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रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस (आरएसवी) से जुड़ी कुछ विशेष बातें

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1 to 3 years

Created by Parentune Support
Updated on Jun 04, 2018

रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस आरएसवी से जुड़ी कुछ विशेष बातें

 

बदलते वातावरण की वजह से आजकल बहुत सी बीमारियां फैल रही हैं। रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस (आरएसवी) भी एक ऐसी ही बीमारी का नाम है । आरएसवी की वजह से  स्वस्थ बच्चों में सर्दी-जुकाम,  निमोनिया और गंभीर श्वास समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों और अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोगों में इसके होने खतरा  सबसे ज्यादा होता है। आरएसवी से ग्रस्त बच्चे को बुखार, बंद नाक, खांसी, और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है। यहां हम बताएंगे इससे जुड़ी कुछ खास बातें।

 

कैसे फैलता है यह वायरस

आरएसवी का कोई विशेष उपचार नहीं है। इससे बचने के लिए बच्चे को तरल पदार्थ देना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर आप बुखार और सिरदर्द के लिए पेन किलर (एस्पिरिन नहीं) भी दे सकते हैं। आरएसवी आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इससे ग्रस्त व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से या खिलौने व सतह जैसी संक्रमित चीजें छूने से यह वायरस फैलता है। हमेशा अपने हाथ धोना और खाने-पीने के बर्तन साझा ना करना आरएसवी संक्रमण से बचने के आसान तरीके हैं। वर्तमान में, आरएसवी के लिए कोई वैक्सीन नहीं है।

 

 

 

 

रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस संक्रमण के लक्षण

 

 आरएसवी संक्रमण के सामान्य लक्षण में सूखी खांसी, बहती नाक, बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, घबराहट व सांस लेने मे तकलीफ आदि हैं। इस वायरस में बच्चे की त्वचा  नीले रंग की दिखाई देने लगती है। इसके अलावा बच्चे में चिड़चिड़ाहट, गले में जलन, बंद नाक की  भी शिकायत देखने को मिलती है।

 

रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस संक्रमण के फैलने के कारण:-

सांस लेने वाले मार्ग के निचले हिस्से में रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस का इन्फेक्शन  होता है। जो नाक और गले में दिखाई देता है। छोटे बच्चों में यह प्रभाव फेफड़े और सांस लेने वाले मार्ग में दिखाई देता है । बच्चों में रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस को बढावा देने में विभिन्न प्रकार के जीवाणु अपनी भूमिका निभाते हैं। यह वायरस उन बच्चों को आसानी से अपने कब्जे में ले लेता है, जिनमें नाक बहने वाले लक्षण देखने को मिलते हैं। अगर किसी व्यक्ति को खांसी या जुखाम हुआ है और वह जब खांसता या छींकता है तो यह दूसरे लोगों में भी फैल जाता है। छोटे बच्चों को तो ये आसानी से चपेट में ले लेता है। साफ सफाई का उचित ध्यान न रखना भी इन्फेक्शन का कारण होता है। अगर बच्चा ज्यादा छोटा है ,तो उसके  कपड़ों पर खास ध्यान देना चाहिए। कई बार यूरिन की ठीक तरह से सफाई न होने की वजह से भी परेशानी आती है। बारिश में भीगने के कारण भी ये इन्फेक्शन कई बार बच्चों में हो जाता है ।

 

रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस संक्रमण से बचने के उपाय:-

 रेस्पिरेटरी सिंसिशीयल वायरस संक्रमण को रोकना संभव है। अगर आप कुछ चीजों पर ध्यान दें, तो इसे रोका जा सकता है। अपने बच्चे को इससे बचाने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं।

- परिवार के सदस्यों को धूम्रपान न करने दें। आसपा होने वाले धूम्रपान से भी बचें।  

-घर में सफाई रखें और अपनी चीजें खासकर कपड़े, रुमाल आदि को साफ रखें।

- परिवार का कोई भी सदस्य घर में बाहर से आए तो हाथों और पैरों को जरूर धोए।

-ऐसे लोग जो आरएसवी  संक्रमण से ग्रसित हैं, उनके संपर्क  में आने से अपने बच्चे को बचाएं।

- बच्चों के खाने-पीने की चीज दूसरों से साझा करने से बचें।

-आरएसवी से बचाव के लिए आप तुलसी का भी प्रयोग कर सकते हैं। तुलसी में संक्रमण को कम करने का गुण पाया जाता है। बाजार में तुलसी ड्रॉप भी उपलब्ध है, जो आप बच्चों को दे सकती हैं।

-आरएसवी में गले की परेशानी को दूर करने के लिए गरम पानी से गरारा करना चाहिए।  

-अपने बच्चे को तरल पदार्थ पीने के लिए प्रोत्साहित करें इससे बच्चे के गले को आराम मिलता है।

- अगर  आरएसवी इन्फेक्शन की समस्या बहुत गंभीर है, तो वैक्सीन के  द्वारा ही इलाज किया जाना चाहिए, जिससे  रोगी को जल्द आराम मिल सके ।

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