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कैसे सिखाये अपने बच्चो को सिविक सेन्स

Preeti
7 से 11 वर्ष

Preeti के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jul 26, 2018

कैसे सिखाये अपने बच्चो को सिविक सेन्स

 

बच्चो के व्यक्तित्व के निर्माण के लिए आपको उसकी शिक्षा – दीक्षा ,  अच्छी आदतों तथा संस्कारो के साथ - साथ सिविक सेन्स को बचपन से ही उनके अंदर डालना चाहिए , तभी बड़े होकर वह एक अच्छा इंसान बनेगे और अपने देश का एक अच्छा नागरिक बनेगे, क्योंकि एक संस्कारी , और बुद्धिमान सिविक सेन्स वाला बच्चा ही आगे चल कर एक अच्छा नागरिक बनता हैं।आइये बताते है कैसे सिखाये बच्चो को सिविक सेन्स|


सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा -- बच्चो को सिखाये की वो सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखे जैसे की सड़क ,ट्रेन आदि को गन्दा न करे ,प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और उसको साफ सुथरा रखने में मदद करे पेड़-पोधे न तोड़े आदि |

ईमानदारी और सच्चाई  -- अपने बच्चे के अंदर सत्य बोलने की आदत डालनी चाहिए इसके लिए माता -पिता को स्वयं भी इस रास्ते पर चलना होगा। ईमानदारी की आदत डालनी होगी उनको यह बताना होगा की सत्य और ईमानदारी के रास्ते पर चलने पर ही आगे बढ़ा जा सकता हैं क्योंकि ईमानदारी की नीव बहुत मजबूत होती हैं। आगे चलकर कोई भी आप के बच्चे को पथ - भ्रष्ट नहीं कर सकता हैं। इसके लिए आप उसे किसी कहानी के  माध्यम से समझा सकते हैं। जैसे राजा हरिश्चंद्र की कहानी।

संविधान का पालन-- प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्र गान का आदर करें और अगर ये सारी चीजे बच्चो को बचपन से ही सीखनी चाहिए तभी बड़े होने पर वो इसका मूल्य समझेंगे |

मदद करने की आदत  -- अपने बच्चे के अंदर सहयोग और दूसरों की मदद करने की भावना का संचार करना चाहिए। यह आदत बचपन से ही पड़नी चाहिए। एक माता - पिता होने के नाते आप अपने बच्चे को छोटे पर से ही अपने साथ काम पर लगाए या उसको बताते रहे की परिवार में सभी काम एक दूसरे के मदद से ही संभव हैं। धीरे - धीरे एक दूसरे की मदद करना उसके आदत में शामिल हो जाएगा और वह बाहर वालो के साथ भी यही व्यवहार करेगे ।

कर्तव्यनिष्ठा की भावना -- अपने बच्चे में यह संस्कार डाले की वह कर्तव्यनिष्ठ हो। प्रत्येक व्यक्ति का अपने परिवार के प्रति , देश के प्रति , अपने गुरु के प्रति , अपने स्कूल के प्रति , अपने बड़ो और छोटो के प्रति अलग - अलग कर्तव्य होते हैं जिसे , उसे निभाना पड़ता हैं।

सभी लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण करे -- प्रत्येक बच्चे के अंदर यह नैसर्गिक गुण होना चाहिए की वो सभी के साथ प्रेम से रहे। आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना के बल पर वह अपने परिवार , विद्यालय और समाज में प्रतिष्ठित स्थान पा सकता हैं। सभी उसे पसंद करेंगे और वह सभी के दिलों पर राज करेगा। उसे सभी के प्रति सहानभूति और करुणा की भावना  भी रखनी चाहिए। जैसे - गरीब ,बेसहारा , अनाथ , अपंग आदि।

देश के प्रति सम्मान -- प्रत्येक बच्चे के अंदर देश भक्ति की भावना होनी चाहिए।बचपन से ही बच्चे के अंदर यह संस्कार डाले की उसका सबसे पहला कर्त्तव्य अपने देश के प्रति हैं उसके अंदर देश के प्रति समर्पण की भावना होनी चाहिए। उसे प्रत्येक पल अपने देश के प्रति सेवा करने के लिए तत्पर होना चाहिए , हो सके तो उसे सैन्य शिक्षा के लिए प्रेरित करे। देश - भक्ति की कविता और कहानियाँ सुनाये। आदर्श व्यक्तियों के जीवन - चरित्र के बारे में जानने के लिए जागरूक करे। 

 सहनशक्ति -- आज - कल के दौर में बच्चों के पास सहनशक्ति का अभाव हैं , इस लिए माता -पिता होने के नाते आप अपने बच्चे के अंदर पेशेंस रखने की आदत डाले क्योंकि उसके आगे के जीवन के लिए यह गुण होना आवश्यक हैं। उसको यह सिखाये की छोटे - छोटे बातो पर वह उग्र न हो और जीवन के प्रति वह सकारात्मक रुख रखें।

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