विकास और अक्षर/शब्द ज्ञान तो बढ़ता है पर उन्हे कुछ खास अक्षरों को बोलने में कठिनाई होती है और वे उन अक्षरों से बने शब्दों का उच्चारण ठीक नहीं से नहीं कर पाते।

 

ऐसे में जब बच्चा ठीक से नहीं बोल पाता तो माता-पिता को लगता है कि उम्र बढ़ने के साथ बच्चे की यह समस्या दूर हो जाएगी पर स्पीच डिसॉर्डर की वजह से हमेशा ऐसा नहीं होता। अगर इसका  इलाज न किया जाए तो कई केस में यह परेशानी उम्र बढ़ने के बाद भी बनी रहती है।

 

आमतौर पर स्पीच डिसॉर्डर या भाषाई विकार में जो खास लक्षण दिखाई देते हैं, वो हैं-

 

  • हकलाना
  • तुतलाना और शब्दों को साफ न बोल पाना,
  • कम सुनाई देने की वहज से भाषाई समस्याएं होना,
  • दूसरे की बात को समझने के बावजूद बोल कर ठीक से प्रतिक्रिया दे पाने में अक्षम होना
  • अन्य कारण जैसे किसी बीमारी/संक्रमण के चलते आवाज का भारी होना, गला हमेशा बैठा रहना, आवाज की नली का कैंसर या उसका चोटिल/खराब होना आदि।

 

यदि किसी बच्चे में एक तय उम्र के बाद भी यह लक्षण दिखाई दे तो ऐसे बच्चे को स्पीच थेरेपी की जरूरत हो सकती है। स्पीच थेरेपी साधारण बोल-चाल में होने वाली कठिनाई का इलाज करने का एक कारगर तरीका है और इसके जरिए भाषाई विकार में सुधार लाया जा सकता है।

 

स्पीच थेरेपी के फायदे

स्पीच डिसॉर्डर या भाषाई विकार लोगों में निराशा या मायूसी की वजह बन सकता है, वे अकेलेपन के शिकार हो सकते हैं। यह उनके सामाजिक जीवन और पढ़ने-लिखने की काबिलियत पर भी बुरा असर कर सकता है इसलिए जरूरी है कि भाषाई विकार से ग्रस्त लोगों को सहयोग और उनकी मदद की जाए।

 

आइए जाने स्पीच थेरेपी से होने वाले फायदों के बारे में-

  • स्पीच थेरेपी ठीक से बोलचाल करने के काबिल बनाती है और ज्यादा साफ और शुद्ध रूप से बोलने में मदद करती है।
  • स्पीच थेरेपी भाषा की जानकारी को बढ़ाने में भी मददगार होती है जो पढ़ने-लिखने की काबिलियत बढ़ाने कारगर है जिससे चीजों के बारे में सोचना-समझना आसान हो जाता है।
  • स्पीच थेरेपी के जरिए बातचीत या प्रतिक्रिया देने के दूसरे तरीकों के बारे में जानकारी मिलती है।
  • स्पीच थेरेपी से सुनने की क्षमता बढ़ती है जिससे अक्षरों को समझना, उनको बोलने में फर्क करना आसान हो जाता है।
  • जरूरत होने पर यदि शुरुआत से ही बच्चों को स्पीच थेरेपी दी जाए तो यह उनके भाषाई कौशल को काफी बेहतर कर सकती है। 

 

स्पीच थेरेपी की मदद लेते समय इन बातों पर गौर किया जाना भी जरूरी है-

  • स्पीच थेरेपी, भाषाई विकार के इलाज का बेहतर तरीका है लेकिन इसका फायदे मिलने में समय लग सकता है।
  • यदि स्पीच थेरेपिस्ट या विशेषज्ञ को बच्चों के साथ काम करने का तर्जुबा हो तो छोटे बच्चों को इस थेरेपी से बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।
  • माता-पिता के सहयोग करने, बच्चे को घर पर बोलने का अभ्यास कराना स्पीच थेरेपी से जल्द फायदा दिलाने में मददगार हो सकता है।

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