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इन 5 आदतों से बढ़ाएं अपना पेशेंस लेवल (Patience Level)

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संशोधित किया गया Jun 22, 2018

इन 5 आदतों से बढ़ाएं अपना पेशेंस लेवल Patience Level

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि समय और परिस्थितियां हमेशा एक जैसी नहीं होती है। हर व्यक्ति के जीवन में कभी अच्छा समय आता है, तो कभी बुरे दौर से उसे गुजरना पड़ता है। लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों में सही निर्णय लेने वाला व्यक्ति ही सफलता की ओर अग्रसर होता है और जो व्यक्ति ऐसे समय में अपने को नहीं संभाल पाता उसे विफलता हाथ लगती है। अगर गंभीरता से विचार करें तो प्रतिकूल परिस्थितियों में व्यक्ति के अंदर सबसे पहले घबराहट उत्पन्न होता है और उसका धैर्य जवाब देने लगता है और ऐसी स्थिति में वह जो भी निर्णय लेता है, उसमें से अधिकांश गलत साबित होते हैं। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण है अपने धैर्य को बनाए रखना। आजकल दुनिया के किसी भी कोने में, किसी भी समय मैसेज या जानकारी को भेजा जा सकता है, किसी से भी बात हो सकती है, हर चीज़ आपसे बस एक क्लिक की दूरी पर है। आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में धैर्यवान बनना काफी कठिन हो गया है। अधीर होना कोई गर्व की बात नहीं है, बल्कि आपको इसे अपने ज़ीवन से दूर करने के लिए हर संभव प्रयास करने की ज़रूरत है।

धैर्यवान बनने के लिए इन उपायों को आजमाएं

  • समय है मूल्यवान : खाली बैठे-बैठे आप के मन में चिंता, डर और नाखुश होने की भावना उत्पन्न होती है, जिस की वजह से आपके अंदर अधीरता का जन्म होता है। यही नहीं, हम अपना धैर्य उस समय भी खो देते हैं, जब हम किसी काम में बहुत व्यस्त रहते हैं और उसे ख़त्म नहीं कर पा रहे होते हैं या फिर एक साथ बहुत सारे काम करने लग जाते हैं। अगर आप अपने संसाधनों का उपयोग करके कोई काम दूसरे से करा सकते हैं, तो उसे खुद करके थोड़ा संसाधन बचाने की कोशिश न करें, क्योंकि उसी समय आप उससे बड़ा काम कर सकते हैं। अपनी चुनौतियों को पृथक रखें, यदि आप ऐसा कर सकें और कुछ ज़िम्मेदारियों को अन्य लोगों को भी दें तो यह आप के धैर्यवान होने की एक परीक्षा ही है । याद रखें, जीवन कोई दौड़ नहीं है, यह बस एक यात्रा है, इस के रास्ते में आने वाले हर एक पल का आनंद उठाएँ।
     
  •  लिखना न भूलें : जब भी आपके अंदर गुस्से या फिर अधीर होने की भावना महसूस हो, तो फ़ौरन ही उसे पत्रिका में लिख दें। आपके अंदर किस समय और किस तरह की परिस्थितियों में इस तरह की भावना जन्म लेती हैं, आप इस बात को भी समझ पाएँगे। उन सभी बातों पर ध्यान दें जिनके कारण आप अपना धैर्य खो बैठते हैं। यदि इस अवलोकन में आप खुद को बहुत हल्का महसूस करते हैं, तो किसी भी परिस्थिति पर अचानक प्रतिक्रिया देने से पहले अपने इस व्यवहार में बदलाव लाने से पहले आप को क्या-क्या करने की ज़रूरत है, उस की एक लिस्ट बनाएँ। वो कौन सी घटना है, कौन से लोग हैं, कौन सी बातें हैं, जो आप को अधीर बनने के लिए उकसाती हैं? अध्ययनों के अनुसार जो लोग अपनी भावनाओं के बारे में लिखते हैं,  वे शांत बन जाते हैं और अपने अनुभवों को स्वीकार करने योग्य बन जाते हैं। तो अब अगली बार आप जब भी अधीरता का अनुभव करें तो इसे लिखना ना भूलें।
     
  • सकारात्मकता है जरूरी : धैर्य की भावना का अभ्यास करने के लिए, आप के जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की ज़रूरत है। अधीरता पर काबू पाने के लिए, जीवन के प्रति आपके सोचने के रवैये में बदलाव लाना ज़रूरी है। आपकी ज़िंदगी में जो चीज़ मायने रखती है, आप उससे ध्यान हटाकर अपने अंदर मौजूद अधीरता को बढ़ावा दे रहे हैं। शिष्ट बनकर, दूसरों को माफ करने की उदारता दिखाकर, आपके पास जो भी है उसका आभार जताकर और अपनी ज़िंदगी में जो भी मायने रखता है उसे पूरा करने के अवसर का लाभ उठा कर, अपनी इस छोटी सी दुनिया को शांति की ओर ले जाएँ। आपके अंदर पनपने वाले विचार आपके अंदर संचालित होने वाली ऊर्जा को प्रभावित करता है। जिस तरह के विचार अपने अंदर लाएंगे वैसा ही प्रभाव आपके व्यक्तित्व पर पड़ेगा। इसलिए नकारात्मक प्रवृति वाले लोगों से दूर रहें और सकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ अपनी बातें साझा करें ताकि आपकी ऊर्जा को सही दिशा मिल सके।
     
  • खुद को थोड़ा समय दें : पहले खुद को कुछ समय दें, और उस बीच में कुछ भी ना करें। शांत होकर बैठें और विचार करें। ना तो टीवी देखें और ना ही कुछ पढ़ें। लंबी साँसें लें और अपने मन को साफ रखने की कोशिश करें। सांस लेने पर ध्यान दें और इस तरह से आप अपने इस व्यवहार पर काबू पा सकेंगे। यदि आप कुछ महत्वहीन और अल्पकालिक परिस्थितियों में अपना धैर्य बनाए रखने के लिए प्रयास करते हैं, तो आप अपने अंदर इस से भी ज़्यादा गंभीर परिस्थितियों से निपटने के सामर्थ्य को विकसित कर रहे हैं। एकदम से ऐसा करना आप को कठिन लगेगा और कुछ ही समय के अंदर आप अधीर महसूस करने लगेंगे, लेकिन खुद को कुछ समय के लिए रोककर आपको फायदा होगा और यह धैर्य बनाने के लिए ज़रूरी रवैये को पाने के लिए बहुत ज़रूरी है।
     
  • बोरियत से बचें : बोरियत भी आप के धैर्यवान बनने को कठिन बना देती है। यदि आप किसी जगह पर किसी का इंतज़ार कर रहे हैं, और इंतज़ार करते-करते आप अपनी घड़ी और वहाँ मौजूद लोगों की चेहरों की ओर ही देख रहे हैं, तो फिर संभव है कि आप अपना धैर्य खो देंगे। लेकिन यदि आप इसी समय में कोई काम कर लेते हैं, जैसे कोई किताब पढ़ते है या फिर बैठे-बैठे ऑनलाइन अपने घर का बिज़ली बिल भर देते हैं, तो इस तरह से आप का यह समय बिना संयम खोए कट जाएगा। तो बस खुद को व्यस्त रखने की कोशिश करें और बोरियत पर काबू पाएँ।

    उपरोक्त बिन्दुओं से स्पष्ट है कि ज़िंदगी में लगभग हर एक अच्छी चीज़ होने के लिए समय, मेहनत और लगन की ज़रूरत होती है, और यदि आप अधीर हैं, तो संभव है कि आप रिश्तों, लक्ष्यों और अन्य चीज़ों को, भले ही ये आप के लिए कितने भी अहम हों, बीच में ही छोड़ देंगे। आपकी कुछ योजनाएँ होंगी, लेकिन हर चीज़ उसी तरह से नहीं होतीं, जैसा हमने सोच रखा हो। हमेशा याद रखें कि आप जो कुछ भी चाहते हैं, उसके लिए यदि आप कठिन परिश्रम करेंगे, तो अंततः वो आपको मिल ही जाएगा। अंत में आप इस निष्कर्ष पर पहुँचेंगे कि, परिस्थियों के कारण आपमें अधीरता नहीं थी, बल्कि इस अधीरता की वजह आपके अंदर मौजूद भावनाएँ हैं। बस इतना याद रखें कि धैर्य कर पाना, यह एक ऐसा कौशल है जिसे आप कभी भी नहीं भूलेंगे। अपने जीवन में आने वाले हर एक मोड़ को सकारात्मकता के साथ स्वीकार करें। अपनी अपेक्षाओं को वास्तविक रखें। इससे आप कठिन से कठिन चुनौतियों का सफलता पूर्वक सामना कर सकते हैं।

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