पेरेंटिंग स्वास्थ्य

शोर और ध्वनि प्रदूषण का बच्चों पर हो रहा है खतरनाक दुष्प्रभाव

Parentune Support
3 से 7 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jun 12, 2018

शोर और ध्वनि प्रदूषण का बच्चों पर हो रहा है खतरनाक दुष्प्रभाव

 

 

अवांछित ध्वनि को शोर कहते हैं। अनचाही ध्वनि जब आस-पास के परिवेश में इतनी मात्रा में पहुंचने लगे कि उससे जनस्वास्थ्य को खतरा पैदा होने लगे, तब शोर प्रदूषण का रूप धारण कर लेता है |शोर और ध्वनि प्रदुषण हर साल बहुत तेजी से बढ़ रहा है | यदि यह गति जारी रही तो आने वाले दशकों में नगरों और महानगरों में रहने वालों की एक बहुत बड़ी संख्या उनकी हो जायेगी जो बहरे होंगे ।यह एक बहुत बड़ी समस्या है जो आपके बच्चो पे तो बहुत ही खतरनाक दुष्प्रभाव डालती है |आपको बताते है की आपके बच्चो पर शोर और ध्वनि प्रदुषण का क्या प्रभाव पड़ रहा है |

 


 

हर कोई एक समान शोर सहन नहीं कर पाता --- हर व्यक्ति के शोर की प्रतिक्रिया एक समान नहीं होती है। यही वजह है कि किसी बूढ़े व्यक्ति के लिए पॉप संगीत शोर है तो युवा के लिए मनोरंजन का साधन।कुछ बच्चे भी शोर सह लेते है पर कुछ बच्चों  को उसी शोर-शराबे में रहने में दिक्कत होती है। उन्हें सर दर्द की परेशानी होने लगती है या फिर मन अजीब सा होने लगता है | और तो और, पशुपक्षियों की भी ध्वनि के स्रोत में एक समान प्रतिक्रिया नहीं होती।

अनिद्रा  की परेशानी --ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव काफी हानिकारक होते हैं। ध्वनि प्रदूषण के कारण अच्छे खासे स्वस्थ व्यक्ति को भी अनिद्रा तथा बेचैनी हो जाती है और जब बच्चे अच्छी नींद नहीं लेते है तो उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पडता है| आपको चाहिए की अपने छोटे बच्चो को बहुत शोर वाली जगह से दूर रखे |

गुस्से की प्रवृति का उत्पन्न होना --  जब बच्चे शोर वाले वातावरण में रहते है तो वो तेज से बोलते है जिससे उन्हें हर माहौल में चिल्ला कर बोलने की आदत बन जाती है तथा कभी-कभी इसके प्रभाव से बच्चे  हिंसा पर भी उतारू हो जाते हैं। वो पार्क में दुसरे बच्चो के साथ मिल कर नहीं खेलते है ,स्कुल में बच्चो से लड़ाई कर के आते है |

कान का पर्दा ख़राब होने का खतरा -- घर के बाहर जैसे भारी मशीनों, गाड़ियों ,औद्योगिक इमारतो आदि वहीं कुछ इंडोर शोर जैसे की घरेलू मशीनों, निर्माण गतिविधियों, तेज आवाज में संगीत, आदि के कारण ध्वनि प्रदूषण होता है और इससे सबसे ज्यादा हानि बच्चो के कान के पर्दे को होता है और उनके खराब हो जाने के कारण हमेशा के लिये सुनने की क्षमता का चले जाने का खतरा रहता है।

मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है -- ध्वनि प्रदूषण के शारीर से ज्यादा दुष्प्रभाव मस्तिष्क पर होते हैं | इससे आपके बच्चे की विभिन्न परिस्थितियों में खुद को ढालने की क्षमता तो कम होती ही है, साथ ही लंबे समय तक तेज शोर के संपर्क में रहने से बच्चे तनावग्रस्त भी हो जाते है |बहुत छोटे बच्चे बात-बात पे रोने लगते है और थोड़े बड़े बच्चे हर बात पर गुस्सा करते है |

 

 

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