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स्वास्थ्य

मदर्स डे 2021:- मां की करुणा से हारेगा कोरोना

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 05, 2021

 मदर्स डे 2021 मां की करुणा से हारेगा कोरोना
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

मां एक ऐसा संबंध जिसमें उनके बच्चे की संपूर्ण दुनिया समाहित होती है। प्रेम, स्नेह, करुणा का अनोखा मिश्रण है मां। अपने बच्चे को किसी परेशानी में देखकर मां का मन व्याकुल हो उठता है। हम सभी इस समय में शायद सबसे कठिनतम दौर को देख रहे हैं, कोरोना महामारी ने हमारी दिनचर्या से लेकर सबकुछ बदल कर रख दिया है। कुछ ऐसी महिलाएं भी हैं जिन्होंने इस कोरोनाकाल में अपनी जिम्मेदारियों का भरपूर निर्वहन किया है। उनके इन प्रयासों की बदौलत कई लोगों की जान बची और अनगिनत लोगों को विपदा की इस घड़ी में संबल और शक्ति मिली। आज हम आपको एक ऐसी ही महिला के बारे में बताने जा रहे हैं। आंध्रप्रदेश के ग्रेटर विशापट्टनम म्यूनिसिपल कमिश्नर के पद पर तैनात IAS अधिकारी सृजना गुम्माला (Srijana Gummalla) की एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें वो अपने दुधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर पिछले साल कोरोनाकाल में अपनी ड्यूटी करते हुए दफ्तर में काम कर रही थीं। 

कोरोनाकाल में सृजना गुम्माला के काम की सबने की खूब तारीफ

कोरोना महामारी के दौरान सृजना गुम्माला ने ईमानदारी व पूर्ण निष्ठा के संग अपना कर्तव्य निर्वहन किया। आपको बताना चाहूंगा कि प्रेग्नेंसी के दौरान सृजना गुम्माला अपनी ड्यूटी करती रहीं। गर्भावस्था के आखिरी महीनों में वे शिशु को जन्म देने के लिए अस्पताल पहुंची। बच्चे को जन्म देने के बाद भी उन्होंने लंबे समय तक आराम नहीं किया और अपनी मैटर्निटी लीव को छोड़कर इन्होंने वापस अपनी ड्यूटी ज्वाइन की। दरअसल उस समय में ही केंद्र सरकार की तरफ से देशभर में लॉकडाउन को लागू किया गया था।

  • कोरोनाकाल में अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को समझते हुए सृजना गुम्माला ने बच्चे को जन्म देने के महज 22 दिनों बाद ही अपनी मेटरनिटी लीव को छोड़ कर ऑफिस ज्वाइन कर लिया।

  • लॉकडाउन को अपने जिले में मुमकिन बनाने के लिए उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी

  • लॉकडाउन के दौरान अक्सर उनको अपने ऑफिस में 12-12 घंटे तक काम करना पड़ जाता था 

  • बच्चे को इतनी देर तक घर पर छोड़कर आ नहीं सकती थी इसलिए वो अपने नवजात शिशु के साथ ही अक्सर ऑफिस आ जाया करती थी

  • काम की व्यस्तताओं के बीच में वे अपने शिशु का भी भरपूर ख्याल रखती थीं और उसकी हर जरूरतों को समय पर पूरा करती थी

  • सृजना गुम्माला के काम के जज्बे और इस सबके बीच अपने बच्चे की देखभाल करते देख तमाम बड़े अधिकारियों ने उनकी खूब प्रशंसा की

  • सृजना गुम्माला का कहना था कि इस विषम परिस्थितियों में सभी लोग एक दूसरे का हाथ बंटा रहे हैं, कुछ लोग जरूरतमंदों को खाना खिला रहे हैं, बहुत सारे लोग ओवरटाइम कर रहे हैं तो उनको भी ये महसूस हुआ की वे उनका ड्यूटी पर वापस लौटना बहुत आवश्यक है।

IAS अधिकारी सृजना गुम्माला के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें 

मूल रूप से हैदराबाद की रहने वाली सृजना गुम्माला ने ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने हैदरााबाद यूनिवर्सिटी में पीजी में दाखिला लिया। साल 2013 में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में देश भर में 44वां रैंक हासिल किया। अभी हाल ही में 3 मई को अपने ट्विटर आईडी के माध्यम से सृजना गुम्माला ने जानकारी दी है कि वे और उनका 14 महीने का बच्चा कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। फिलहाल ये दोनों होम आइसोलेशन में चल रहे हैं और उनका उपचार चल रहा है। हम आपके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।

 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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