गर्भावस्था

कितना जरूरी है स्टेम सेल बैंकिंग

Lakshmi Kapoor Verma
गर्भावस्था

Lakshmi Kapoor Verma के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 26, 2018

कितना जरूरी है स्टेम सेल बैंकिंग

आजकल मेडिकल साइंस की दुनिया में एक शब्द बहुत प्रचलित हो रहा है। ये शब्द है स्टेम सेल बैंकिंग। इस शब्द को आपने भी कई बार सुना होगा। इसको लेकर कई लोगों के मन में जिज्ञासा है कि आखिर ये होता क्या है। दरअसल मेडिकल साइंस में स्टेम सेल बैंकिंग एक खास ऑप्शन है। आंकडों के अनुसार इसकी मदद से करीब  80 बीमारियों का इलाज संभव है। भारत में भी इलाज की यह टेक्निक तेजी से पैर पसार रही है। स्‍टेम सेल बैंकिंग ने मानवीय जीवन को काफी आसान बना दिया है। अब किसी दुर्घटना आदि व किसी अन्य इमरजेंसी में किसी व्‍यक्ति की जान को बचाना इससे काफी आसान हो गया है।

स्टेम सेल बैंकिंग के बारे में बात करने से पहले यह समझना जरूरी है कि आखिर स्टेम सेल है क्या। स्टेम सेल दरअसल बहुकोशिकीय जीवों में पाई जाने वाली उन कोशिकाओं को कहते हैं, जिन्हें शरीर ने कोई विशेष काम करने के लिए नहीं दिया है। एक स्टेम (तना) जिस तरह शाखाएं, पत्तियां, कलियां, फूल और बीज बना सकता है, उसी तरह स्टेम सेल्स में भी शरीर की सारी कोशिकाओं की भूमिका निभाने की क्षमता होती है। स्टेम सेल शरीर का कच्चा माल है, जिससे 300 प्रकार की कोशिकाएं बन सकती हैं। स्‍टेम सेल्स कोई काम न होने पर वर्षों तक अंगों में सुप्तावस्था में पड़ी रहती हैं। जरूरत पड़ने पर विभाजन द्वारा इनके जरिये अनगिनत कोशिकाओं का निर्माण किया जा सकता है।

क्या है स्टेम सेल बैंकिंग और क्या है महत्व

स्टेम सेल बैंकिंग भी बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा मुहैया कराने की दिशा में किया गया एक प्रयास है। स्टेम सेल्स शरीर की वे कोशिकाएं होती हैं जो विभाजित होकर अन्य प्रकार की कोशिकाओं का निर्माण करती हैं। स्टेम सेल बैंकिंग के तहत इन कोशिकाओं को विशेष पस्थितियों में  (बेहद कम तापमान पर लिक्विड नाइट्रोजन के वेपर फेस के साथ) संरक्षित किया जाता है। भविष्य में कुछ विशेष स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने पर ये सेल्स उपचार के काम आते हैं।

कहां कहां कारगर

आंकडों के अनुसार स्टेम कोशिकाओं की मदद से 80 बीमारियों का इलाज हो सकता है। इनमें मुख्य तौर पर विभिन्न प्रकार के पीडियट्रिक कैंसर, एप्लास्टिक एनीमिया, टाइप वन (जुवेनाइल) डायबिटीज, पीडियट्रिक ब्रेन इंजरी, ल्यूकीमिया और लिंफोमा जैसे कुछ विशेष कैंसर, मेटाबॉलिज्म संबंधी समस्याएं, थैलेसीमिया मेजर जैसे ब्लड डिसऑर्डर्स आदि शामिल हैं। अगर किसी के परिवार में इन बीमारियों का इतिहास रहा है तो उसे अपने परिवार में पैदा होने वाले नवजात शिशु के कॉर्ड ब्लड सेल्स (गर्भनाल रक्त कोशिकाओं) का संरक्षण जरूर करवाना चाहिए।

दो तरह की बैंकिंग

स्टेम सेल बैंकिंग दो प्रकार की होती है। पहले में - पब्लिक व प्राइवेट। पब्लिक स्टेम सेल बैंकिंग के तहत अभिभावक स्वेच्छा से अपने शिशु की गर्भनाल रक्त कोशिकाएं बैंक को डोनेट करते हैं। इनकी मदद से किसी भी जरूरतमंद व्यक्ति का इलाज किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर प्राइवेट स्टेम सेल बैंकिंग के तहत जिस शिशु की गर्भनाल रक्त कोशिकाएं स्टोर की जाती हैं, उसके या उसके परिवार के किसी सदस्य के इलाज के लिए उन सेल्स का इस्तेमाल किया जाता है। भारत में एम्स जैसे कुछ विशेष मेडिकल संस्थानों में पब्लिक स्टेम सेल बैंक हैं। वहीं प्राइवेट स्टेम सेल बैंकिंग की सुविधा कई जगह उपलब्ध है।

कौन-कौन चुन सकता है ये बैंकिंग

कोई भी पैरेंट्स अपने बच्चों की सेफ्टी के लिए स्टेम सेल बैंकिंग चुन सकते हैं। वयस्कों के स्टेम सेल्स को भी संरक्षित किया जा सकता है, लेकिन वे उतने उपयोगी नहीं होते जितने एक नवजात शिशु के जन्म के समय एकत्रित कॉर्ड ब्लड स्टेम सेल्स। इन सेल्स में जरूरत के हिसाब से बदलाव किया जा सकता है, जबकि वयस्कों के स्टेम सेल्स में बदलाव की संभावना नहीं होती।

इसलिए भी है इसका महत्व

  • हर 200 लोगों में से एक को अपने जीवन में स्टेम सेल प्रत्यारोपण की जरूरत हो सकती है।
  • भारत में 10 सबसे  सामान्य कैंसर में से एक नॉन हाजकिंग्स लिम्फोमा का इलाज स्टेम सेल्स से हो सकता है।
  • भारत में बचपन में होने वाले पांच सबसे समान्य कैंसर में से 2 कैंसर ल्यूकेमिया और लिंफोमा का इलाज भी स्टेम सेल्स से हो सकता है। 

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