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महाशिवरात्री का महत्व आपके व आपके परिवार के लिए

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संशोधित किया गया Feb 15, 2018

महाशिवरात्री का महत्व आपके व आपके परिवार के लिए

हिंदू कैलेंडर के अनुसार महाशिवरात्री फाल्गुन के महीने में मनाया जाता है। यह हिंदुओं के लिए आध्यात्मिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। अलग-अलग लोगों के लिए इसका अलग महत्व है। गृहस्थ जीवन बिताने वाले महाशिवरात्री को शिव की विवाह वर्षगांठ के रूप में मनाते हैं। सांसारिक महत्वकांक्षाएं रखने वाले इस दिन को शिव की अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के रूप में देखते हैं। वहीं योगी और संन्यासी इसे तप के दिन के रूप में देखते हैं। पर शिवरात्री व भगवान शिव का इन सबसे अलग कई और भी महत्व है। भगवान शिव निश्चित रूप से कई मायनों में प्रेरणादायक हैं। महाशिवरात्री के इस खास मौके पर आज हम आपको बताएंगे कि आखिर कैसे आप व आपका बच्चा भगवान शिव के कुछ गुणों पर अमल करके कामयाब व अच्छे इंसान बन सकते हैं।
 

भगवान शिव से सीखें ये गुण
 

  1. मन व इंद्रियों पर संयम – आप भगवान शिव के इस गुण को भी बच्चे को सिखा सकते हैं। दरअसल भगवान शिव का मन व इंद्रियों पर पूरी तरह से संयम था। वह सादा जीवन जीते थे। हर आदमी के लिए जरूरी है कि वह अपने मन व इंद्रियों पर संयम रखे। अगर आपका बच्चा इस गुण को सीखेगा तो काफी फायदा होगा।
     
  2. सच बोलना – भगवान शिव का ये गुण भी हमें बहुत कुछ सिखाता है। शिव सच बोलते थे, अपनी बात से वह कभी नहीं पलटते थे। इसका गलत फायदा कई बार राक्षसों ने उठाया। पर इसके बाद भी शिव ने सच बोलना नहीं छोड़ा।
     
  3. शक्तिशाली दृष्टिकोण – भगवान शंकर की तीसरी आंख हमें सिखाती है कि जिंदगी में किसी भी समस्या से घबराना नहीं चाहिए। घबराने की जगह ये समझना चाहिए कि आखिर ये दिक्कत सही मायनों में है क्या और इस पर कैसे काबू किया जा सकता है।
     
  4. दया करना व क्षमाशील रहना – भगवान शिव हमें सिखाते हैं कि आदमी को दूसरों पर दया करनी चाहिए। इसके साथ ही उसे क्षमाशील भी रहना चाहिए। शिव हमेशा सब पर दया करते थे। इसके अलावा वह बड़ी से बड़ी गलती करने वाले को भी बहुत जल्द क्षमा करते हैं। दक्ष प्रजापति ने भरी सभा में शिव को गालियां देकर नीचा दिखाया, लेकिन इसके बावजूद जब उसे गलती का अहसास हुआ और उसने भगवान शिव से क्षमा मांगी तो उन्होंने उसे फौरन माफ कर दिया।
     
  5. भौतिकवादी सुखों से दूर रहना – भगवान शिव को भौतिकवादी सुख व धन का जरा सा भी लोभ नहीं था। वह न तो आभूषण पहनते थे और न ही महंगे वस्त्र धारण करते थे। वह शांत मन से अध्यात्म में लगे रहते थे। उनका ये गुण बताता है कि अगर हमारे पास धन न हो तो परेशान नहीं होना चाहिए। भौतिकवादी सुख ही सबकुछ नहीं है। इनके बिना भी खुश रहा जा सकता है।
     
  6. महिलाओं का सम्मान – भगवान शिव पराई स्त्रियों को सम्मान की दृष्टि से देखते थे। पराई स्त्रियों को वासना की नजर से देखना पाप है। भगवान शिव हमें ये भी सिखाते हैं। वह महिलाओं का सम्मान करते थे। वह अपनी पत्नी पार्वती को अपने बराबर समझते थे।
     
  7. किसी की निंदा या चुगली न करना – भगवान शंकर का ये गुण भी हमारी जिंदगी के लिए काफी कारगर है। दरअसल शिव कभी भी किसी की चुगली या निंदा नहीं करते थे। वह अपने ध्यान में लगे रहते थे। ऐसे में बच्चों को बताएं कि वह भी किसी की निंदा या चुगली न करें।
     
  8. धैर्य व शांति – भगवान शिव एक योगी हैं। उनका शरीर पर गजब का नियंत्रण है। वह कई घंटों तक ध्यान में बैठे रहते हैं और साधना करते हैं। यह धैर्य की वजह से ही संभव है। अगर बच्चे भी इस तरह का धैर्य अपनी जिंदगी में ले आएं तो यह उनके करियर के लिए काफी फायदेमंद होगा। इसके अलावा भगवान शंकर की ध्यान की मुद्रा शांति का ज्ञान देती है और हर तरह की समस्या से लड़ना सिखाती है।  वह बताते हैं कि कैसे ध्यान लगाकर मन को शांत किया जा सकता है।

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