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गैजेट्स और इंटरनेट

विकसित देशों में बच्चों के लिए सेफ इंटरनेट को लेकर हैं कानून, अपने देश में भी लागू करने की आवश्यकता

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 22, 2021

विकसित देशों में बच्चों के लिए सेफ इंटरनेट को लेकर हैं कानून अपने देश में भी लागू करने की आवश्यकता
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

आपका बच्चा इंटरनेट पर क्या सर्च कर रहा है? आपका बच्चा इंटरनेट पर किस तरह के साइट्स को देख रहा है? सर्च इंजन आपके बच्चे को किस तरह का कंटेंट देखने के लिए प्रेरित कर रहा है? क्या आपका बच्चा उसकी उम्र के हिसाब से जो जरूरी सामग्रियां हैं वही देख रहा है? इस तरह के कई सवाल आपको परेशान करते होंगे। खास कर के अभी के दौर में जबकि हर कोई डेटा प्रोटेक्शन और प्राइवेसी को लेकर चिंतित नजर आ रहा है। ब्रिटेन में इस मसले पर काफी गंभीरतापूर्वक सोच विचारकर नए कानून को लागू किया गया है। हम आपको इस ब्लॉग में बताने जा रहे हैं कि क्या है ये नया कानून जिसमें डिजिटल साइट्स के लिए बच्चों के डेटा प्रोटेक्शन और इंटरनेट पर सुरक्षित डिजिटल स्पेस क्रिएट करने के लिए कौन सी पहल की गई है। 

ब्रिटेन में बच्चों के डेटा प्रोटेक्शन के लिए नए कानून की मुख्य बातें क्या हैं?

सितंबर महीने में ही ब्रिटेन में नए कानून को लागू किया गया है। इस कानून का उद्देष्य बच्चों के लिए सेफ डिजिटल स्पेस क्रिएट करना है। 

  • इस कानून के तहत बच्चों के डिजिटल डेटा को स्टोर, शेयर और कलेक्ट करने को लेकर सख्त नियम लागू किए गए हैं। गौर करने वाली बात ये है कि इन नियमों का पालन वैसे सभी वेबसाइट्स या ऐप्स को करना अनिवार्य है जिनका प्रयोग बच्चे कर रहे हैं या कर सकते हैं। एक और जरूरी जानकारी ये है कि इस डिजिटल डेटा का प्रयोग कहां कैसे और किस तरीके से होगा इसको लेकर भी शर्तों को तय किया गया है।

  • आपको बता दें कि पिछले साल यानि सितंबर 2020 में ही इस प्रस्तावित कानून के मसौदे को ब्रिटेन के इनफॉर्मेशन कमीश्नर ऑफिस ने पेश किया था। इस बिल को लागू करने के संदर्भ में सभी कंपनियों को 1 साल की मोहलत भी दी गई थी। अब 1 साल पूरा हो जाने के बाद इस साल 2 सितंबर से ये कानून पूरी तरह से लागू कर दिया गया है।

  • इस कानून के दायरे में तमाम तरह के सोशल मीडिया साइट्स, गेम्स साइट्स, शॉर्ट वीडियो ऐप्स, म्यूजिक स्ट्रीमिंग साइट्स समेत तमाम वे वेबसाइट्स आते हैं जिनका प्रयोग बच्चे कर सकते हैं। मूल भावना यही है कि इंटरनेट पर बच्चों को सुरक्षित माहौल दिया जाए और बच्चों के डेटा को सेफ रखा जाए।

  • कानून के मुताबिक बच्चों के डेटा को किसी भी कीमत पर कमर्शियल और सेक्सुएल उत्पीड़न में प्रयोग नहीं कर सकते हैं।

  • वेबसाइट का डिजाइन कुछ इस तरह का होना चाहिए कि बच्चों को अपना डेटा बहुत ज्यादा शेयर नहीं करना पड़े

  • इन वेबसाइट्स और ऐप्स पर लोकेशन ट्रैकिंग सर्विसेज को भी बंद करना होगा।

  • बच्चों के किस तरह के डेटा को कलेक्ट किया जा रहा है उसकी मैपिंग कराना भी अनिवार्य होगा

  • इस कानून को तैयार करने के दौरान डेटा प्रोटेक्शन, ट्रांसपेरेंशी और पेरेंटल कंट्रोल्स जैसे चीजों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया है।

  • आपको बता दें कि ये कानून ब्रिटेन और ब्रिटेन के बाहर की सभी कंपनियों पर लागू होगा।

अब आप ये भी जान लें कि कानून लागू होने के बाद साइट्स को किस तरह के बदलाव करने पड़े?

कानून के लागू होने के बाद से ही ब्रिटेन में काम कर रहे कई वेबसाइट्स से बहुत प्रकार के बदलाव किए हैं।

  1. सबसे पहले बात टिकटॉक की, हालांकि टिकटॉक पर अपने देश में बैन है लेकिन ब्रिटेन में टिकटॉक पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लागू नहीं है। टिकटॉक ने किशोरावस्था के बच्चों के लिए शेयरिंग के विकल्पों में बदलाव किए हैं। 16 साल से 17 साल के बच्चों को रात में 10 बजे के बाद और 13 से 15 एजग्रुप वाले बच्चों को रात 9 बजे के बाद से किसी प्रकार के नोटिफिकेशन नहीं भेजे जाएंगे।

  2. अब आप ये भी जान लें कि गूगल ने ब्रिटेन में किस तरह के बदलाव किए हैं। ब्रिटेन में गूगल ने बच्चों के लिए लोकेशन हिस्ट्री को पूरी तह से डिसेबल कर दिया है। 18 साल से कम उम्र के बच्चे या उनके माता-पिता गूगल सर्च में दिख रहे किसी तस्वीर को भी हटाने का निवेदन कर सकते हैं।

  3. यूट्यूब में जैसा कि आप जानते हैं कि ऑटो प्ले का ऑप्शन उपलब्ध होता है लेकिन ब्रिटेन में इस कानून के लागू हो जाने के बाद यूट्यूब ने 13 से 17 आयुवर्ग के यूजर के लिए ऑटो प्ले के विकल्प को डिजेबल कर दिया है।

  4.  फेसबुक ने 18 साल से कम उम्र के यूजर को टारगेट एडवरटाइजिंग पर ब्रिटेन में रोक लगा दिया है। किसी भी प्रकार के संदिग्ध एकाउंट से यूजर को दूर रखा जाएगा।

  5. अब आप ये भी जान लें कि इंस्टाग्राम ने किस तरह के बदलाव किए हैं। ब्रिटेन में अब इंस्टाग्राम पर बच्चों को कोई अजनबी व्यक्ति मैसेज नहीं कर सकते हैं। हां अगर कोई बच्चा किसी को फॉलो कर रहा है तब तो मैसेज भेजा जा सकता है। 18 साल से कम उम्र वाले जितने भी यूजर होंगे इंस्टाग्राम पर उनका एकाउंट प्राइवेट होगा। ब्रिटेन में इंस्टाग्राम पर लॉग इन करने के लिए जन्मतिथि एंटर करना भी अनिवार्य कर दिया गया है।

अब आप ये भी जान लें कि अगर कोई कंपनी इस कानून के प्रावधानों को नहीं मानती है तो उस पर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है। जुर्माने के तौर पर अपने ग्लोबल टर्नओवर का 4 फीसदी हिस्सा तक वसूली जा सकती है। शिकायत की जांच करने के बाद ही कंपनियों पर कार्रवाई की जा सकती है।

क्या अपने देश में बच्चों के डिजिटल डेटा प्रोटेक्शन से जुड़ा कोई कानून है?

इस सवाल का जवाब है नहीं। फिलहाल भारत में इस तरह का कोई कानून नहीं है। साल 2019 में प्रस्तावित पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल में जरूर बच्चों के डिजिटल डेटा को लेकर कुछ प्रावधान किए गए हैं। इस प्रस्तावित कानून के मुताबिक कंपनियों को बच्चों से संबंधित डेटा को प्रोसेस करने से पहले बच्चे की एज की पुष्टि करनी होगी और इतना ही नहीं पेरेंट्स की सहमति भी इसके लिए जरूरी होगी। अब इस कानून के ब्रिटेन में लागू हो जाने के बाद से अपने देश भारत में भी इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या यहां भी इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे बच्चों को गैर जरूरी साइट्स से बचाने के लिए सख्त कानून लागू करना चाहिए? एक महत्वपूर्ण जानकारी ये है कि अपने देश में दो तिहाई इंटरनेट यूजर 12 से 29 आयुवर्ग के लोग हैं। IAMI और नील्सन के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 12 साल से 15 साल तक के तकरीबन 14 फीसदी इंटरनेट यूजर हैं जबकि 16 से 19 साल के तकरीबन 18 फीसदी इंटरनेट यूजर हैं। ब्रिटेन के अलावा अमेरिका, ब्राजील, रूस व चीन समेत कई और देशों में बच्चों के डेटा प्रोटेक्शन को लेकर सख्त कानून लागू हैं।

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