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स्वास्थ्य

क्या हैं बच्चों में कैंसर होने के प्रमुख लक्षण? क्या कहना है डॉक्टरों का पैरेंट्स से?

Prasoon Pankaj
1 से 3 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 21, 2019

क्या हैं बच्चों में कैंसर होने के प्रमुख लक्षण क्या कहना है डॉक्टरों का पैरेंट्स से
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

हम बहुत सारी बीमारियों से खुद को और अपने बच्चों को बचा सकते हैं अगर हम जागरुक रहें। जहां तक बात बच्चे की है तो निश्चित रूप से हम सभी अपने बच्चे का पूरा ध्यान रखते हैं लेकिन कई बार जानकारी और जागरुकता के अभाव में बच्चे गंभीर बीमारियों का शिकार बन जाते हैं। ऐसी ही एक बीमारी है कैंसर, जिससे हमें अपने बच्चे को बचाना है।  क्या आप जानते हैं कि दुनियाभर में तकरीबन 3 लाख बच्चे प्रत्येक साल कैंसर की गिरफ्त में आ रहे हैं, अगर अपने देश की बात करें तो आंकड़ों के मुताबिक हर साल 78 हजार बच्चे कैंसर के शिकार हो जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन) ने भी इसको चुनौती मानते हुए साल 2030 तक तकरीबन 60 फीसदी बच्चों को कैंसर मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि इसके साथ ही ये भी एक बड़ा सच है कि अगर पैरेंट्स अपने बच्चे के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना शुरू कर दें तो फिर बहुत हद तक इलाज करने में और बच्चे को कैंसर मुक्त करने में सफलता मिल सकती है।

तो आइये इस ब्लॉग में जानते हैं कि बच्चों में कैंसर के प्रमुख लक्षण क्या हो सकते हैं इसके साथ ही एक निवेदन आपसे यह भी कि इस जानकारी को आप अन्य पैरेंट्स के साथ भी जरूर शेयर करें ताकि वे भी जागरुक हो सकें।
 

पैरेंट्स को कैंसर के इन प्रारंभिक लक्षणों के बारे में जानकारी होनी चाहिए / Signs & Symptoms of Cancer in Children

गैर सरकारी संगठन कैनकिड की संस्थापक पूनम बगई  जिन्होंने खुद कैंसर जैसी बीमारी को हराने में सफलता प्राप्त कर ली है, अब वे बच्चों को कैंसर से मुक्त करने की दिशा में सक्रियता के संग काम कर रही हैं। पूनम बगई के मुताबिक ये बहुत जरूरी है कि पैरेंट्स अपने बच्चे में होने वाले बदलावों औऱ लक्षणों पर ध्यान दें।

  1. एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया, ब्रेन ट्यूमर, होज्किन्ज लिम्फोमा ये बच्चों में होने वाले प्रमुख कैंसर हैं।
     
  2. अगर बच्चे का शारीरिक व मानसिक विकास में देरी हो रही हो या फिर सामान्य रूप से ना हो रहा हो
     
  3. अचानक से बच्चे का वजन कम होने लगे
     
  4. अचानक से बच्चे को शरीर के किसी हिस्से से रक्त स्राव होने लगे
     
  5. शरीर के किसी हिस्से में बच्चे को गांठ उभरने लगे
     
  6. अगर इस तरह की बीमारी का फैमिली हिस्ट्री हो तो ज्यादा सतर्क रहें
     
  7. ल्यूकेमिया, ब्रेन ट्यूमर जैसे कैंसर आनुवांशिक वजहों से भी होते हैं
     
  8. हड्डियों में दर्द होना
     
  9. बच्चा अचानक से लंगड़ाने लगे या लड़खड़ाने लगे, अचानक से चलना छोड़ दे
     
  10. बच्चा अगर ज्यादातर समय ये कहे कि उसके पीठ में दर्द हो रहा है
     
  11. 2 हफ्ते से ज्यादा समय से सिर में दर्द का होना
     
  12. सुबह-सुबह अक्सर उल्टी का होना
     
  13. पेट, सिर, गर्दन, या हाथ पैर पर अचानक चर्बी बढ़ना नजर आने लगे
     
  14. लगातार बुखार का होना, उदास रहना


क्या कहना है डॉक्टरों का पैरेंट्स से? Advice for Parents

एक्शन कैंसर हॉस्पीटल में सीनियर कंसल्टेंट व पीडियाट्रीक हेमेटो ऑन्कोलॉजी डॉक्टर ऊष्मा सिंह का कहना है ज्यादातर मामलों में जानकारी के अभाव में बच्चे को बीमारी के तीसरे या चौथे चरण में ट्रीटमेंट के लिए लाया जाता है। अगर बीमारी का पता जल्द लग जाए तो फिर बच्चे को बीमारी से मुक्त करने में आसानी होती है। नोएडा के जेपी अस्पताल में सीनियर कंसल्टेंट व सर्जिकल ओन्कोलॉजिस्ट डॉ नितिन लीखा के मुताबिक वयस्कों और बच्चों में होने वाले कैंसर में बहुत अंतर होते हैं। डॉ नितिन लीखा का कहना है कि अपने देश में कैंसर के कुल मरीजों में बच्चों की संख्या तकरीबन 3 से 5 फीसदी तक है। सबसे ज्यादा परेशानी ग्रामीण व पिछड़े इलाकों में है जहां अस्पताल और आधुनिक चिकित्सा सेवाओं का नितांत अभाव है। हालांकि इसके साथ ही अच्छी बात यह है कि कैंसर से जूझ रहे बच्चों के जीवित बचने के मामलों में पिछले 30 वर्षों में काफी सुधार हुआ है। बच्चों में कैंसर के तकरीबन 70 फीसदी मामले इलाज के योग्य हैं। बस जरूरत इस बात की है कि हम कैंसर के शुरुआती लक्षणों को नजरंदाज ना करें और जल्द से जल्द चिकित्सा शुरू करवाएं। जागरुकता से ही बचाव मुमकिन है इसलिए पहले आप खुद जागरुक बनें और दूसरों को भी जागरुक करें।

कैंसर क्या है और ये कैसे शुरू होता है?

मानव शरीर में कोशिकाओं के विभाजन की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है और इस प्रक्रिया पर शरीर का पूरा कंट्रोल रहता है। लेकिन जब बॉडी के किसी खास हिस्से की कोशिकाओं पर नियंत्रण नहीं हो पाता है तो वे बढ़ने शुरू हो जाते हैं। कैंसर से प्रभावित कोशिकाएं बढ़ने लगती है और वे ट्यूमर यानि गांठ के रूप में सामने आ जाते हैं। आमतौर पर हमारे शरीर में पाए जाने वाले इम्यून सिस्टम ऐसी कोशिकाओं को समाप्त कर देते हैं लेकिन कई बार होता है कि कैंसर की कोशिकाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता पर हावी हो जाते हैं। आप के लिए ये जानकारी भी महत्वपूर्ण है कि हर ट्यूमर कैंसर नहीं होता है। 


कैंसर किन कारणों से हो सकते हैं?

  • तंबाकू- कैंसर होने की मुख्य वजहों में से तंबाकू प्रमुख है। आंकड़ो के मुताबिक पुरुषों में कैंसर के करीब 60 फीसदी मामले मुंह और गले के कैंसर होते हैं। इसके अलावा फेफड़ों का कैंसर होने के पीछे भी तंबाकू है। खैनी, गुटखा, पान, पान मसाला, सिगरेट, बीड़ी, हुक्का वगैरह के माध्यम से लोग तंबाकू सेवन करने के एडिक्टेड बन जाते हैं। 
     
  • शराब- शराब का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से भी कैंसर होने का खतरा बना होता है। कुछ लोग शराब के साथ तंबाकू का सेवन भी करते हैं। शराब की वजह से लिवर, ब्रेस्ट कैंसर, मुंह, खाने की नली में कैंसर होने की प्रबल संभावनाएं बन जाती हैं।
     
  • मोटापा भी बन सकता है कैंसर की वजह- मोटापा बढ़ जाने की वजह से ब्लड कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्विक्स कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर हो सकता है।
     
  • फैमिली हिस्ट्री- अगर किसी के परिवार में किसी सदस्य को पूर्व में कैंसर हुआ है तो भी कैंसर होने की संभावना बढ़ सकती है। लेकिन इसके साथ ही ये भी जान लें कि ये जरूरी नहीं कि अगर माता-पिता में से किसी को कैंसर को हुआ है तो बच्चे को भी कैंसर होगा ही। 
     
  • शारीरिक गतिविधियों में सक्रिय ना रहना- जो लोग शारीरिक रूप से एक्टिव नहीं रहते हैं तो उनको कैंसर होने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों के मुताबिक प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे तक योग या एक्सरसाइज करना चाहिए। 
     
  • रेडियोएक्टिव किरणों के संपर्क में आने पर- एक्सरे, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड कराने के दौरान रेडियोएक्टिव किरणे हमारे शरीर में पहुंचते हैं। इनके प्रभाव से सेल्स की केमिकल गतिविधियां बढ़ जाती है। इसलिए जब जरूरी हो तब ही एक्सरे व सीटी स्कैन कराना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक साल में 2 से 3 बार से ज्यादा एक्सरे कराने से परहेज रखना चाहिए।  
     
  • प्रदूषण- वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में आप बखूबी जानते हैं। प्रदूषित हवा में मौजूद नाइट्रोडन ऑक्साइड, सल्फर डाई ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइट जैसे तत्व कैंसर की वजह बन सकते हैं। 

कैंसर से बचने के लिए क्या करना चाहिए?

  1. अपनी दिनचर्या को सही करें- कैंसर से बचने के लिए सबसे पहले अपनी डेली रूटीन यानि दिनचर्या को सही करें। रात में जल्दी सो जाएं और सूर्योदय से पहले जग जाने की आदत बहुत जरूरी है। अपने खाने-पीने व नाश्ते के टाइम टेबल को फिक्स करें और समय पर आहार लेते रहें। मौसमी फलों और सब्जियों को अपने डाइट चार्ट में जरूर शामिल करें।
     
  2. प्रकृति के नियमों के मुताबिक सभी मौसम का लुत्फ लें- हर मौसम का अपना महत्व होता है। चाहे सर्दी हो या गर्मी का मौसम, हमें प्रत्येक मौसम के मुताबिक खुद को ढ़ालने का प्रयास करना चाहिए। जैसे कि सर्दी के मौसम में ज्यादातर लोग हीटर चलाते हैं। हीटर के संपर्क में ज्यादा देर तक बने रहने से हमारे शरीर में खून की कमी हो सकती है। 
     
  3. अपने खान-पान का ख्याल रखें- शहरों की भागमभाग और व्यस्त लाइफस्टाइल के चलते लोग पैक्ड फूड, प्रिजर्व्ड फूड, व फास्ट फूड पर अत्यधिक निर्भर रहने लगे हैं। लेकिन इसके बहुत सारे नुकसान हैं। ज्यादा तेल-मसालेदार खाने की बजाय उबले हुए खाने को प्राथमिकता दें। नॉनवेज विशेषकर रेड मीट से परहेज रखें। ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें। ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें। प्रचुर मात्रा में पानी पीते रहें।
     
  4. मानसिक शांति है बहुत जरूरी- आपको अपने आसपास में बहुत कम लोग ही मिलेंगे जो तनावमुक्त रहते हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट पर भी नकारात्मक बातें ज्यादा देखने को मिलती है। आपने नोटिस किया होगा कि लोग प्रत्यक्ष संवाद करने से बचने लगे हैं। एक कमरे के अंदर भले 5 लोग बैठे हों लेकिन सब मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। बहुत अधिक तनाव को अपने ऊपर हावी ना होने दें, ध्यान रखें कि अगर आप नकारात्मक बातों के बारे में विचार करते रहेंगे तो फिर सकारात्मक सोच विकसित नहीं हो सकती है। अपने आसपास के माहौल को सकारात्मक तरीके से विकसित करें। दोस्तों व परिवार के संग समय व्यतीत करें।  

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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