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प्रेग्नेंसी के दौरान पेनकिलर (painkiller) का इस्तेमाल करना कितना नुकसानदेह?

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Dec 16, 2020

प्रेग्नेंसी के दौरान पेनकिलर painkiller का इस्तेमाल करना कितना नुकसानदेह
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

प्रेग्नेंसी के दौरान सर दर्द की समस्या, पैरों में दर्द की समस्या या शरीर के अन्य किसी अंग में दर्द की समस्या होते रहते हैं। कई बार ये दर्द की समस्या इस कदर बढ़ जाती है कि आप खुद को बेचैन भी महसूस करती होंगी। दर्द से तत्काल राहत पाने के लिए आप कई बार पेन किलर खाने का विचार भी बना लेती होंगी लेकिन पेन किलर का सेवन करने से पहले एक बार रूकिए, जरा सोचिए और विचार करिए। सबसे जरूरी बात कि प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी प्रकार का दवा का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह ले लिया करें और दूसरी बात कि क्या आप प्रेग्नेंसी के दौरान पेन किलर्स के इस्तेमाल से होने वाले नुकसानों के बारे में जानती हैं? 

प्रेग्नेंसी के दौरान पेन किलर्स के इस्तेमाल को लेकर क्या कहता है रिसर्च?

गर्भावस्था के दौरान पेन किलर्स का प्रयोग करना चाहिए कि नहीं इसको लेकर कई जगहों पर रिसर्च किए गए हैं। ‘इनवायरमेंटल हेल्थ पर्सपेक्टिव’ नाम की प्रकाशन पत्रिका में छपी एक रिसर्च के मुताबिक अगर प्रेग्नेंसी के दौरान पेन किलर्स का इस्तेमाल किया गया तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु की प्रजनन क्षमता पर असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर इसको आप ऐसे समझ लीजिए कि गर्भावस्था के दौरान अगर पेन किलर्स का प्रयोग किया गया तो इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु की प्रजनन क्षमता पर हो सकता है और ये उनके डीएनए पर भी प्रभाव डाल सकता है। इस रिसर्च के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान पैरासिटामॉल समेत कुछ अन्य दवाओं का भी प्रयोग काफी सतर्कता के संग करना चाहिए। 

इंग्लैंड के एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के प्रमुख रिसर्चर रॉड मिशेल ने तो यहां तक कहा है कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को किसी भी प्रकार के पेन किलर का इस्तेमाल करने के लिए सही दिशा निर्देश का पालन करने व कम से कम मात्रा में उपयोग में लाने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है। ‘न्यूरोसाइंस’ नाम की एक अन्य प्रकाशन पत्रिका में छपे रिसर्च के नतीजों के मुताबिक माइक्रोग्लिया नामका तत्व पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के दिमाग के हिस्से में ज्यादा एक्टिव पाया जाता है। मारफीन जिसका इस्तेमाल गंभीर व पुराने दर्द में किया जाता है उसका प्रभाव पुरुषों की तुलना में महिलाओं में तकरीबन दोगुने की जरूरत हो सकती है। प्रेग्नेंसी के दौरान पेनकिलर का सेवन करने से गर्भ में पल रहे शिशु को नपुंसकता की समस्या भी हो सकते हैं। 

प्रेग्नेंसी के दौरान पेनकिलर का इस्तेमाल से होने वाले प्रमुख नुकसान क्या हैं?

गायनोकोलॉजिस्ट डॉ पूजा मित्तल का कहना है कि रिसर्च के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान पेनकिलर का इस्तेमाल करने से गर्भ में पल रहे शिशु की फर्टिलिटी पर बुरी तरह से प्रभाव पड़ सकता है। 

  • पेनकिलर का ज्यादा इस्तेमाल करने से बच्चे में विकलांगता का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा महिलाओं में भी जल्द मेनोपॉज का खतरा बना होता है। पेनकिलर के प्रभाव के चलते अंडाशम में अंडो का उत्पादन तेजी से होने लगता है, जब अंडाशय खाली हो जाता है तो मेनोपॉज का खतरा बढ़ जाता है।

  • एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के रिसर्च के मुताबिक प्रेग्नेंसी के दौरान 3 में से एक महिला पेन किलर का इस्तेमाल करती हैं। डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक अत्यधिक दर्द महसूस होने पर पेन किलर्स या पैरासिटामॉल लिया जा सकता है लेकिन इसके ज्यादा इस्तेमाल से बचने का सुझाव दिया जाता है।

  •  DNA पर होता है असर- पेनकिलर का ज्यादा इस्तेमाल करने से भ्रूण के वीर्य और अंडे बनाने वाली कोशिकाएं कम होने की संभावना बन जाती है। पेन किलर का ज्यादा प्रयोग करने से डीएनए पर मार्क आ जाता है।

  • मामूली सर्दी खांसी से होने वाली समस्याओं में भी लोग पेन किलर का उपयोग करने लग जाते हैं, इससे अन्य कई प्रकार की और समस्याएं उत्पन्न हो सकते हैं।

  • लिवर-किडनी पर असर- क्या आप जानते हैं कि ज्यादा पेनकिलर का सेवन करने से लिवर और किडनी पर भी असर पड़ सकता है। लंबे समय तक पेनकिलर का इस्तेमला करने वालों का लिवर कमजोर पड़ सकता है। आपको जानकारी देना चाहूंगा कि साल 2006 से 2015 के बीच में प्रांस में सबसे ज्यादा पेनकिलर का प्रयोग किया जाता था।

  • पेनकिलर्स का बहुत ज्यादा मात्रा में सेवन करने से कब्ज की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है। आपने नोटिस किया होगा कि अगर आपके डॉक्टर पेन किलर लेने की सलाह देते भी होंगे तो उसके साथ में वे ऐंटासिड या लैक्सेटिव देते हैं ताकि एसिडिटी या कब्ज की समस्या ना हो।

  • अगर आप ज्यादातर समय पेन किलर का प्रयोग करेंगी तो फिर आपको मुंह सूखने की समस्या भी हो सकती है। मुंह सूखने की समस्या को दूर करने के लिए च्युंइंगम का प्रयोग करें लेकिन अगर ये समस्या लगातार बनी है तो निश्चित रूप से डॉक्टर से संपर्क करें। 

  • डिप्रेशन का बन सकता है कारण- पेन किलर का अक्सर इस्तेमाल करने वालों को डिप्रेशन की समस्या हो सकती है। एक रिसर्च के दौरान ये पाया गया कि जिन लोगों ने 80 दिन से अधिक समय तक पेन किलर खाया उनके डिप्रेशन का रिस्क अन्य लोगों की तुलना में 53 फीसदी ज्यादा बढ़ गया।

  • कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी, डेनमार्क के रिसर्च के मुताबिक पाया गया कि इब्रूफोफेन के ज्यादा इस्तेमाल से लोगों की मौत होने का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे मरीज जिनको हार्ट अटैक हो चुका है, इस तरह की दवाओं को खान से उनका रिस्क 59 फीसदी अधिक बढ़ सकता है। 

  • सिरदर्द की समस्या होने पर आमतौर पर लोग पेन किलर खा लेते हैं लेकिन नेशनल इंसीट्यूट फॉर हेल्थ एंड क्लीनिकल एक्सीलेंस (एनआईसीइ) के रिसर्च के मुताबिक जो लोग ज्यादा दिनों तक सिरदर्द से राहत पाने के लिए पेन किलर खा लेते हैं उनको कुछ समय बाद और ज्यादा सिरदर्द होने लगती है। 

 

आपके किचन में हैं ये 10 फूड आइटम्स को दर्द को गायब कर सकते हैं

किसी भी प्रकार का दर्द होने पर आपके लिए सबसे बेहतर उपाय तो यही होगा कि आप घरेलू नूस्खों का प्रयोग करें। आपके किचेन में ही कई ऐसे सामान मौजूद हैं जो बेहतरीन औषधि हो सकते हैं।

  1. लहसुन-   कान के दर्द में तत्काल राहत दिलाने में लहसुन बहुत उपयोगी है। लहसुन में सेलेनियम नामका तत्व मौजूद होता है। आयुर्वेद एक्सपर्ट के मुताबिक लहसुन को तेल में उबालकर कानों में लगाने पर तत्काल राहत मिल सकता है। इसके अलावा पेट दर्द या जोड़ों के दर्द से बचने के लिए भी लहसुन की एक या दो कली का सेवन कर सकते हैं।
     
  2. अजवायन- इसका इस्तेमाल हम लोग खाना में जरूर करते हैं। पेट दर्द की समस्या हो या फिर पेट में किसी प्रकार का मरोड़। आप अजवायन में काला नमक मिलाकर पानी के साथ पी लें। दर्द में तुरंतर राहत मिल सकता है।
     
  3. हींग- हींग को बहुत ही उत्तम औषधि माना जाता है। सीने में दर्द या पेट के दर्द की समस्या होने पर हींग बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। अगर छोटे बच्चे के पेट में दर्द की समस्या है तो आप हींग को पानी में मिलाकर पका लें और फिर उसका लेप बच्चे की नाभि के चारों ओर लगा दें, तुरंत राहत मिल सकता है।
     
  4. नमक- हमारे जीवन में नमक कितना उपयोगी है इसके बारे में बताने की आवश्यकता नहीं। भोजन में बिना नमक के स्वाद आने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। अगर आपके गले में खराश है या गले में दर्द की समस्या है तो गर्म पानी में नमक मिलाकर गरारा या कुल्ला कर लें तो तुरंत आराम मिल सकता है। इसके अलावा गले का इंफेक्शन दूर करने में भी ये मददगार है। पानी में नमक मिलाकर स्नान करने से शरीर की थकावट दूर हो सकती है। पैरों में सूजन की समस्या है तो नमक पानी में अपने पैरों को डालकर कुछ देर तक रखें इससे सूजन की समस्या भी दूर हो सकती है।
     
  5. लौंग- दांत में दर्द की समस्या हो, मसूड़े में सूजन हो तो लौंग बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। बहुत सारे डेंटिस्ट भी दांत के दर्द में लौंग का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं।
     
  6. पुदीना- शरीर में अगर दर्द की समस्या हो या ऐंठन, पुदीना बहुत फायदेमंद सिद्ध हो सकता है। गर्म पानी में पुदीना के तेल की कुछ बूंदे मिलाकर सेंकने से शरीर के किसी अंग में जकड़न तुरंत दूर हो सकते हैं। दांत में दर्द हो या सिर में दर्द की समस्या, पुदीना बहुत फायदेमंद है। पुदीना का इस्तेमाल करने से पाचन तंत्र भी सही से काम करता है। दिमाग की शांति के लिए भी पुदीना उपयोगी है।
     
  7. सोडा पाउडर- अगर पेट में दर्द है तो एक कप पानी में एक चुटकी खाने वाला सोडा मिलाकर पी लें, तुरंत राहत मिल सकता है। एसिडिटी की समस्या होने पर एक चुटकी सोडा, आधा चम्मच भुना हुआ बारीक जीरा पाउडर, नींबू का रस औऱ हल्का नमक मिलाकर पी लें।
     
  8. हल्दी- हल्दी हर घर में पाया जाने वाला सामग्री है। मसालों में हल्दी सबसे लोकप्रिय है। किसी प्रकार का चोट हो, जोड़ों में दर्द की समस्या है तो हल्दी बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकता है। हल्दी को सबसे कारगर पेनकिलर माना जाता है। हल्दी युक्त दूध का सेवन करने से जोड़ों में दर्द की समस्या भी दूर हो सकते हैं।
     
  9. अदरक- शरीर में मांसपेशियों का दर्द हो, जोड़ों में अकड़न की समस्या हो तो अदरक का सेवन निश्चित रूप से करना चाहिए। पीरियडस् के दौरान होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए भी अदरक का सेवन करना चाहिए। अदरक युक्त चाय पीने से सर्दी खांसी की समस्या में बहुत राहत मिल सकता है।
     
  10. मेथी- डायबिटीज की समस्या में भी मेथी बहुत उपयोगी है। मेथी का लड्डू का सेवन करने से जोड़ों के दर्द की समस्या में बहुत आराम मिल सकता है। पेट दर्द की समस्या है तो एक चम्मच मेथी दाना में चुटकी भर पिसी हुई हींग मिलाकर पानी के साथ फांकने से राहत मिल सकता है।

हालांकि हमारी राय ये है कि आप किसी प्रकार के दवा या औषधि का सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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