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प्रेग्नेंसी के दौरान यात्रा करने समय में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

Vishwa Pratap Singh
गर्भावस्था

Vishwa Pratap Singh के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Mar 31, 2020

प्रेग्नेंसी के दौरान यात्रा करने समय में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

गर्भावस्था का समय शिशु और मां दोनों के लिए बेहद नाजुक दौर होता है, इस दौरान गर्भवती को हर छोटी से लेकर बड़ी चीज का ख्‍याल रखना होता है। ऐसे में अगर किसी प्रेगनेंट महिला को अगर मजबूरन में ट्रेवल करना पड़ जाएं तो ये स्थिति थोड़ी मुश्किल भरी हो जाती है। हालांकि प्रेगनेंसी के दौरान डॉक्‍टर्स तो यात्रा न करने की हिदायत देते हैं।  क्‍योंकि यात्रा के दौरान लगने वाले झटके, पेट पर दबाव या किसी दुर्घटना की स्थितिमें शिशु को नुकसान पहुंच सकताहै। कई बार गर्भपात की भी स्थिति बन जाती है। आइए इस ब्लॉग के जरिए जानते है कि अगर किसी भी गर्भवती महिला को यात्रा करनी पड़ जाए तो किन बातों का विशेष ख्‍याल रखना चाहिए।

प्रेग्नेंसी के दौरान यात्रा करने के समय आप इन जरूरी बातों का रखें ख्याल / Travelling during Pregnancy - Safety Tips and Precautions In Hindi

विशेषज्ञों के मुताबिक आप छठवें महीने तक कर सकती हैं यात्रा। प्रेग्नेंसी के दौरान यात्रा करना उन महिलाओं के लिए हानिकारक हो सकता है, जिन्हें हाई रिस्क प्रेग्नेंसी है या जिन्हें डॉक्टर ने पूरी तरह से आराम करने की सलाह दी है।

  1.  प्रेग्नेंसी का दूसरे ट्राइमेस्टर यानी 3 से 6 महीने के बीच आप जरूरी होने पर सफर कर सकती हैं। सुरक्षित यात्रा के साथ ही यह भी आवश्यक है कि आप ऐसी जगहों यात्रा पर न जाएं, जहां किसी संक्रमित बीमारी का प्रकोप फैला हो।
     
  2. लास्‍ट ट्राइमेस्‍टर में बचें यात्रा करने से-  डॉक्टर प्रेगनेंट महिला को तकरीबन  28 हफ्तों के बाद ट्रेवल करने की अनुमति नहीं देते हैं, वैसे ट्रेवलिंग के लिए  14 से 18 हफ्तों के बीच का समय चुनें। क्योंकि उस समय ना तो गर्भपात की संभावना होती है और ना ही अन्य परेशानियां होती हैं। इन महीनों में मॉर्निंग सिकनेस, अधिक थकान, सुस्ती जैसी शिकायतें आमतौर पर कम होती हैं।
     
  3. भारी सामान लेकर यात्रा ना करें :- गर्भावस्‍था में औरतों को ना ही भारी सामान अपने साथ लेकर जाना चाहिए और ना ही उठाना चाहिए, ख़ासतौर पर अगर आप आपको अकेले यात्रा करनी पड़ जाएं तो व्‍हील वाले ट्रोली बैग का इस्‍तेमाल करें। इस दौउरान अकेले ट्रेवल करने से बचें।
     
  4. खानपान का ध्यान रखें:- गर्भवती महिलाओं में सफर के दौरान जी मिचलाना और उल्टी आना आम शिकायत है। अगर आप हवाई जहाज से यात्रा कर रही हैं तो यात्रा के दौरान दिए जाने वाले ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर जरूर लें। यात्रा के  2 से 3 घंटे पहले कुछ खालें,  इससे भूख कम लगेगी। कोशिश करें कि पैकेज्‍ड फूड का सेवन अवॉइड करें।
     
  5. सीट और पोस्‍चर का रखें ध्‍यान:- ऐसी सीट का चुनाव करें जो आरामदायक तो हो ही साथ ही लेग स्पेस भी काफ़ी हो जिसमें आप आराम से खुलकर अपनी स्ट्रेचिंग एक्सार्साइज़ कर सकें और अपने से यात्रियों को बिना डिस्टर्ब करे वॉशरूम आराम से जा सकें, एक ही पोस्चर मे ना बैठी रहें और हो सके तो पोस्चर्स बदलाव करती रहें इससे आपकी बॉडी मे ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रूप से चलता रहेगा।
     
  6. अगर आप ट्रेन से सफर करने का कार्यक्रम बना रही हैं तो कोशिश कीजिए की आप लोअर बर्थ (नीचेवाली) की सीट लें। यात्रा के दौरान फैशन के चक्कर में टाइट कपड़े या फिर हील वाली सैंडल इत्यादि का इस्तेमाल न करें। कार में बहुत ज्यादा सिकुड़ कर न बैठे बल्कि पैर फैलाते हुए ऐसे बैठे जिससे आप आसानी से पैर हिला सकें और ऐंठन या अकड़ न होने पर आपको अपना पोस्चर बदलने में दिक्कत न हो।
     
  7. ट्रेन में ट्रेवल करते समय:- यदि गर्भवस्था को  6  महीनें का समय बीत चुका हो तब ऐसी 2 टियर या 3 टियर में ही यात्रा करें। साथ ही लोअर बर्थ के ही टिकट लें। इससे एक तरफ जहां गर्भवती महिला को यात्रा के समय थोड़ी खुली जगह मिल जाएगी वहीं मिडिल एवं अपर बर्थ में चढ़ने-उतरने का जोखिम भी नहीं लेना पड़ेगा। बीच-बीच में उठकर अपनी बोगी में घूमने-फिरने के ल‍िए जगह मिल जाएंगी।
     
  8. प्रेग्‍नेंसी के दौरान खाई जाने वाली सभी दवाईयां एवं मेडिकल फाइल साथ लेकर यात्रा करें।
     
  9. यात्रा के पहलेअपनी डॉक्टरी जांच अवश्य कराले।
     
  10. ट्रेन में ट्रेवल कर रही हैं तो सामान ज्‍यादा इकट्ठा ना करें, खुलकर बैठें।
     
  11. खिड़की के पास बैठे एवं ताजी हवा का आनंद ले।

अगर आप यात्रा के दौरान इन बातों का ध्यान रखेंगी तो आपको किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा लेकिन फिर भी एहतियात के तौर पर हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह के मुताबिक एवं परिवारजनों के संग ही यात्रा करने का प्रयास करें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

  • 2
कमैंट्स ()
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| Apr 30, 2019

अच्छी जानकारी

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| May 08, 2019

thanks

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