स्वास्थ्य

पोस्ट ऑपरेटिव केयर में माँ और बच्चे का कैसे रखे ख्याल

Supriya Jaiswal
0 से 1 वर्ष

Supriya Jaiswal के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jul 11, 2018

पोस्ट ऑपरेटिव केयर में माँ और बच्चे का कैसे रखे ख्याल

शिशु के जन्म के बाद कुछ रक्तस्त्राव, असहजता और थकान होना सामान्य है। बहरहाल डिलीवरी के तुरंत बाद और कुछ हफ्तों तक पोस्ट ऑपरेटीव केयर बहुत जरुरी होता है। ऐसे में जितनी जल्दी हो सके मदद लें, ताकि गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है और आपकी सेहत में जल्दी सुधार हो सकता है। शिशु के जन्म के बाद डॉक्टर से पूछ लें कि जरूरत के समय आप आकस्मिक चिकित्सा कैसे पा सकती हैं। इस बारे में जानकारी किसी सुरक्षित स्थान पर लिखकर रखें और आपके पति और परिवार के अन्य सदस्यों को भी इसका पता होना चाहिए। आपके क्षेत्र में एम्बुलेंस सुविधाएं उतनी अच्छी नहीं हैं, तो दोस्तों या परिवार के किसी ऐसे सदस्य का फोन नंबर अपने पास रखें, जो कि आपात स्थिति में आपको अस्पताल लेकर जा सकें। निचे कुछ ऐसी स्थितिया दी गयी है जो आपको जरुर ध्यान में रखना चाहिए। 

प्रसव के बाद के इन लक्षणों को नजरंदाज ना करें / Do not ignore these symptoms after delivery

 

  1. प्रसव के छह घंटों के अंदर पेशाब न कर पाना-- अगर, आपने प्रसव के छह घंटों के भीतर अच्छी मात्रा में पेशाब नहीं किया है, तो आपको मूत्र प्रतिधारण की समस्या हो सकती है। अगर, आपका प्रसव अस्पताल में हुआ है, तो डॉक्टर इस बात पर नजर रखेंगी कि आपने कितना पेशा​ब किया है।
     
  2. बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर-- प्रसव के बाद शुरुआती छह घंटों में  ब्लड प्रेशर मापा जाना चाहिए। अगर निचला आंकड़ा (डायस्टॉलिक) 90 से ज्यादा है, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि आपको प्री- ऐक्लेम्पिसया है और आपको पूर्ण विकसित एक्लेमप्सिया होने का खतरा है। इस स्थिति में आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए, और जरुरत होने पर अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ सकता है। अगर आपको प्री-एक्लेमप्सिया के अन्य लक्षण जैसे कि सिरदर्द, धुंधली दृष्टि या मिचली भी है, तो यह स्थिति अधिक चिंताजनक है।
     
  3. तेज और लगातार लंबे समय तक सिरदर्द-- यह एपिडयूरल या रीढ़ में में लगाए गए एनेस्थीसिया का दुष्प्रभाव हो सकता है। प्रसव के बाद शुरुआती 72 घंटों में तेज सिरदर्द प्री-एक्लेमप्सिया की वजह से भी हो सकता है। प्री-एक्लेमप्सिया शिशु के जन्म से पहले या बाद में कभी भी हो सकता।
     
  4. बच्चे की देखभाल -- आपको बच्चे के घाव और कही से भी खून आने पर ध्यान देना होगा और डॉक्टर को इसकी सूचना तुरंत देनी होगी। बच्चे के शारीर का तापमान हर 4 घंटे पर चेक करे। कमरे को हवादार रखे किसी भी प्रकार का घुटन महसूस न होने दे वही करे जैसे डॉक्टर के द्वारा बताया जाये।
     
  5. पिंडली में दर्द--पिंडली में दर्द, डीप वेन थ्रोम्बोसिस (डीवीटी) की वजह से हो सकता है। इसमें मांसपेशियों की अंदरुनी गहरी नसों में खून का थक्का जम जाता है और यह जानलेवा भी हो सकता है। कई बार वह जगह लाल हो सकती है और सूजन या हल्का बुखार भी हो सकता है।
     
  6. छाती में दर्द-- अगर आपको छाती में दर्द है, तो यह छाती संक्रमण या प्रसव के तनाव के कारण मांसपेशियों में खिंचाव की वजह से हो सकता है। हालांकि, यह पल्मनरी एम्बोलिस्म का भी संकेत हो सकता है और इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर, आपको दर्द है, सांस ठीक से नहीं ली जा रही या फिर खांसते हुए मुंह से खून आए, तो आपको तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
     
  7. बहुत तेज बुखार-- तेज बुखार के साथ कंपकंपी भी हो सकती है और यह किसी संक्रमण का इशारा हो सकता है। शिशु के जन्म के बाद यदि आपको कोई संक्रमण होता है, तो इसका तुरंत इलाज न कराने पर आप काफी जल्दी बीमार पड़ सकती हैं। आमतौर पर संक्रमण या तो आपके टांको में या फिर आपके गर्भाशय में होता है। बच्चे का तापमान भी चेक करें।
     
  8. बेबी ब्ल्यूज, जो कि 10 दिनों बाद भी जारी रहे-- शिशु के जन्म के दो सप्ताह बाद भी आपको बेबी ब्ल्यूज रहे, तो यह प्रसवोत्तर अवसाद के संकेत हो सकते हैं। बेबी ब्ल्यूज का मतलब है कि आप अचानक रुआंसी, उदासीन, चिड़चिड़ी महसूस करने लगती हैं और माँ बनने के अनुभव को लेकर बिल्कुल भी उत्साहित नहीं होती। ऐसी स्थिति में मदद के लिए डॉक्टर से बात करना महत्वपूर्ण है। 

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