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जुड़वां बच्चे होने पर तीसरे बच्चे के लिए मेटरनिटी बेनिफिट नहीं- मद्रास हाईकोर्ट

Prasoon Pankaj
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Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Mar 03, 2020

जुड़वां बच्चे होने पर तीसरे बच्चे के लिए मेटरनिटी बेनिफिट नहीं मद्रास हाईकोर्ट
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

कामकाजी महिलाओं के लिए मैटरनिटी बेनिफिट के नियमों से आप भली-भांति परिचित होंगी लेकिन अब मद्रास हाईकोर्ट ने एक फैसला सुनाया है। मद्रास हाईकोर्ट के फैसलों के मुताबिक अगर कोई महिला अपनी पहली डिलीवरी में जुड़वां बच्चे को जन्म देती है तो फिर उसके बाद अगली बार की डिलीवरी के लिए उसको मैटरनिटी बेनिफिट यानि मातृत्व लाभ के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। अब इसको आप ऐसे समझिए कि अगर पहली बार की डिलीवरी के दौरान किसी महिला को जुड़वां बच्चे होते हैं तो इसके बाद अगली डिलीवरी में जो बच्चा होगा उसे तीसरे बच्चे के रूप में माना जाएगा।   

मैटरनिटी बेनिफिट को लेकर क्या हैं मौजूदा नियम?

मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम, 2017 के मुताबिक गर्भवती महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव देने का प्रावधान किया गया है। नियमों के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान व नवजात शिशु की देखभाल के लिए महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव दी जाती है। इस कानून के तहत अपने पहले दो बच्चे के लिए महिला कर्मचारी 26 सप्ताह की अवधि तक के लिए मैटरनिटी लीव ले सकती हैं लेकिन दो बच्चे होने के बाद तीसरे बच्चे के लिए महिला कर्मचारी प्रसव के संभावित समय से 6 सप्ताह पहले और प्रसव होने के 6 सप्ताह बाद तक मैटरनिटी लीव का लाभ उठा सकती हैं यानि कि पहले दो बच्चे के लिए 26 सप्ताह और तीसरे बच्चे के लिए 12 सप्ताह की मैटरनिटी लीव का प्रावधान है। यहां पढ़ें : जानिए मैटरनिटी लीव बिल से जुड़ी हर बात

मद्रास हाईकोर्ट के फैसले का क्या असर पड़ सकता है? 

कोर्ट ने कहा है कि जुड़वां बच्चे होने पर दो प्रसव मान लिए जाएंगे और फिर इसके बाद तीसरे बच्चे होने की स्थिति में गर्भवती महिला कर्मचारी को इसका पूरा लाभ नहीं मिल सकेगा और फिर वे मौजूदा नियमों के आधार पर मात्र 12 सप्ताह की मैटरनिटी लीव ही ले सकती हैं। मद्रास हाईकोर्ट का कहना है कि मौजूदा नियमों के मुताबिक वर्किंग महिलाएं पहले दो प्रसव के लिए ही मेटरनिटी बेनिफिट ले सकती है। कोर्ट के मुताबिक जुड़वां बच्चों का जन्म एक के बाद एक होता है और इस आधार पर उनमें बड़े और छोटे होने का फैसला किया जाता है। इसलिए कोर्ट ने इसको दो प्रसव माना है।

कोर्ट के इस फैसले पर क्या है आपकी राय?

मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले के सामने आने के बाद इस पर एक बहस छिड़ गई है। कई महिला संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। महिला दिवस से महज कुछ दिन पहले आए इस फैसले पर आप भी अपनी राय जरूर प्रकट करें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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कमैंट्स()
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| Mar 04, 2020

If delivery of twins is considered as double delivery then it is also to be seen whether the woman employee got double the duration of normally granted maternity leave? Was she granted one year maternity leave at first "dual" delivery? If at the first delivery she got leave for 6 months only then at second delivery also she must get the maternity leave irrespective of number of kids she delivered. Six months maternity benefit is not only for benefit of new mother but also for the child. For two deliveries maternity entitlement adds up to one year. If she got her entitlement then the decision is justified If not then she has been denied of equality also as her other counterparts will get one year for two deliveries.

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