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शिक्षण और प्रशिक्षण

स्कूल फीस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश, अब जानिए कितनी देनी होगी स्कूल फीस

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 04, 2021

स्कूल फीस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिए निर्देश अब जानिए कितनी देनी होगी स्कूल फीस
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

आपको तो याद ही होगा, पिछले साल जब कोरोना की पहली लहर सामने आई थी तब देश भर में एहतियात के तौर पर सबसे पहले स्कूल-कॉलेजों को बंद किया गया था। उसके बाद तकरीबन साल भर स्कूल बंद रहे लेकिन इस साल यानि 2021 में मार्च महीने में स्कूलों को फिर से खोलने की कवायद शुरू की गई लेकिन तभी कोरोना की दूसरी लहर ने जोरदार दस्तक दे दी। उसके बाद एक बार फिर से सभी स्कूलों को बंद करना पड़ा। पेरेंट्स औऱ स्कूल प्रशासन के बीच स्कूल फीस को लेकर तकरार का माहौल बना रहा, पेरेंट्स की दलील ये थी कि जब स्कूल खुल नहीं रहें हैं और उनके बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है तब उनसे पूरी फीस क्यों वसूली जा रही है। वहीं दूसरी तरफ स्कूल प्रशासन के भी अपने तर्क थे। मामला कोर्ट तक जा पहुंचा, सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को राजस्थान के शैक्षणिक सत्र 2020-21 स्कूल फीस के मसले पर सुनवाई हुई स्कूल प्रशासन और अभिभावकों को कोर्ट की ओर से कई निर्देश दिए गए। फीस को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जो प्रमुख बातें कही गई उसमें -

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के 36,000 गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को सोमवार को निर्देश दिया कि वे शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए छात्रों से सालाना 15 प्रतिशत कम फीस वसूल करें।
     
  • फीस का भुगतान न होने पर किसी भी छात्र को वर्चुअल या भौतिक रूप से कक्षा में शामिल होने से न रोका जाए और न ही उनका परिणाम रोका जाए।
     
  • सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा जिसमें राजस्थान विद्यालय (शुल्क नियमन) कानून 2016 और स्कूलों में फीस तय करने से संबंधित कानून के तहत बनाए गए नियम की वैधता को दी गई चुनौती को खारिज कर दिया गया था।
     
  • शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए छात्रों या अभिभावकों द्वारा शुल्क का भुगतान छह बराबर किस्तों में किया जाएगा।
     
  • महामारी की वजह से लागू पूर्ण लॉकडाउन की वजह से एक अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसका व्यक्तियों, उद्यमों, उपक्रमों और राष्ट्र पर गंभीर असर पड़ा।
     
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि स्कूल अपने छात्रों को और छूट देना चाहें तो दे सकते हैं।
     
  • अपीलकर्ता (स्कूल) अपने छात्रों से शैक्षणिक सत्र 2019- 20 के लिए 2016 के कानून के तहत निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप शुल्क वसूल करें, लेकिन शैक्षणिक सत्र 2020 -21 के लिए छात्रों द्वारा इस्तेमाल न की गईं सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए 15 प्रतिशत कम फीस वसूल करें

हम आपको बता दें कि राजस्थान हाई कोर्ट ने हाल ही में फैसला दिया था कि निजी स्कूल ट्यूशन फीस 70 फीसदी ही लें। हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ निजी स्कूल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे और पूरी फीस लिए जाने की अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी गई है साथ कोर्ट ने पैरेंट्स की याचिकाओं को भी खारिज कर दिया है।

हमने भी इस मुद्दे पर कुछ पेरेंट्स से संपर्क साधा था औऱ उनसे कुछ सवाल पूछे। इस विषय पर दिल्ली, बैंगलोर, गुड़गांव समेत अन्य शहरों के पेरेंट्स ने क्या जवाब दिया ये आप नीचे पढ़ सकते हैं।

सवाल- क्या आप अभी अपने बच्चे का स्कूल फीस उतना ही दे रही हैं जितना कोविड काल से पहले?

इस सवाल का जवाब देते हुए दिल्ली की एक पेरेंट्स ने कहा कि स्कूलों ने 5 हजार रुपये फीस बढ़ा दिया है। बैंगलोर की एक पेरेंट्स का कहना है कि हां वो उतना ही फीस दे रही हैं जबकि प्रत्येक साल 10 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी जाती थी। गुड़गांव की एक पेरेंट्स का कहना है कि उन्होंने कोविड काल में स्कूल का सालाना फीस नहीं भरा है। 

सवाल- अभी ज्यादातर स्कूलों में रिमोट लर्निंग प्रक्रिया चल रही है और ऐसे में पूरी स्कूल फीस वसूल करने के खिलाफ कई जगहों पर पेरेंट्स प्रदर्शन कर रहे हैं। इसपर आपकी क्या राय है?

उत्तर- इस सवाल का जवाब देते हुए दिल्ली की एक पेरेंट्स ने कहा कि हां ये बिल्कुल सही है। बैंगलोर की पेरेंट्स ने कहा कि स्कूलों को भी अपने शिक्षकों व अन्य स्टाफ की सैलरी देनी पड़ती है, हालांकि मैं मानता हूं कि बहुत सारे पेरेंट्स की आमदनी में काफी कमी हो गई है लेकिन इसके लिए स्कूल को दोषी नहीं माना जा सकता है। गुड़गांव की पेरेंट्स का मानना है कि प्रदर्शन बिल्कुल जायज है क्योंकि स्कूल प्रशासन इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहा है।

सवाल- अगर स्कूल पूरी तरह से खुल जाते हैं तो क्या आप अपने बच्चे को स्कूल भेजना शुरू कर देंगी अगर नहीं तो क्यों नहीं और आप किन शर्तों पर अपने बच्चे को स्कूल भेजना चाहेंगी? 

जवाब- दिल्ली की पेरेंट्स ने कहा कि जब तक सभी वैक्सीनेटेड नहीं हो जाते हैं तब तक अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजेंगी। बैंगलोर की पेरेंट्स का कहना है कि हां वो नए एकेडमिक ईयर में बच्चे को स्कूल भेजना पसंद करेंगी क्योंकि अब अधिकांश लोग अपने काम पर लौट रहे हैं और अपने बच्चे के साथ भी लोग आना जाना कर रहे हैं। स्कूल भी एहतियात जरूर बरतेंगे और बच्चे भी सावधानियां रखेंगे। गुड़गांव की एक पेरेंट्स ने जवाब दिया कि जब तक सभी बच्चे वैक्सीनेटेड नहीं हो जाते हैं तब तक वो बच्चे को स्कूल नहीं भेजना पसंद करेंगी क्योंकि उन्हे पूरा भरोसा नहीं है कि स्कूलों मेे सोशल डिस्टेंसिंग अच्चे से पालन हो पाएगा।

सवाल- पिछले 9-10 महीने से रिमोट लर्निंग प्रक्रिया में आपको क्या लगता है कि बच्चा अच्छे से सीख रहा है?

जवाब- दिल्ली की पेरेंट्स का मानना है कि बहुत अच्छे से सीख नहीं रहा है। बैंगलोर की पेरेंट्स का मानना है कि बच्चे इतनी देर स्क्रीन पर फोकस नहीं कर पाते हैं और सामने बैठकर टीचर जिस तरीके से पढ़ा सकते हैं वो रिमोट लर्निग में संभव नहीं है। गुड़गांव की पेरेंट्स का कहना है रिमोट लर्निंग बहुत कारगर नहीं है।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

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