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स्वास्थ्य गर्भावस्था

प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) में ब्लीडिंग के कारण और उपाय

Supriya Jaiswal
गर्भावस्था

Supriya Jaiswal के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 17, 2019

प्रेगनेंसी गर्भावस्था में ब्लीडिंग के कारण और उपाय
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

अक्सर प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग हो जाती है, लेकिन आप ब्लीडिंग के सही कारण को नहीं जान पाती है कि आखिर ब्लीडिंग क्यों हो रही है। सबसे पहले आपका ये जानना बहुत जरुरी है कि प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग होना एक सामान्य बात है। डॉक्टर्स का कहना है कि प्रेगनेंसी के दौरान 40% महिलाओ को ब्लीडिंग होती ही है, लेकिन ब्लीडिंग के कलर और फ्लो से पता चलता है कि वह आपकी सेहत के लिए ठीक है या नहीं। यदि ब्लीडिंग का रंग ब्राउन है तो इसका मतलब है कि ये पुरानी ब्लीडिंग है, इसका प्रेगनेंसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन यदि ब्लीडिंग का कलर चमकदार रेड कलर का है तो, ये ताजा ब्लड हो सकता है जो आपके शारीर में प्रेगनेंसी से सम्बंधित हो सकता है और ये प्रेगनेंसी को नुक्सान पंहुचा सकता है।

प्रेगनेंसी के दौरान ब्लीडिंग होने के निम्न कारण हो सकते है / Causes of Bleeding During Pregnancy In Hindi   

  1. गर्भाशय में अंडे का प्रत्यारोपण- प्रेगनेंसी होने से कुछ दिनों पहले जब अंडे का गर्भाशय में प्रत्यारोपण होता है तो भी कुछ बुँदे ब्लीडिंग की आपको देखने को मिल सकती है, जिसकी वजह से कई बार प्रेगनेंसी का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। कई बार ऐसा लगता है कि ये पीरियड की ब्लीडिंग है, जो बहुत ही मामुली होती है और कुछ समय के बाद अपने आप चली जाती है।
     
  2. संक्रमण – प्रेगनेंसी के दौरान कई बार गर्भाशय और वेनजिना के अंदर संक्रमण होने के कारण भी हल्की ब्लीडिंग हो सकती है। ये संक्रमण अक्सर एसिडिटी के कारण होता है, इसलिए कभी भी यदि ऐसा होता है, तो इस बात का पता आपके डॉक्टर को होना बहुत जरुरी है, जिससे इसके फैलाव को तुरंत रोका जा सके और बच्चे को इससे कोई भी नुक्सान ना पहुचे।
     
  3. गर्भपात (Miscarriage) – गर्भपात होने के कारण भी ब्लीडिंग हो सकती है। अधिकतर गर्भपात भूण के सही से विकसित ना होने के कारण होते है। इसके लक्षण है योनी से तरल पदार्थ और ब्लड का आना और कमर में ज्यादा दर्द होना, यदि एक बार गर्भपात शुरू हो गया तो इसे रोकना मुश्किल हो जाता है। 
     
  4. समय से पूर्व प्रसव का होना – प्रेगनेंसी में समय से पूर्व डिलीवरी होने के कारण भी ब्लीडिंग अधिक मात्रा में हो सकती है। समय से पहले डिलवरी प्रेगनेंसी के बीस हफ्ते बाद और डिलवरी के तीन हफ्ते पहले हो सकती है।
     
  5. एक्टोपिक प्रेगनेंसी (Ectopic Pregnancy) – एक्टोपिक प्रेगनेंसी अंडे का गर्भाशय की बजाय फैलोपियन ट्यूब में चिपक जाने को कहते है। इस तरह की प्रेगनेंसी में भूण फैलोपियन ट्यूब में ही बढ़ने लगता है, ऐसी स्थिति में एक्टोपिक का पता न चलने पर ट्यूब फट भी सकता है और काफी मात्रा में ब्लीडिंग हो सकती है, जिससे महिला के जीवन पर भी खतरा बन सकता है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी तीन प्रतिशत महिलाओ में ही पाई जाती है।

प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग को कम करने के उपाय / How to Prevent Bleeding During Pregnancy In Hindi

गर्भावस्था के दौरान ब्लीडिंग या रक्तस्राव को देखकर अधिकांश महिलाएं चिंतित हो जाती हैं लेकिन जब कभी आपको इस तरह का अनुभव हो तो आपको धैर्य और संयम बनाए हुए रखना चाहिए। आप अपने डॉक्टर की सलाह पर जरूर अमल करें इसके अलावा निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें।

  • डॉक्टर से संपर्क करें – यदि आपको प्रेगनेंसी के दौरान हल्का सा भी ब्लड दिखाई देता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांचे करवानी चाहिए। यदि सामान्य ब्लीडिंग है तो इसको सही इलाज और दवाइयों से रोका भी जा सकता है।
     
  • आराम करें – प्रेगनेंसी में शुरुवाती तीन महीनो में भरपूर आराम करने की सलाह दी जाती है। इससमय ज्यादा से ज्यादा आराम करें और कोई भी भारी सामान नहीं उठाएं और बड़े बुजुर्गो की माने तो ज्यादा सीढियां भी नहीं चढ़नी चाहिए।
     
  • पौष्टिक आहार लें – प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग खून की कमी यानी अनिमियां के कारण भी हो सकती है। अनिमियां के कारण गर्भाशय को नुक्सान पहुच सकता है, जिससे ब्लीडिंग का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए प्रेगनेंसी में ज्यादा से ज्यादा पोष्टिक आहार लें और ठंडी चीजो का सेवन करें, ज्यादा गरम चीजो को सेवन न करें।
     
  • सेक्स करने से बचे – प्रेगनेंसी के दौरान यदि आपको हल्की सी भी ब्लीडिंग की संभावना महसूस होती है तो आपको सेक्स करने से बचना चाहिए। सेक्स करने से ब्लीडिंग और भी बढ़ सकती है और बच्चे को भी नुक्सान पहुच सकता है। प्रेगनेंसी के शुरुवाती तीन महीनो में सेक्स करने से दूर रहना चाहिए।
     
  • खूब पानी पियें – प्रेगनेंसी के दौरान खूब पानी पियें, क्योंकी इस दौरान ज्यादा पानी पीने से यूरिन के इन्फेक्शन और वेंजाइनल या गर्भाशय से जुड़े इन्फेक्शन भी दूर हो जाते है।

वैसे तो प्रेगनेंसी के शुरुवाती तीन महीनो में ब्लीडिंग के स्पॉट कभी कभी देखने को मिल जाते है, लेकिन प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग का आभास होते ही डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योकि प्रेगनेंसी में ब्लीडिंग आपके और आपके होने वाले बच्चे के लिए घातक भी हो सकती है। 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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कमैंट्स()
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| Feb 03, 2020

Mera abhi 3month start hua hai. Lekin muje morning me spotting hui. Uske Pehle bhi muje 2month start hua tha tab hui Thi kya ye normal hota hai. Bleeding Tarat bandh bhi Ho jati hai ur white discharge Suru Ho jata hai..

  • रिपोर्ट

| Oct 07, 2019

mam pragnancy tym me bleeding ho rhi h kya kru

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