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पेरेंटिंग स्वास्थ्य

बच्चों को बचाएं इन दुर्लभ बीमारियों से

Deepak Pratihast
1 से 3 वर्ष

Deepak Pratihast के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 01, 2018

बच्चों को बचाएं इन दुर्लभ बीमारियों से

कुछ बच्चे जन्म से साथ या उसके बाद दुर्लभ बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। यह बीमारियां उनके मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित करती हैं । छोटे बच्चो को होने वाली दुर्लभ बीमारियों का पता लगाना थोडा मुश्किल होता है पर इसे समय रहते जान लें तो इसका इलाज किया जा सकता है। इन बीमारियों के इलाज के लिए कई प्रकार की थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। बच्चे में अगर आपको कोई ऐसी बीमारी के संकेत या फिर असामान्य व्यवहार दिखे तो उसे अनदेखा न करे। वैसे तो दुर्लभ बीमारियां बहुत कम ही पाए जाते है पर फिर भी अपने बच्चे को लेकर कोई भी लापरवाही ना करें। ऐसे ही कुछ दुर्लभ बीमारियां और उनके संकेतों के बारे में हम आपको इस ब्लॉग में बताएंगे।

बच्चों में होने वाली दुर्लभ बीमारियां और उनके संकेत / Rare diseases and their signs in children In Hindi

 

  1. जन्म से ही थाइरॉइड की कमी --यह बीमारी बच्चो में थाइरॉइड हारमोंस की कमी से होती है ।इसके लक्षण है ज्यादा सोना ,पीलिया ,थकावट और शरीर का तापमान कम होना। इससे बचने के लिए बच्चो को थाइरॉइड की दवाये दी जाती है। 
     
  2. फिनायल कीटोन यूरिया -- इस  बीमारी में बच्चो में एंजाइम की कमी होने से बच्चा एमिनो एसिड पचा नहीं पता है और इसके शरीर में इकठ्ठा होने से फिनायल कीटोन यूरिया होता है। एमिनो एसिड जमा होने से बच्चे का विकास रुक जाता है, पेशाब में बदबू आता है और मानसिक कमजोरी भी होने लगती है। इससे बचने के लिए बच्चो को एमिनो एसिड रहित दूध दिया जाता है।
     
  3. बायोटिन डेफिशियेंसी -- यह बीमारी बच्चो में बायोटिन मतलब की विटामिन बी 7 की कमी से होता है जिसकी वजह से बच्चे में कमजोर दिमाग ,बार- बार संक्रमण होना, दस्त लगना, दौरे आना, त्वचा रोग और बाल झड़ना आदि जैसी समस्याए होती है। 
     
  4. ड्युकन मस्कुलर डिस्ट्रफी -- यह मांसपेशीयों की बीमारी है जो अधिकतर लड़को में पाई जाती है। इस बीमारी में बच्चे के एक्स क्रोमोसोम में डिस्ट्रोफीन जीन विकार हो जाता है। इसके लक्षण 2-3 साल में दिखने लगते हैं जिसमे बच्चे के पैरो की मांसपेशिया कमजोर होती है और अगर सही समय पर इसके लक्षण न पहचाने गये तो तो 10 साल की उम्र में बच्चा चलना फिरना बंद कर देता है। इस बीमारी के लिए स्टेम थेरेपी या जीन थेरेपी पर प्रयोग चल रहे है।
     

हमारी सलाह ये है कि अगर आपको बच्चे के अंदर इस तरह के कोई लक्षण नजर आएं तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें। बिना डॉक्टरी सलाह के किसी दवा का सेवन ना करें।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

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कमैंट्स()
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| Mar 30, 2019

hello mam meri beti swa sal k hogyi hai kuch khati piti ni hai muh say bhar niklti hai na uska weight badta h na diet pls kya kru btye

  • रिपोर्ट

| Aug 06, 2018

muu

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