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पेरेंटिंग

सिंगल पैरेंटिंग क्या भारतीय समाज में अपनाई जा सकती है?

Parentune Support
1 से 3 वर्ष

Parentune Support के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Feb 26, 2020

सिंगल पैरेंटिंग क्या भारतीय समाज में अपनाई जा सकती है
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

करियर, लिव इन रिलेशनशिप, तलाक के बढ़ते केस व आपसी मनमुटाव की वजह से आज भारत में सिंगल पैरेंट्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अकेले रहना बुरा नहीं है, लेकिन सिंगल पैरेंट्स बनकर आगे का सफर थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इससे न सिर्फ पैरेंट्स के सामने कई दिक्कतें आती हैं, बल्कि बच्चे भी सिंगल पैरेंटिंग में कई समस्याओं से जूझते रहते हैं। भारतीय समाज में सिंगल पैरेंटिंग घुस तो चुका है, लेकिन इसका सफलतापूर्वक निर्वहन बहुत कम देखने को मिलता है। इसकी सबसे बड़ी वजह सिंगल पैरेंट्स के सामने आने वाली तमाम चुनौतियां हैं।
 

सिंगल पैरेंट्स की समस्याएं

  1. अतीत से जंग – सिंगल पैरेंट्स को अपने अतीत से उबरने में, अतीत को भुलाने में तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। रोजाना अतीत को भुलाने में जंग लड़नी पड़ती है। इससे बच्चे की तरफ ठीक से ध्यान नहीं जा पाता।
     
  2. वित्तीय संकट – अधिकतर सिंगल पैरेंट्स परिवार की वित्तीय व अन्य जरूरतों के लिए लंबे समय तक काम करते हैं। यह परिवार चलाने और बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है। पर अकेले कमाने की वजह से कम इनकम और ज्यादा जरूरतें संतुलन को बिगाड़ देता है और वित्तिय संकट की वजह से कई तरह की परेशानी सामने आती है। एक बार को अकेले बच्चे को संभाला जा सकता है, लेकिन अकेले रहकर आर्थिक दिक्कतों का सामना करना मुश्किल होता है।
     
  3. भावनात्मक समस्याएं – सिंगल पैरेंट्स की ये भी एक समस्या है कि उनका बच्चा आत्मसम्मान की समस्या से ग्रसित हो सकता है। दरअसल बच्चा स्नेह की लालसा करते हैं, लेकिन एकल अभिभावक अपने व्यस्त कार्य़क्रम की वजह से बच्चे को समय नहीं दे पाते। इससे बच्चे के मन में नकारात्मकता घर कर जाती है।
     
  4. अच्छी परवरिश – बच्चे को अकेले संभालना, बच्ची की अच्छी परवरिश करना, बच्चे की फरमाइशों को पूरा करना, बच्चे के सवालों के जवाब देना आदि सिंगल पैरेंट्स के लिए बड़ी चुनौती होती है।

बच्चे पर भी पड़ता है असर
 

  1. मनोदशा की कमी – बच्चे को कामकाजी पैरेंट्स से पर्याप्त ध्यान नहीं मिल पाता। वहीं जब वह दूसरे बच्चे जिनके माता-पिता दोनों है से खुद की तुलना करता है, तो उसमें निराशा आती है।
     
  2. पढ़ाई में असफलता – सिंगल पैरेंट्स के लिए सभी जरूरतों को पूरा करने के साथ ही बच्चे की पढ़ाई पर निगरानी रखना मुश्किल होता है। ऐसे में ध्यान की कमी के कारण बच्चे की पढ़ाई में परफॉर्मेंस खराब हो जाती है।
     
  3. अटैकिंग बिहेवियर – कई बार बच्चे खुद को मां-बाप के अलगाव का कारण मानते हैं और खुद से घृणा करने लगते हैं। इससे उनका व्यवहार अटैकिंग हो जाता है।
     
  4. दोस्तों की कमी – सिंगल पैरेंट्स के कारण बच्चे को लगता है कि उसका कोई नहीं है और दोस्त कम होने के पीछे वह इसे भी एक कारण मानते हैं।
     
  5. नशे की लत – एक स्टडी के अनुसार सिंगल पैरेंट्स के बच्चों में नशे की लत का खतरा ज्यादा रहता है। बच्चे अकेलेपन की वजह से नशे को अपना सहारा बना लेते हैं। वह नशीली दवाओं, शराब व अन्य हानिकारक चीजों का सेवन करने लगते हें। 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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