स्वास्थ्य और कल्याण

क्या है ओवरएक्टिव ब्लैडर की बीमारी और कैसे करती है यह बच्चो पे असर! और जानें

Parentune Support
3 से 7 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 02, 2018

क्या है ओवरएक्टिव ब्लैडर की बीमारी और कैसे करती है यह बच्चो पे असर और जानें

ओवर एक्टिव ब्लैडर एक ऐसी बीमारी है जिसमें पेशाब बार-बार आता है। यह सामान्य बीमारी है। ये बच्चों से लेकर बड़ों तक सबको हो सकती है। एशियाई देशों में यह आम परेशानी है। आंकड़ों के अनुसार, एशिया में करीब 53.1 प्रतिशत लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी का इलाज है, लेकिन लोग जानकारी न होने की वजह से इस बीमारी के कारण शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से गुजरते हैं। यह बीमारी की चपेट में बड़ी संख्या में बच्चे भी हैं। यहां हम बताएंगे आखिर क्या है ओवर एक्टिव ब्लैडर और कैसे ये बच्चों पर असर डालता है।

क्या है यह बीमारी

ओवर एक्टिव ब्लैडर एक ऐसी समस्या है, जिसमें ब्लैडर में दिक्कत होने लगती है। इससे बार-बार पीड़ित को यूरिन जाने का प्रेशर बनने लगता है। जबकि वास्वत में ब्लैडर फुल नहीं होता है। कई बार टॉयलेट तक पहुंचने से पहले ही यूरिन निकल जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर 24 घंटे में 8 बार से अधिक यूरिन का प्रेशर हो, तो यह इस बीमारी का लक्षण हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि आप भी अपने बच्चे पर नजर रखें और इस तरह के लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लें। ओवर एक्टिव ब्लैडर 2 तरह के होते हैं। पहला बार-बार पेशाब करने की जरूरत महसूस होना (तत्कालिक आवृति), जबकि दूसरा प्रकार है पेशाब को रोक न पाना।

कुछ अन्य लक्षण

  1. अचानक पेशाब करने की इच्छा आम तौर पर पेशाब के लिए जो दबाव बनता है, उसमें कुछ समय लगता है क्योंकि ब्लैडर धीरे-धीरे भरता है। लेकिन अगर आपके बच्चे को अचानक से लगे कि बहुत तेज पेशाब लगा है और बाथरूम जाना है तो इसका मतलब है कि उसे दिक्कत है।
  2. लीकेज होना – पेशाब का अहसास होना और बाथरूम तक जाने से पहले ही पेशाब निकल जाना।
  3. बार-बार नींद टूटना – इसके अलावा अगर बच्चे की नींद बार-बार पेशाब की वजह से टूट रही है, तो इसका मतलब है कि उसे ओवर एक्टिव ब्लैडर की समस्या है।

 

बच्चों पर इसका असर
 

  • ओवर एक्टिव ब्लैडर से पीड़ित बच्चों को मूत्राशय के संक्रमण का खतरा रहता है। इससे बार-बार पेशाब होने के कारण उन्हें जल्दी-जल्दी प्यास लगने लगती है।
  • इसके अलावा इसकी वजह से मूत्र मार्ग के आसपास के अन्य अंगों जैसे किडनी, यूरेटर, पोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी इसका इन्फेक्शन होने लगता है।
  • अगर समय पर बच्चे को डॉक्टर के पास नहीं ले जाएंगे, तो धीरे-धीरे अधिक  पेशाब आने की समस्या बढ़ेगी और वह मूत्र त्याग पर नियंत्रण नहीं कर पाएगा। वह अक्सर कपड़े गीले करेगा। इसके अलावा कुछ दिन बात पेशाब करने में भी दिक्कत आने लगती है।
  • इसके अलावा इस बीमारी से जूझ रहे कई बच्चों में यूरिन में दर्द होना, पेशाब निकलने में वक्त लगना जैसी समस्या भी होती है।
     

ये हैं घरेलू उपचार

  1. मूली के पत्ते का रस – इस समस्या से जूझ रहे बच्चे को मूली के पत्तों का रस दिन में 3 बार दें।
  2. शहद और तुलसी – एक चम्मच शहद के साथ 3-4 तुलसी के पत्ते मिलाकर बच्चे को सुबह के वक्त खाली पेट खिलाएं।
  3. पालक  - बच्चे को रात के खाने में उबला हुआ पालक खिलाएं। इससे भी राहत मिलेगी।
  4. खीरे का रस – खीरे के रस में एक चम्मच नींबू का रस और शहद मिलाकर बच्चे को दें।
  5. दही – बच्चे को अगर रोज खाने के साथ दही खिलाएंगे, तो इससे भी राहत मिलेगी। दरअसल दही में मौजूद प्रोबायोटिक ब्लैडर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है।
  6. तिल के बीज – तिल के दानों में एंटी ऑक्सिडेंट्स, मिनरल्स और विटामिंस होते हैं। बच्चे को इसे गुड़ या अजवाइन के साथ दें।
  7. अनार पेस्टक – अनार के छिलके का पेस्ट बनाकर थोड़ा थोड़ा करके रोजाना पानी के साथ दिन में 2 बार खिलाएं। इससे भी बच्चे को आराम मिलेगा। 5 दिन तक ऐसा करें।

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