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स्वास्थ्य

कोरोना वायरस: क्या गर्भ में ही मां से बच्चे को हो सकता है?

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 06, 2020

कोरोना वायरस क्या गर्भ में ही मां से बच्चे को हो सकता है
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

कोरोना वायरस को लेकर प्रतिदिन नए रिसर्च सामने आ रहे हैं। कोरोना वायरस का एक मां और बच्चे पर क्या असर हो सकता है? क्या गर्भावस्था के दौरान मां के कोख में पल रहा शिशु भी कोरोना वायरस के संक्रमण का शिकार हो सकता है? इस तरह के कई प्रश्न आपके मन में उठ रहे होंगे। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम देश और दुनियाभर में इस तरह के सवालों का जवाब खोजने में जुटे हुए हैं। आपने देखा होगा कि हाल के दिनों में शिशु को जन्म देने वाली मां कोरोना से संक्रमित है लेकिन बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ पैदा हुआ है। हालांकि कुछ ऐसे भी मामले भी देखने को मिले हैं जिसमें मां स्वस्थ है लेकिन शिशु के जन्म लेने के बाद संक्रमण हो गया है। हाल के दिनों में कुछ ऐसे भी मामले देखे को मिले हैं की मां कोरोना से इनफेक्टेड है और शिशु के जन्म के कुछ घंटों के अंदर ही वायरस से संक्रमित हो गए। इस ब्लॉग में हम आपको इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्स (ICMR) के नए रिसर्च के बारे में बताने जा रहे हैं। 

प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना वायरस को लेकर क्या कहता है ICMR का रिसर्च ?

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के द्वारा जारी किए गए नए अध्यय के मुताबिक मौजूदा प्रमाण ये बताते हैं कि गर्भ के अंदर ही मां से शिशु को कोरोना वायरस का संक्रमण हो सकता है लेकिन ये भी जरूरी नहीं कि हर मामले में ऐसा हो जाए लेकिन कुछ परिस्थितियों में ऐसा हो सकता है। 

सवाल-  मां से बच्चे में कैसे ट्रांसफर हो सकता है  वायरस ?

जवाब- मां से बच्चे में कोरोना वायरस अलग-अलग तरीके से भी ट्रांसफर हो सकता है, ये जरूरी नहीं कि गर्भ से शिशु को वायरस का संक्रमण हो। गायनोकॉलॉजिस्ट डॉ शालिनी अग्रवाल के मुताबिक चूंकि कोरोना वायरस एक नई बीमारी है इसलिए अभी रिसर्च किए जा रहे हैं। कुछ वायरस ऐसे होते हैं जो गर्भ के अंदर ही मां से बच्चे में चले जाते हैं। उदाहरण के तौर पर अगर मां को मलेरिया है तो बच्चे को भी मलेरिया हो सकता है। कुछ ऐसे भी वायरस होते हैं जो शिशु के जन्म के समय में भी प्रभावित कर सकते हैं।

सवाल-  गर्भवती महिलाओं को कोरोना से कितना ख़तरा हो सकता है ?

जवाब- ICMR के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान मां की इम्यूनिटी पावर कुछ कम हो जाती है और यही वजह है कि इस समय में मां को किसी प्रकार के वायरस से संक्रमित होने की संभावना कुछ ज्यादा बढ़ जाती है। ICMR के रिसर्च के मुताबिक कोरोना वायरस के दौरान समय से पूर्व डिलीवरी के भी केस बढ़ गए हैं लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ऐसा कोरोना के चलते हुए हैं। ICMR के मुताबिक अभी तक इस बात के प्रमाण नहीं मिले हैं कि कोरोना वायरस के चलते समय से पूर्व डिलीवरी या गर्भपात हो रहे हैं।

    सवाल-  प्रेग्नेंसी के दौरान कोरोना वायरस से  कैसे करें बचाव ?

जवाब- प्रेग्नेंसी के दौरान मां और बच्चे की कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए कुछ उपायों का पालन करना आवश्यक है। डॉक्टरों के मुताबिक ये बहुत जरूरी है कि अगर बच्चे को संक्रमण से बचाना है तो सबसे पहले मां को संक्रमण से बचा होगा और तमाम तरह की सावधानियां बरतें।

  • हाथों की सफाई का खास ख्याल रखें, मास्क पहनें और डिस्टेंसिंग को मेंटेन करें। किसी से हाथ ना मिलाएं।

  •  जिन्हें किसी भी प्रकार का संक्रमण हो या होने की संभावना हो उनसे दूरी बनाए रखें।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान इन सभी बातों का ज़्यादा सख्ती से ध्यान रखे जाने की ज़रूरत है.

  • अगर मां को प्रसव से पहले ही कोरोना वायरस है तो ज़रूरी नहीं की बच्चे में भी संक्रमण हो जाए। बाद में जांच के बाद ही इसका पता लगता है. इसलिए कुछ सावधानियां रखकर बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है

  •  शिशु को मां से कुछ समय के लिए दूर रखा जाता है  ताकि बच्चे को मां की सांसों या ड्रॉपलेट्स से किसी तरह का संक्रमण ना हो.

सवाल- क्या शिशु को मां का दूध पिलाया जा सकता है?

जवाब- मां के दूध पर कोरोना के असर को लेकर भी आईसीएमआर में अध्ययन किया गया है।. इसके मुताबिक मां के दूध में कोरोना वायरस नहीं पाया गया है तो ऐसे में बच्चे को मां का दूध पिलाया जा सकता है.

लेकिन इसके साथ ही अगर वायरस के ख़तरे के चलते बच्चे को अस्थायी तौर पर मां से अलग रखा जाता है और दूध पिलाया जाता है तो इस संबंध में कुछ निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।.

  • . जब तक जांच नहीं हो जाती नवजात को एक अलग कमरे में रखा जाए

  • मां अगर बेबी को दूध पिलाना चाहती है तो एक सैनिटाइज ब्रेस्ट पंप की मदद से दूध निकालकर बच्चे को पिलाया जाए.

  • अगर मां खुद बच्चे को दूध पिलाना चाहती है तो हर बार दूध पिलाने से पहले मां मास्क पहने और हाथ की सफाई करे.

गर्भवती महिलाओं में  संक्रमण से बचने के लिए सावधानियां

  1. प्रेग्नेंसी के 28 वें सप्ताह के बाद जोखिम और ज़्यादा होता है। इस समय में संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता है 

  2. हृदय रोग से पीड़ित महिलाओं को ज़्यादा ख़तरा है.

  3. चिंता और अवसाद से बचने के लिए परिवार के सभी सदस्यों को सहयोग करना चाहिए

  4.  इस बात के प्रमाण नहीं हैं कि कोरोना के कारण गर्भपात या गर्भ को किसी अन्य तरह का नुक़सान हो सकता है.

  5. अब तक इस बात के प्रमाण नहीं हैं कि बच्चे में कोरोना के कारण जन्म से ही कोई विकृति हो सकती है

  6. अभी तक इसके भी संकेत नहीं मिले हैं कि कोविड19 के कारण गर्भपात की ज़रूरत हो.

 हॉटस्पॉट्स वाले इलाक़ों में रह रहीं जिन गर्भवती महिलाओं का प्रसव होने वाला है उनका कोविड19 के लिए टेस्ट किया जाएगा, भले ही उनमें कोरोना वायरस के लक्षण नज़र ना आ रहे हों>

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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