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12 साल का बच्चा प्रज्ञाननंद बना चेस का ग्रैंड मास्टर

Prasoon Pankaj
11 से 16 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 09, 2020

12 साल का बच्चा प्रज्ञाननंद बना चेस का ग्रैंड मास्टर
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

शतरंज में भारत का दबदबा शुरु से ही कायम रहा है। विश्वनाथन आनंद का नाम भला कौन नहीं जानता होगा लेकिन आज हम आपको एक ऐसे प्रतिभाशाली बच्चे के बारे में बताने जा रहे हैं जिसने महज 12 साल 10 महीने की उम्र में ही ग्रैंड मास्टर का खिताब हासिल कर लिया है। चेन्नई के रहने वाले आर प्रज्ञाननंद की इस उपलब्धि से सारा देश गौरवान्वित महसूस कर रहा है। आप अपने बच्चे को भी आर प्रज्ञाननंद की इस उपलब्धि के बारे में जरूर बताएं ताकि उन्हें भी चेस खेलने की प्रेरणा मिल सके। आज इस ब्लॉग में हम आपको प्रज्ञाननंद से जुड़ी कई दिलचस्प बातों के अलावा चेस खेलने से बच्चे की बौद्धिक क्षमता का कैसे विकास होता है के बारे में बताने जा रहे हैं।

शह और मात का खेल कहा जाता है शतरंज को। शतरंज की बाजी को जीतने में बड़े-बड़ों के पसीने छूट जाते हैं लेकिन 12 साल के प्रज्ञाननंद के लिए मानो ये सब चुटकी का खेल है। चेन्नई के रहने वाले  R.Praggnanandhaa  ने इटली में चल रहे ग्रीन्डाइन ओपन के फाइनल मुकाबले में नीदरलैंड के ग्रैंड मास्टर रोएलैंड प्रूजिस्स को हरा दिया। मुकाबले के आखिरी दौर तक पहुंचने के बाद ही वे दुनिया के दूसरे सबसे युवा ग्रैंड मास्टर बन गए। हम आपको बता दें कि प्रज्ञाननंद भारत के सबसे युवा ग्रैंड मास्टर हैं। विश्वनाथन आनंद जब पहली बार ग्रैंड मास्टर बने थे तब उनकी उम्र 18 साल थी। विश्वनाथन आनंद ने भी ट्वीट कर प्रज्ञाननंद को बधाई दिया है।

प्रज्ञाननंद को शतरंज खेलने की प्रेरणा कहां से मिली ?

जैसा की आप जानते हैं कि बच्चे का पहला स्कूल घर को कहा जाता है। प्रज्ञाननंद को भी अपने घर में ही चेस खेलने की प्रेरणा मिली। प्रज्ञाननंद की बड़ी बहन वैशाली भी चेस की खिलाड़ी है। प्रज्ञाननंद ने बताया कि उन्होंने अपनी बहन से ही चेस खेलना सीखा। प्रज्ञाननंद के कोच आर बी रमेश उन्हें प्यार से प्रग्गू बुलाते हैं। अपने प्रग्गू की इस कामयाबी से बेहद खुश कोच रमेश कहते हैं कि वे बहुत प्रतिभाशाली हैं और आने वाले दिनों में भी कई कीर्तिमान स्थापित करेंगे। 

चेस खेलने से बच्चों का होता है बौद्धिक विकास 

  • एकाग्रता और फोकस को बढाता है -- शतरंज  का खेल खेलने वाले बच्चे की एकाग्रता और फोकस करने की  क्षमता दूसरों की तुलना में बहुत ज्यादा होता है। 
  • फैसले लेने की क्षमता का विकास करता -- शतरंज खेलने से  सोचने की क्षमता  को नया आयाम मिलता है। विशेषज्ञों की माने तो शतरंज बच्चे  के फैसले लेने की क्षमता का भी विकास करता है। 
  • प्लानिंगविश्वासअनुशासन सीखते है -- चेस खेलने से बच्चे अनुशासित बनते है और समय का सही उपयोग करना सीखते हैं 
  • चेस खेलने से गणित और विज्ञान विषयों पर अच्छी पकड़ बनती है-- चेस खेलने से गणित के कैलकुलेशन करना बहुत सरल लगने लगता है । एक रिसर्च के मुताबिक चेस खेलने वाले बच्चे गणित में अच्छा परफॉर्म करते हैं । 
  • चेस गहराई से सोचने और खोज करने की प्रवृत्ति को बढ़ाता है-- कल्पना का विकास होता है, जो भविष्य के बारे में सोचने की क्षमता को बढ़ाता है। क्या सही क्या गलत आगे क्या करना सही रहेगा, यह सोचते की क्षमता देता है।

तो फिर आज से और अभी से अपने घर में चेस खेलने का माहौल बनाएं। शुरू-शुरू में हो सकता है कि आपके बच्चे का रुझान इसमें नजर ना आए लेकिन जब आप उसके सामने खेलेंगे और उसको भी गेम में शामिल करेंगे तो फिर आपका बच्चा भी इसमें इंटरेस्ट जगने लगेगा।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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