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जानें कैसे आपका बच्चा बनता है लेफ्टी या राइट हैंडेड

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3 to 7 years

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जानें कैसे आपका बच्चा बनता है लेफ्टी या राइट हैंडेड

माना कि दुनिया में बच्चे के आगमन के बाद ही बच्चों की हरकत के जरिए पैरेंट इस बात का अंदाज़ा लगाते हैं कि उनका बच्चा लेफ्टी है या राइट हैंडेड। लेकिन अगर हम आपको कहें कि इस बात का फैसला मां के गर्भ के अंदर ही हो जाता है तो, चौकिए नहीं क्योंकि यही एक सच है। बच्चा दाएं या बाएं हाथ से कार्य करेगा, यह मां की कोख में कैसे तय होता है, आइए जानते हैं।

 

ये माना कि हमारा शरीर दिमाग से मिलने वाले सिग्नल्स को फॉलो करता है लेकिन बच्चा लेफ्टी होगा या राइट हैंडेड, इस बात का फैसला स्पाइनल कॉर्ड यानि रीढ़ की हड्डी तय करती है। मां के गर्भ धारण करने के लगभग 8 से 12 हफ्ते के में ये पता चल जाता है कि आपका बच्चा किस हाथ का ज़्यादा इस्तेमाल करेगा और स्कूल में पेंसिल किस हाथ से पकड़ेगा।

 

हमारे हाथ और बांह की हरकत हमारे दिमाग की वजह से होती है जो बदले में रीढ़ की हड्डी को हरकत करने के लिए सिग्नल भेजता है। लेकिन दिमाग का जो हिस्सा हमारी हरकत के लिए ज़िम्मेदार है वो शुरुआत से ही रीढ़ की हड्डी से नहीं जुड़ा होता है। बच्चे का किस हाथ का अधिक इस्तेमाल करना उसी वक़्त समझ आ जाता है, जब बच्चा गर्भ में अपने 13 हफ़्तों में अंगूठा चूसना शुरू करता है।

 

वैसे इन सबके अलावा कई बार बच्चा जीन्स के कारण भी लेफ्टी होता है। यानि परिवार में यदि माता-पिता में कोई बाएं हाथ का इस्तेमाल करता है तो भी बच्चा लेफ्टी हो सकता है।

 

यानि कुल मिलाकर आपका बच्चा पैदाइश ही लेफ्टी या राइट हैंडेड होता है। लेकिन आप चाहें तो बचपन से ही उसे दाहिने हाथ से काम करने पर ज़ोर डाल सकते हैं।

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