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स्वास्थ्य

हकलाने (Stammering) की समस्या को कैसे करें दूर? जानिए क्या है सटीक उपाय

Prasoon Pankaj
1 से 3 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Apr 09, 2021

हकलाने Stammering की समस्या को कैसे करें दूर जानिए क्या है सटीक उपाय
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

क्लासरूम में सभी बच्चों को टीचर ने रीडिंग करने के लिए कहा। बच्चे बारी-बारी से रीडिंग कर रहे थे। कुणाल नाम के एक बच्चे की जब बारी आई तो वो थोड़ा अटक-अटक कर रीडिंग कर रहा था। उसको इस तरीके से रीडिंग करते हुए देखकर क्लास के सारे बच्चे टीचर के जाने के बाद उसका मजाक उड़ाने लगे। वो बच्चा उसके बाद अपने घर वापस लौटता है और अपने पेरेंट्स से कहता है कि अब वो स्कूल नहीं जाएगा। पेरेंट्स ने पूछा कि क्यों, तो उसका जवाब था कि मैं अटक-अटक कर बोलता हूं इसलिए सभी बच्चे मेरा मजाक उड़ाते थे। लेकिन इसके साथ ही वो बच्चा काफी प्रतिभाशाली था और उसकी रूचि डांस में कुछ ज्यादा थी। पेरेंट्स ने उस बच्चे को डांस का प्रशिक्षण दिलवाया और फिर वही बच्चा एक दिन सोनी टीवी के लोकप्रिय कार्यक्रम सुपर डांस चैप्टर 4 के मंच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए पहुंचता है। उस बच्चे की डांस कला को देखकर मशहूर अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी, निर्देशक अनुराग बासु और कोरियोग्राफर गीता कपूर ताज्जुब रह जाते हैं। ग्वालियर के रहने वाले कुणाल के माता-पिता इस पल को देखकर काफी भावुक हो जाते हैं। पेरेंट्स को रोते देखकर शो के होस्ट जब उनको मंच पर आमंत्रित करते हैं औऱ फिर उन्होंने अपना अनुभव शेयर किया कि मेरे बच्चा हकलाता है और इस वजह से लोग मजाक उड़ाते हैं। ये सब सुनकर शो के होस्ट उनका हौसला बढ़ाते हैं और कहते हैं कि बचपन के दिनों में हृतिक रोशन भी इस समस्या से ग्रसित थे लेकिन अब वे पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं, आपका बच्चा काफी टैलेंटेड है और इस बात का आपको गर्व होना चाहिए। 

इस वीडियो को देखकर मैं सोचने को मजबूर हो गया कि अगर किसी बच्चे के अंदर किसी प्रकार की शारीरिक विकृति है तो उसका मजाक उड़ाना कहां तक उचित है? क्या हम अपने बच्चों को शुरू से ही इस बात के लिए प्रेरित नहीं कर सकते हैं कि हमें किसी भी परिस्थिति में किसी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए औऱ एक दूसरे पर तंज नहीं कसना चाहिए। और ये समस्या सिर्फ कुणाल के साथ नहीं है,  स्टैमरिंग (Stammering) का अर्थ है हकलाना. ये एक तरह का स्पीच डिसऑर्डर है जिसमें लोगों को पता होता है कि उन्हें क्या बोलना है लेकिन वो पूरा शब्द या वाक्य एक बार में बोल नहीं पाते। द इंडियन स्टैमरिंग एसोसिएशन (TISA) के आंकड़ों के मुताबिक अपने देश में  तकरीबन 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को बोलने से संबंधित तकलीफ है। आंकड़ों के मुताबिक दुनियाभर में 36 करोड़ से ज्यादा लोगों को बोलने में तकलीफ यानि हकलाने की समस्या है। एक अनुमान के मुताबिक साल 2040 तक दुनियाभर में स्टैमरिंग की समस्याा से जूझ रहे लोगों की संख्या बढ़कर 45 करोड़ तक हो सकते हैं। 

हकलाने (Stammering) की समस्या को लेकर क्या कहना है एक्सपर्ट का

स्पीच थेरेपिस्ट डॉ विथिका कपूर के मुताबिक हकलाने और तुतलाने जैसी समस्याओं में तकरीबन 80 से 90 फीसदी मामलों को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। आमतौर पर देखा गया है कि 3-4 साल तक की उम्र में बच्चे साफ-साफ बोलना शुरू कर देते हैं लेकिन अगर आपको अपने बच्चे में बोलने से संबंधित परेशानी महसूस हो तो तत्काल अपने बच्चे को डॉक्टर से चेकअप करवाएं। डॉ विथिका कपूर के मुताबिक बच्चे का इलाज जितनी जल्दी शुरू की जाए उनमें सुधार होने की उम्मीदें और ज्यादा बढ़ जाते हैं।

तुतलाने और हकलाने में क्या मुख्य अंतर है?

आमतौपर लोग तुतलाने और हकलाने की समस्या को एक जैसा मान लेते हैं लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में बहुत फर्क होता है। हकलाने की समस्या में रूक-रूक कर बातें करना, एक ही शब्द को बार-बार बोलते रहना, तेज बोलना, बोलने के दौरान आंखें बंद कर लेना, बोलने के समय में होठों में कंपकपाहट होना या जबड़े का हिलना जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं जबकि तुतलाने में किसी शब्द या अक्षर के उच्चारण की समस्या का होना, साफ-साफ नहीं बोल पाना उदाहरण के तौर पर ‘र’ को ‘ड़’ या ‘ल’ उच्चारण करना जैसे लक्षण हो सकते हैं। 

हकलाने की मुख्य वजहें क्या हो सकते हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक हकलाने की वजहें अनेक हो सकते हैं जिनमें से कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं। 

  • हमारे शरीर में बहुत सारी मांसपेशियां होते हें जो दैनिक गतिविधियों को करने में मददगार साबित होते हैं। बोलने के दौरान भी कुछ मांसपेशियां सहयोग करते हैं, इन मांसपेशियों व जीभ पर कंट्रोल नहीं होने से भी हकलाने की समस्या हो सकते हैं।

  • आनुवांशिक कारणों जैसे कि अगर पेरेंट्स को ये समस्या है तो बच्चे में भी होने की आशंका बने रहते हैं।

  • न्यूरोलॉजिकल कारण जैसे कि बच्चे के दिमाग के बाएं भाग में किसी प्रकार की गड़बड़ी के होने 

  • तनाव, शारीरिक कमजोरी, डर, थकान या किसी बात को लेकर अपसेट होने पर भी हकलाहट का सामना करना पड़ सकता है।

  • कुछ लोग किन्हीं खास परिस्थितियों जैसे कि फोन पर या इंटरव्यू देने के दौरान हकलाने लगते हैं।

पेरेंट्स अपने बच्चे की कैसे कर सकते हैं मदद?

  1. आप अपने बच्चे के सामने हकलाने को लेकर अपनी चिंता जाहिर ना करें, होता ये है कि अगर बच्चा हकलाता है तो पेरेंट्स परेशानी में आकर बच्चे को डांटते हैं या कुछ ऐसा कहने लगते हैं कि जिससे बच्चा चिंतित हो जाता है। बच्चे के सामने सहज भाव से इस पर चर्चा करें।

  2. आप अपने बच्चे को एक-एक शब्द बोलने के लिए कहें, जब वो उस शब्द को सही तरीके से बोलने लगे तब दूसरा शब्द सिखाएं

  3. बच्चा अगर बातचीत के दौरान हकला रहा है तो उसको पहले बोल लेने दें औऱ इस बीच में उसको टोके नहीं। इस दौरान आप उस पर गुस्सा कतई ना करें।

  4. आप अपने बच्चे को ये एहसास कराएं कि आप उसकी समस्या को समझ रहे हैं और आप इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं। अपने बच्चे के लिए अलग से समय निकालें और प्यार से समझाएं

  5. बच्चे के सामने उसकी तारीफ करें अगर वो सुधार लाने का प्रय़ास कर रहा है।

  6. बच्चे को दूसरों की बातें गौर से सुनने के लिए प्रेरित करें, उसको सही से सुनने की आदत होगी तो वो भी सही से बोलने का प्रयास करेगा।

  7. स्पीच थेरेपिस्ट की लें मदद

जो बच्चे हकलाने की समस्या का सामना कर रहे हैं उनको 5 साल की उम्र तक थेरेपी करा देने का सुझाव दिया जाता है। 

हकलाने की समस्या को दूर करने के लिए ये हैं कुछ घरेलू नुस्खे

  1. आंवला कई गुणों से भरपूर है। प्रतिदिन हरे या सूखे आंवले के चूर्ण का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।

  2. एक चम्मच मक्खन के साथ बच्चे को प्रतिदिन 5-6 बादाम का सेवन कराएं

  3. एक चम्मच मक्खन के साथ एक चुटकी काली मिर्च का मिश्रण बनाकर बच्चे को खिलाने से भी लाभ मिल सकता है।

  4. 10 बादाम, 10 काली मिर्च के साथ मिश्री के कुछ दानों को मिलाकर पाउडर बना लें और इसका सेवन 10 दिन तक कराने से भी लाभ मिल सकता है।

  5. दालचीनी के तेल की मालिश जीभ पर करने से भी जुबान साफ हो सकते हैं।

  6. अपने बच्चे को सोने से पहले 2 छुहारे खिलाएं और इसके बाद कम से कम 2 घंटे तक पानी नहीं पीने दें।

हालांकि ये सब घरेलू उपाय है जो कुछ हद तक मददगार हो सकते हैं लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी है कि स्पीच थेरेपिस्ट की मदद से थेरेपी जितनी जल्दी हो शुरू करवाएं।

इसके अलावा योग विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है। जीभ का एक्सरसाइज करने से भी लाभ मिल सकता है। शंख बजाने और गुब्बारे फुलाने से जीभ की मांसपेशियों की ताकत में इजाफा होता है। 

अन्य उपाय जिनसे हकलाने की समस्या से मिल सकता है निजात

  • धीरे बोलें- आप अपने बच्चे को तेज बोलने की बजाय धीरे धीरे बोलने की आदत विकसित करें। जल्दी जल्दी बोलने से हकलाहट की समस्या बढ़ सकती है इसलिए बच्चे को कहें कि वो आराम से और धीरे-धीरे बोले। 

  • बोलकर पढ़ने के लिए कहें- अपने बच्चे को किताब या अखबार बोल-बोलकर पढ़ने के लिए कहें। इस दौरान आप बुक पर या अखबार में उस जगह पर मार्क लगा दें जहां कुछ सेकेंड रुक कर फिर आगे पढ़ना है।

  • शीशे के सामने बोलें- अपने बच्चे को आप शीशे के सामने खड़े होकर बोलने का सुझाव भी दे सकते हैं। इससे आपके बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ सकता है। 

  • अपने बच्चे को पॉजिटिव बनाए रखें- आप अपने बच्चे के अंदर सकारात्मक सोच विकसित करें और इसके साथ ही कुछ ऐसे उदाहरण भी प्रस्तुत करें जिनको सुनकर प्रेरणा मिल सके।

इस प्रकार के कुछ उपायों को अपनाकर हकलाहट की समस्या को दूर किया जा सकता है। अपने स्पीच थेरेपिस्ट के द्वारा बताए गए उपायों का अवश्य पालन करें। 

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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