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शिक्षण और प्रशिक्षण

जब रिमोट लर्निंग मोड में हैं स्कूल तब पेरेंट्स पर पूरी फीस का दबाव क्यों? दीजिए अपनी राय

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Feb 01, 2021

जब रिमोट लर्निंग मोड में हैं स्कूल तब पेरेंट्स पर पूरी फीस का दबाव क्यों दीजिए अपनी राय
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

गुड़गांव के एक स्कूल के बाहर पेरेंट्स ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे पेरेंट्स की मांग थी कि अभी जबकि स्कूल रिमोट लर्निग प्रक्रिया पर काम कर रहे हैं तो उनको पूरी फीस नहीं लेना चाहिए और सिर्फ ट्यूशन फीस लेनी चाहिए। इसके अलावा पेरेंट्स इस बात की भी मांग कर रहे हैं कि पूरी फीस नहीं भरने पर दंड के रूप में अतिरिक्त पैसे नहीं लेना चाहिए। देश के कई और राज्यों में प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ पेरेंट्स प्रदर्शन करते रहे हैं। कोविड काल में स्कूल औऱ कॉलेज को सबसे पहले बंद किया गया उसके बाद फिर स्कूलों ने रिमोट लर्निग प्रक्रिया के तहत बच्चों की पढ़ाई शुरू की। अब पेरेंट्स इसी बात को लेकर मांग कर रहे हैं कि जब स्कूल चल नहीं रहे हैं तो पूरी फीस क्यों दी जाए? गुड़गांव के इस स्कूल के खिलाफ पेरेंट्स ने राज्य सरकार के पास शिकायत भी दर्ज कराया है। हरियाणा सरकार की तरफ से स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि अभी स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते हैं लेकिन पेरेंट्स ने आरोप लगाया है कि प्राइवेट स्कूल उनसे ट्यूशन फीस के अलावा पूरी फीस भरने की मांग कर रहे हैं।

हमने भी इस मुद्दे पर कुछ पेरेंट्स से संपर्क साधा औऱ उनसे कुछ सवाल पूछे। इस विषय पर दिल्ली, बैंगलोर, गुड़गांव समेत अन्य शहरों के पेरेंट्स ने क्या जवाब दिया ये आप नीचे पढ़ सकते हैं।

सवाल- क्या आप अभी अपने बच्चे का स्कूल फीस उतना ही दे रही हैं जितना कोविड काल से पहले?

इस सवाल का जवाब देते हुए दिल्ली की एक पेरेंट्स ने कहा कि स्कूलों ने 5 हजार रुपये फीस बढ़ा दिया है। बैंगलोर की एक पेरेंट्स का कहना है कि हां वो उतना ही फीस दे रही हैं जबकि प्रत्येक साल 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी जाती थी। गुड़गांव की एक पेरेंट्स का कहना है कि उन्होंने कोविड काल में स्कूल का सालाना फीस नहीं भरा है। 

सवाल- अभी ज्यादातर स्कूलों में रिमोट लर्निंग प्रक्रिया चल रही है और ऐसे में पूरी स्कूल फीस वसूल करने के खिलाफ कई जगहों पर पेरेंट्स प्रदर्शन कर रहे हैं। इसपर आपकी क्या राय है?

उत्तर- इस सवाल का जवाब देते हुए दिल्ली की एक पेरेंट्स ने कहा कि हां ये बिल्कुल सही है। बैंगलोर की पेरेंट्स ने कहा कि स्कूलों को भी अपने शिक्षकों व अन्य स्टाफ की सैलरी देनी पड़ती है, हालांकि मैं मानता हूं कि बहुत सारे पेरेंट्स की आमदनी में काफी कमी हो गई है लेकिन इसके लिए स्कूल को दोषी नहीं माना जा सकता है। गुड़गांव की पेरेंट्स का मानना है कि प्रदर्शन बिल्कुल जायज है क्योंकि स्कूल प्रशासन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहा है।

सवाल- अगर स्कूल पूरी तरह से खुल जाते हैं तो क्या आप अपने बच्चे को स्कूल भेजना शुरू कर देंगी अगर नहीं तो क्यों नहीं और आप किन शर्तों पर अपने बच्चे को स्कूल भेजना चाहेंगी? 

जवाब- दिल्ली की पेरेंट्स ने कहा कि जब तक सभी वैक्सीनेटेड नहीं हो जाते हैं तब तक अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजेंगी। बैंगलोर की पेरेंट्स का कहना है कि हां वो नए एकेडमिक ईयर में बच्चे को स्कूल भेजना पसंद करेंगी क्योंकि अब अधिकांश लोग अपने काम पर लौट रहे हैं और अपने बच्चे के साथ भी लोग आना जाना कर रहे हैं। स्कूल भी एहतियात जरूर बरतेंगे और बच्चे भी सावधानियां रखेंगे। गुड़गांव की एक पेरेंट्स ने जवाब दिया कि जब तक सभी बच्चे वैक्सीनेटेड नहीं हो जाते हैं तब तक वो बच्चे को स्कूल नहीं भेजना पसंद करेंगी क्योंकि उन्हे पूरा भरोसा नहीं है कि स्कूलों मेे सोशल डिस्टेंसिंग अच्चे से पालन हो पाएगा।

सवाल- पिछले 9-10 महीने से रिमोट लर्निंग प्रक्रिया में आपको क्या लगता है कि बच्चा अच्छे से सीख रहा है?

जवाब- दिल्ली की पेरेंट्स का मानना है कि बहुत अच्छे से सीख नहीं रहा है। बैंगलोर की पेरेंट्स का मानना है कि बच्चे इतनी देर स्क्रीन पर फोकस नहीं कर पाते हैं और सामने बैठकर टीचर जिस तरीके से पढ़ा सकते हैं वो रिमोट लर्निग में संभव नहीं है। गुड़गांव की पेरेंट्स का कहना है रिमोट लर्निंग बहुत कारगर नहीं है।

दिल्ली सरकार ने स्कूलों को क्या दिए हैं निर्देश?

दिल्ली के स्कूलों को शिक्षा विभाग की तरफ से निर्देश दिए गए हैं कि वे कोरोना काल में ट्यूशन फीस के अलावा कोई अतिरिक्त फीस नहीं चार्ज कर सकते हैं। शैक्षणिक सत्र 2020-21 में किसी प्रकार की फीस बढ़ोत्तरी करने से भी शिक्षा विभाग ने मना कर दिया है। 

दिल्ली से सटे नोएडा में भी स्कूल प्रशासन के खिलाफ पेरेंट्स आक्रोशित दिख रहे हैं। नोएडा की रहने वाली एक पेरेंट्स का कहना है कि स्कूल प्रबंधन फीस के साथ ही एनुअल चार्ज को जोड़कर पांच महीने की एक साथ देने का प्रेशर बना रहे हैं। जबकि कोरोना काल में ट्यूशन फीस के आलावा अन्य तरफ से फीस न लेने की आदेश दिए गए हैं। अचानक 20 से 25 फीसदी बढ़ी हुई फीस देना हर मां-बाप के लिए मुश्किल भरा है। 

आपको बता दें की राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में प्राइवेट स्कूलों के फीस नियंत्रण को लेकर कानून लागू है लेकिन इस कोरोनाकाल की परिस्थितियों को देखते हुए पेरेंट्स मांग कर रहे हैं कि जब स्कूल चल नहीं रहे हैं और ऑनलाइन तरीके से स्कूलों में पढ़ाई हो रही है तब उनसे पूरी फीस क्यों लिए जा रहे हैं?

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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