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पेरेंटिंग

किशोरावस्था के दौरान होने वाले 7 प्रमुख बदलाव

Deepak Pratihast
11 से 16 वर्ष

Deepak Pratihast के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 21, 2020

किशोरावस्था के दौरान होने वाले 7 प्रमुख बदलाव
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

 

यूं तो मानव जीवन में हर पड़ाव खास है, लेकिन सबसे अहम पड़ाव किशोरावस्था है। आपके बच्चे के लिए। हर माता पिता के लिए भी यह बेहद ही खास होता है, क्योंकि इसी समय में आपको अपने बच्चों को एक नई दिशा देनी होती है। बढ़ते लड़के और लड़कियों में हार्मोन्स की वजह से मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और शारीरिक बदलाव होते हैं। मस्तिष्क भी परिपक्वता की ओर बढ़ता है। एक्सपर्टस के मुताबिक ये बदलाव लगभग 10 से 19 साल के बीच तक जारी रहती हैं ।
असल में, इसी समय में आपके बच्चे बचपने से निकल कर जीवन की दूसरी सीढ़ी पर पैर रखने के लिए तैयार होते हैं। यहीं से उनके भविष्य की राह तय होती है। इस समय में जरा-सी लापरवाही बच्चे के जीवन की राह बदल देती है। किशोरवय में आते ही आपके बच्चे में कई बदलाव हो रहे होते हैं। लेकिन, इन 7 बदलावों पर आपको विशेष ध्यान रखना होता है।


1 समझें इन संकेतों को (Understand these signs)


ज्यादातर माता-पिता को लगता है कि किशोरावस्था केवल वयस्क यौन विशेषताओं के विकास जैसे स्तन, पीरियड्स, प्यूबिक हेयर और चेहरे के बालों से जुड़ी होती है। लेकिन यह केवल युवावस्था के सबसे अधिक दिखने वाले संकेतों में से एक हैं। किशोर अपने व्यवहार की तुलना अपने से कम उम्र के किशोरों से करने लगते हैं जिससे वह उनसे अलग दिख सकें।लड़कियों के बदलाव के प्रति तो सभी संवेदनशील होते हैं लेकिन लड़कों की ओर कम ही ध्यान दिया जाता है।किशोर होते लड़कों को भी उतने ही मानसिक संबल और सहानुभूति की दरकार होती है, जितनी लड़कियों को होती है।

2 शरीर में दिखते हैं ये परिवर्तन (These changes are seen in the body)

किशोरावस्था की शुरुआत में ही बच्चों के टेस्टिकल मैच्योर और बड़े होने लगते हैं साथ ही उनका कलर भी डार्क  हो जाता है। जननांगो के आस पास वाले हिस्से में बाल आना शुरू हो जाते हैं साथ ही अंडरआर्म में भी बाल उगने शुरू हो जाते हैं। दाढ़ी-मूँछ आना शुरू हो जाती है।


3 होने लगते हैं मैच्योर (Seems to be matured)

इस दौरान लड़के धीरे धीरे सेक्सुअली मैच्योर होने लगते हैं और उन्हें रात में रोमांटिक सपने भी आने लगते हैं।लड़कों की आवाज में भी इस समय काफी बदलाव  आता है और आवाज पहले की तुलना में ज्यादा भारी हो जाती है।उसकी प्राइवेसी की कद्र करें। फोन पर यदि वह आपको देखकर अचानक चुप हो जाए तो समझ जाएं कि उसे प्रायवेसी चाहिए। यदि वह अपने लिए अलग चीजों की मांग करता है, तो उसे पूरा करने का प्रयास करें।

4 बदलता है लुक्स (Changes looks)

युवावस्था में पहुंचने पर बच्चे अक्सर नए लुक्स और पहचान धारण करने की कोशिश करने लगते हैं। इसके साथ ही वह साथियों से बेहतर बनने की कोशिश करते हैं जिसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है।युवावस्था में बच्चे के नियम तोड़ने पर उसे डांटने की बजाए उससे इसका कारण जानने की कोशिश करें और धैर्य से उसे समझाएं कि उसने जो किया वह अनुचित था।

5 करते हैं अधिक सवाल (Let's do more questions)

इस दौर में आपके बच्चे अधिक सवाल कर सकते हैं। वे भावात्मक रूप से सोचते हैं। सही और गलत के सम्बन्ध में और सवाल करेंगे। चूंकि उनके निर्णय लेने के कौशल अभी तक विकसित नहीं हुए हैं, इसलिए उसे कार्यों के परिणामों के बारे में सीखने और समझने में समय लग सकता है।


6 मूड स्विंग (Mood Swing)


इस उम्र में बच्चों का मूड काफी तेजी से बदलता है। बात बात पर बच्चे गुस्सा होने लगते हैं ऐसे मौकों पर उन्हें पेरेंट्स की सख्त जरूरत महसूस होती है। टीनएजर यही सोचते हैं कि वयस्क उनके बारे में जो भी सोचते हैं वह गलत होता है। देखा जाए तो यह केवल पेरेंट्स और किशोरावस्था के टकराव की अवधि होती है।किशोरावस्था में पहुंचने पर माता-पिता अपने बच्चे को समझने की बेहद कोशिश करते हैं, लेकिन अक्सर नाकाम रहते हैं।


7 कई हो जाते हैं हाइपर एक्टिव (Many become hyper active)


छोटी-छोटी बात पर हाइपर एक्टिव होना, डिप्रेशन, ज्यादा सोचना इस तरह की समस्याएं इस उम्र में काॅमन होती है। कई बार गुस्से में वे अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख पाते। उन्हें किसी की भी टोका-टोकी बुरी लगती है। ऐसे में पिता को उनसे संवाद करने की पहल करनी चाहिए। पिता को चाहिए कि उसके दोस्त बनें। फिर भी यदि आपके बच्चे का व्यवहार नियंत्रण से बाहर हो जाए, तो आप उनकी मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग करवा सकते हैं। इस उम्र में अक्सर वे अपनी सेहत और साफ-सफाई की ओर से लापरवाह हो जाते हैं, तो ऐसे समय में उन्हें अपनी शारीरिक सफाई का ध्यान रखने के लिए समझाएं।


एक स्वाभाविक अभिभावक के रूप में आपको इन बदलावों को स्वीकार करना चाहिए। याद कीजिए, आप भी तो इस दौर से गुजरे होंगे। आप अपने बच्चे को यह एहसास दिलाएं कि आप उसके व्यक्तित्व को स्वीकार, आदर और महत्व देते हैं। किशोरावस्था एक ऐसी निर्णायक और महत्वपूर्ण अवधि है जब किशोर बच्चे जीवनभर के लिए गुणों का निर्माण करते हैं। अमेरिका का शिक्षा विशेषज्ञ डॉ. माइक रियेरा कहते हैं कि धीरज, भरोसा, और पारिवारिक संबंध ही माता-पिता की सफलता की कुंजियां हैं जिसके पास किशोर बच्चे हैं।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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