Education and Learning

लेटर राइटिंग से होते हैं बच्चों में अनेकों विकास

Parentune Support
3 to 7 years

Created by Parentune Support
Updated on Jan 07, 2018

लेटर राइटिंग से होते हैं बच्चों में अनेकों विकास

लेटर का महत्व आज भी बहुत है। यह न सिर्फ ऑफिसों में आपके कई काम करता है, बल्कि इससे आपके बच्चे में भी कई विकास होते हैं। यही वजह है कि समय समय पर कई जगह पत्र लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन होता रहता है।  यहां हम बात करेंगे आखिर कैसे लेटर आपके बच्चों के लिए बेहतर है और कैसे इससे उनमें सृजनात्मकता आती है। स्मार्टफोन के इस युग में लेटर (पत्र) यानी चिट्ठी खोकर रह गई है। यह महज ऑफिसों व सरकारी कामों तक ही सीमित रह गई है। नई पीढ़ी भी इससे कटती जा रही है, इसलिए आजकल के अधिकतर बच्चे लेटर नहीं लिख पाते। रोजाना नई-नई टेक्नॉलजी से बच्चों को स्मार्ट पढ़ाई देने का दावा करने वाले स्कूल भी लेटर के युग से काफी दूर चले गए हैं। पर लेटर का महत्व आज भी बहुत है। 

 

होते हैं ये विकास

  1. बच्चों में अपने विचारों को अपने परिवेश के साथ जोड़कर पेश करने की शानदार क्षमता होती है। वह हर घटना व विचार पर अपना मत प्रकट करना चाहते हैं। इन विचारों को सृजनात्मकता के साथ कहने का मौका लेटर राइटिंग से ही मिलता है। अतः लेटर राइटिंग बच्चे को क्रिएटिव बनाता है।
     
  2. लेटर अलग-अलग विषय पर लिखा जाता है। इसमें सीमित व आसान शब्दों में बात कहनी होती है, ताकि आपका मेसेज सामने वाले तक आसानी से पहुंच जाए। ऐसे में बच्चा जब लेटर राइटिंग करता है, तो वह आसान शब्दों का इस्तेमाल व अपनी बात को कम शब्दों में बताना सीख जाता है।
     
  3. पत्र दिल के अलग-अलग भावनाओं को खोलता है। मनुष्य की भावनाओं की स्वाभाविक अभिव्यक्ति पत्रचार से भी होती है। ऐसे में बच्चा लेटर राइटिंग सीखने के साथ ही निश्चल भावों और विचारों का आदान-प्रदान भी सीख लेता है।
     
  4. लेटर के जरिये दो दिलों के संबंध मजबूत होते हैं। पति-पत्नी, भाई-बहन, पिता-पुत्र, मां-बेटा व इस तरह के अन्य कई संबंधों को पत्र मजबूत करता है। पत्र वह सेतु है, जिससे मानवीय संबंधों की परस्परता सिद्ध होती है। ऐसे में बच्चा लेटर राइटिंग से इसमें भी महारथ हासिल कर लेता है।
     
  5. आज के समय में लेटर राइटिंग यानी पत्र लेखन को एक कला की संज्ञा मिल चुकी है। लेटर में आजकल कलात्मक अभिव्यक्ती हो रही है। साहित्य में भी इसका इस्तेमाल होने लगा है। इससे पत्र लिखने वाले में और स्वाभाविकता और कलात्मकता आती है।
     
  6. इसके अलावा पत्र लिखने के दौरान लिखने वाले की सिर्फ भावनाएं ही नहीं बल्कि उसका व्यक्तित्व भी निखरता है। इससे लिखने वाले का चरित्र, दृष्टिकोण, संस्कार व मानसिक स्थिति भी बेहतर होती है। 

  • Comment
Comments()
Kindly Login or Register to post a comment.
+ START A BLOG
Top Education and Learning Blogs
Loading
Heading

Some custom error

Heading

Some custom error