पेरेंटिंग गर्भावस्था

सेररोगटे प्रेगनेंसी से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातें

Anubhav Srivastava
गर्भावस्था

Anubhav Srivastava के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया May 27, 2018

सेररोगटे प्रेगनेंसी से जुडी कुछ महत्वपूर्ण बातें

सरोगेट प्रेगनेंसी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

 

हमारे आस-पास बहुत से ऐसे शादी-शुदा लोग हैं जिनकी किस्मत में संतान सुख नहीं है और बहुत सी माताओं की कोख किसी न किसी वजह से सूनी है। ऐसे लोगों के लिए सरोगेसी एक जरिया है जिससे संतान पाने के उनके अरमान पूरे हो सकते हैं और वे भी आम लोगों की तरह माता-पिता होने का सुख उठा सकते हैं।

 

सरोगेसी क्या है?

सरोगेसी का शाब्दिक अर्थ है ‘किराए की कोख’। इसमें कोई महिला, ऐसे बेऔलाद माता-पिता को अपनी कोख को किराए पर देकर उनके लिए बच्चा पैदा करने का समझौता करती है जो किसी कमी की वजह से खुद बच्चा पैदा कर पाने के काबिल नहीं हैं या किसी वजह से मां के पेट में गर्भ न ठहरता हो या आईवीएफ (परखनली शिशु) तकनीक भी कामयाब न हो पा रही हो।

 

इस प्रक्रिया के वैज्ञानिक और तकनीकी पक्ष की बात की जाए तो सरोगेसी वह व्यवस्था है जिसमें कोई महिला ‘सहायताकारी पुनरुत्पादक तकनीक’ (Aide Reproductive Technology) के जरिए एक ऐसा गर्भ धारण करने को तैयार होती है जिसमें उसका अंडाणु नहीं होता है।

 

बच्चा पैदा करने के इस तरीके को सरोगेसी और जो महिला किसी और माता-पिता के बच्चे को अपने गर्भ से जन्म देने को तैयार हो जाती है उसे ‘सरोगेट मदर’ के नाम से जाना जाता है और प्रसव के बाद सरोगेट मदर को अपने गर्भ से उत्पन्न बच्चे को उन माता-पिता को सौंपना होता है जिनके लिए वह गर्भ धारण करती है।

 

सरोगेसी दो प्रकार की होती है-

 

1. परंपरागत या ट्रेडिशनल सरोगेसी

परंपरागत सरोगेसी में पिता के शुक्राणुओं को किसी अन्य महिला के अंडाणुओं के साथ गर्भाशय में रोपित किया जाता है। इसमें पैदा होने वाली संतान का अनुवांशिक या जैनेटिक संबंध सिर्फ पिता से होता है।

 

2. गर्भावधि या जेस्टेशनल सरोगेसी

इस तरीके में माता-पिता के अंडाणु व शुक्राणुओं का परखनली विधि (आईवीएफ) के जरिए भ्रूण बनाकर इसे सरोगेट माता की बच्चेदानी में रोपित कर दिया जाता है।

 

इस विधि में पैदायशी बच्चे का अनुवांशिक या जैनेटिक संबंध, जन्म देने वाली महिला से नहीं होता क्योंकि इस तरीके में सरोगेट मां के अंडाणुओं का इस्तेमाल नहीं किया जाता और जैविक रूप से बच्चे का संबंध अंडाणु देने वाले या इच्छित माता-पिता से ही होता है।

 

सरोगेसी के बारे में भारतीय नजरिया

एक रिपोर्ट के अनुसार हमारा देश सरोगेसी के जरिए संतान पैदा करने में सबसे आगे है। इसकी वजह है कि भारत में निःसंतान माता-पिता के लिए किसी अन्य महिला की कोख को किराए पर लेना दूसरी जगहों की अपेक्षा सस्ता है और इसलिए विदेशों में रहने वाले बेऔलाद माता-पिता के लिए किराए कोख पाने के लिए भारत एक उपयुक्त जगह है।

 

हालांकि सरोगेट मां बनने को लेकर कोई तयशुदा नियम नहीं हैं लेकिन जानकारों के मुताबिक इन बातों पर गौर किया जाना जरूरी है-

  • सरोगेसी मां बनने के लिए तैयार महिला की उम्र कम से कम 21 साल और उसका शारीरिक रूप से सेहतमंद होना जरूरी है।
  • सरोगेसी मां बनने के लिए तैयार महिला पहले भी कम से कम एक बार स्वस्थ बच्चे को जन्म दे चुकी हो जिससे वह गर्भावस्था और प्रसव के इलाज संबंधी बातों से अच्छी तरह वाकिफ हो और गर्भस्थ शिशु के साथ भावनात्मक संबंध स्थापित कर सके।
  • सरोगेसी माता का मनोवैज्ञानिक परीक्षण में सफल होना जरूरी है ताकि पता चल सके कि वह गर्भावस्था के दौरान डॉक्टरी परामर्श कर पाने, तय समय पर जांच कराने, दवाएं लेने और गर्भावस्था के दौरान की जाने वाली सावधानी का पालन करने में सक्षम है
  • गर्भावस्था में सरोगेट मां का किरदार और जिम्मेदारियों के बारे में लिखित समझौता जरूरी है जिसमें जन्म के पूर्व देखभाल और पैदायशी बच्चा उसके असल मां-बाप को सौंपने के लिए सहमति हो।

 

जहां एक ओर सरोगेसी ने निःसंतान लोगों को औलाद सुख पाने के सपने को साकार किया है वहीं दूसरी ओर कई तरह की नैतिक, मानवीय, आर्थिक, चिकित्सकीय एवं राजनीतिक  विवाद भी पैदा किए हैं।

 

भारत सरकार द्वारा पास किए गए सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 में यह साफ किया गया है कि गैर शादी-शुदा पुरुष या महिला, अकेले या लिव-इन रिलेश्नशिप (बिना शादी किए साथ में रहने वाले जोड़े) में रहने वाले और समलैंगिक जोड़े अब सरोगेसी के जरिए औलाद पाने के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा यदि कोई माता-पिता यदि सरोगेसी के जरिए संतान सुख पाना चाहते हैं तो सिर्फ यह अपनी पारिवारिक/रिश्तेदार महिला की सरोगेसी के जरिए ही मुमकिन है न कि किसी बाहरी महिला के द्वारा।

 

यदि आप भी सरोगेसी अपनाने या इसके जरिए संतान सुख पाने के इच्छुक हैं तो इस बारे में किसी अच्छे परामर्श केन्द्र से संपर्क करें।

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