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शिक्षण और प्रशिक्षण

संतरे बेचकर गांव में खोला स्कूल, पद्मश्री हरेकाला हजब्बा की प्रेरणादायक कहानी

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Nov 09, 2021

संतरे बेचकर गांव में खोला स्कूल पद्मश्री हरेकाला हजब्बा की प्रेरणादायक कहानी
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

वे खुद शिक्षित नहीं थे लेकिन शिक्षा का महत्व क्या होता है ये समझते थे। खुद के जीवन में स्कूल जा कर पढ़ाई नहीं कर पाए और इस बात का मलाल सिर्फ मन में पालने की बजाय इस व्यक्ति ने कुछ ऐसा करके दिखा दिया कि आज देश ने इनको पद्मश्री जैसे सम्मान से सम्मानित किया। अगर इंसान के अंदर अदम्य इच्छाशक्ति हो तो वो बड़े से बड़े काम को भी कर के दिखा सकता है। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके जीवन की संघर्षगाथा को आप अपने बच्चे के संग अवश्य शेयर करना चाहेंगे ताकि उनको भी प्रेरणा मिल सके। हम बात कर रहे हैं पद्मश्री हरेकाला हजब्बा के बारे में। 

क्या आपको मालूम है कि 68 साल के हरेकाला हजब्बा संतरा बेचकर अपना जीवन-यापन करते हैं। अब आप कल्पना करके देखिए कि स्टेशन पर एक टोकरी में संतरे बेचकर कोई व्यक्ति दिन भर में कितने की कमाई कर सकता है। बमुश्किल 150 से 200 की कमाई करने वाले हरेकाला हजब्बा ने ना सिर्फ स्कूल बनाने की सौगंध खाई बल्कि अपने इस सपने को उन्होने साकार करके भी दिखा दिया है। स्कूल खोलने की बात उनके दिमाग में कैसे आई इसको लेकर भी एक दिलचस्प किस्सा है। कुछ साल पहले की बात है, हरेकाला रोज की तरह संतरे बेच रहे थे उस दौरान एक विदेशी सैलानी उनके पास आया। विदेशी पर्यटक ने हरेकाला से संतरों की कीमत पूछी लेकिन वे चूंकि अंग्रेजी नहीं जानते थे और इसलिए वे जवाब नहीं दे सके। इस घटना के बाद हरेकाला को काफी शर्मिंदगी का एहसास हुआ और इसके बाद उन्होंने एक बड़ा फैसला कर लिया।

न्यूज चैनलों पर चल रही खबरों के मुताबिक हरेकाला हजब्बा ने अपने गांव में स्कूल खोलने की ठान ली। हरेकाला के मन में अब यही बात रह रहकर आ रही थी कि जिस तरीके से उनको शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा वैसी परिस्थितियों से उनके गांव की आने वाली पीढ़ी को रूबरू ना हों। फिर क्या था, इसके बाद हरेकाला ने अपने दिन भर की कमाई को स्कूल बनाने में लगाना शुरू कर दिया। साल 2000 में उनके सपनों का स्कूल बनकर तैयार हुआ। खबरों की माने तो हरेकाला के गांव के बच्चों को अच्छी तालीम नहीं मिल पा रही थी। मीडिया में चल रही रिपोर्ट्स के मुताबिक पहले उनके गांव का स्कूल एक मस्जिद से चलता था। बाद में जिला प्रशासन ने स्कूल के नाम पर 40 सेंट जमीन का आवंटन कर दिया। उसके बाद स्कूल के लिए हरेकाला ने क्लासरूम का निर्माण करवाया। हरेकाला की दिली तमन्ना है कि उनके गांव में प्री यूनिवर्सिटी और कॉलेज का निर्माण भी हो। हम आपको बता दें कि जनवरी 2020 में ही हरेकाला हजब्बा को पद्मश्री पुरस्कार देने का ऐलान कर दिया गया था लेकिन कोरोना महामारी के चलते समारोह का आय़ोजन उस समय में नहीं किया जा सका। 64 साल के हरेकाला हजब्बा को 8 अगस्त को दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया है।

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