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स्वास्थ्य

अब 3 सेकेंड में नाखून से हो जाएगी नवजात शिशु में पीलिया बीमारी की जांच, क्या है ये नई तकनीक?

Prasoon Pankaj
0 से 1 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 07, 2020

अब 3 सेकेंड में नाखून से हो जाएगी नवजात शिशु में पीलिया बीमारी की जांच क्या है ये नई तकनीक
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

नवजात शिशु को पीलिया की बीमारी है अथवा नहीं इसकी जांच अब शिशु को छुए बिना औऱ बगैर किसी ब्लड टेस्ट के भी मुमकिन है। आपको जानकर हैरानी होगी कि अब नवजात शिशु के पीलिया की जांच उनके नाखून पर प्रकाश की किरणें डालकर की जा सकती है। क्या है ये नई तकनीक और इसके क्या फायदे हैं इसके बारे में हम आपको इस ब्लॉग में विस्तार से बताने जा रहे हैं। 

क्या है पीलिया बीमारी?/ What is jaundice In Hindi?

लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होता है। हमारे शरीर में बने जहरीले अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने में लिवर का अहम योगदान होता है। इन्हीं अपशिष्ट पदार्थों में से एक है बिलीरूबीन। इसका रंग पीला होता है। लिवर इसको पित्तरस के साथ पाचनतंत्र तक पहुंचाता है औऱ यहां से ये मल के रास्ते हमारे शरीर से बाहर होता है। अगर लिवर कमजोर हो जाए तो फिर शरीब में बिलीरूबिन की मात्रा बढ़ने लगती है। इसका परिणाम ये होता है कि आंख, स्किन और नाखून में पीलापन नजर आने लगता है। इस स्थिति को ही पीलिया कहा जाता है। 

नवजात शिशु में पीलिया की जांच की नई तकनीक क्या है?/ Methods for Determining Bilirubin Level in Neonatal Jaundice Screening and Monitoring In Hindi

पीलीया की जांच में पहले शिशु के शरीर से ब्लड निकाल कर किया जाता था लेकिन अब नई तकनीक की मदद से उनके नाखून पर प्रकाश की किरणे डालकर बीलीरूबीन का लेवल कितना है महज 3 सेकेंड में पता चल सकता है। 

  • एक ऐसा उपकरण एजेओ-निओ विकसित किया गया है जो नवजात बच्चे के नाखून पर प्रकाश की किरणे डालकर रिजल्ट बता सकता है।

  • कोलकाता के एसएन बोस नेशनल सेंटर फार बेसिक साइंसेज (NSNBNCBS) के शोधकर्ताओं की टीम ने इसको विकसित किया है। प्रोफेसर समीर के पाल के नेतृत्व में एजेओ-नियो तकनीक का विकास किया गया है।

  • स्पेक्ट्रोमेटी तकनीक पर आधारित इस उपकरण से निकलने वाली रोशनी बच्चे के नाखूनों से होकर वापस लौटती है और मात्र 3 सेकेंड में शिशु के रक्त में बिलीरूबीन के लेवल की जानकारी दे देती है।

  • हम आपको बता दें कि प्रोफेसर पाल के साथ पीड्रियाटीशियन की टीम भी जुड़े हुए थे। कोलकाता के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ असीम कुमार मल्लिक जो कि इस प्रोजेक्ट में साथ थे उनका दावा है कि इसके नतीजे सटीक हैं। इस उपकरण से मिल रहे नतीजों के आधार पर शिशुओं में पीलिया बीमारी का उपचार किया जा रहा है।

एजेओ-निओ यानि नाखून से पीलिया की जांच के क्या हैं फायदे ?/ What are the benefits of checking jaundice with AJO-neo ie nail In Hindi?

अभी जो बच्चे के शरीर में पीलिया की जांच की जो प्रक्रिया है उसके मुताबिक टोटल सीरम बिलीरूबीन टेस्ट किया जाता रहा है। इसमें शिशु के शरीर से ब्लड का सैंपल लेने के बाद रिपोर्ट के नतीजे आने के लिए 4 घंटे तक की प्रतीक्षा करनी होती थी। इतना ही नहीं, नवजात शिशुओं में पीलिया हो जाने के बाद हर 16 घंटे पर इस टेस्ट को दोहराया जाता था ताकि उपचार में फायदा हो रहा है अथवा नहीं इसका पता चल सके। कुल मिलाकर बार-बार बच्चे का ब्लड टेस्ट किया जाता था लेकिन अब बच्चे के शरीर में पीलिया की बीमारी है अथवा नहीं इसके लिए दर्दरहित जांच मुमकिन है। इसमें समय की बचत तो है ही क्योंकि महज 3 सेकेंंड में ही पीलिया का पता चल सकता है। एक और बड़ा फायदा ये है कि ब्लड टेस्ट के दौरान शिशु को बार-बार स्पर्श करना पड़ जाता था लेकिन इस उपकरण की मदद से बच्चे को बिना छुए भी जांच किया जा सकता है। बच्चे को संक्रमण होने का भी खतरा कम होगा। अब यह उपकरण बहुत जल्द बाजार में भी उपलब्ध हो सकेगा। 

क्या आप जानते हैं कि तकरीबन 60 फीसदी नवजात शिशुओं में जन्म के तुरंत बाद पीलिया होने का खतरा बना होता है। वैसे बच्चे जो समय पूर्व जन्म लेते हैं उनके अंदर पीलिया होने का खतरा 70 फीसदी ज्यादा होता है। अब इस तकनीक के सामने आने के बाद बहुत फायदा मिल सकता है औऱ बेवजह के ब्लड टेस्ट के दर्द से भी शिशु बचे रहेंगे। 

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

  • 1
कमैंट्स ()
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| Aug 07, 2020

Mera beta ka 1 mahine ka hi hai vah hamesha sota hai kya yah uske liye sahi hai use kab kab dudh pilana chahie

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Sadhna Jaiswal

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