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14 साल का बच्चा बना ग्रैंडमास्टर, बच्चे के कैरियर चयन में पेरेंट्स कैसे कर सकते हैं मदद?

Prasoon Pankaj
3 से 7 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jan 04, 2021

14 साल का बच्चा बना ग्रैंडमास्टर बच्चे के कैरियर चयन में पेरेंट्स कैसे कर सकते हैं मदद
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

शतरंज के खेल में ग्रैंडमास्टर का खिताब हासिल करना हर खिलाड़ी का सपना होता है, लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि महज 14 साल 9 महीने की उम्र का कोई बच्चा ग्रैंडमास्टर बन सकता है? ये अविश्वसनीय जरूर है लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की इस सच का साकार करने का काम किया है भारत के लियोन मेंडोंका (Leon Mendonca) ने। लियोन गोवा के रहने वाले हैं और वे अब देश के 67वें ग्रैंडमास्टर बन चुके हैं। 

लियोन मेंडोंका की उपलब्धि

14 साल के लियोन मेंडोंका और उनके पिता कोरोना महामारी के बाद लॉकडाउन के दौरान मार्च से ही यूरोप में फंसे रह गए थे। 

  • अक्टूबर में रिजो शतरंज जीएम राउंड रॉबिन में पहली बार मेंडोंका ने ग्रैंडमास्टर हासिल किया था।

  • नवंबर में बुडापेस्ट में दूसरा और उसके बाद अब इटली में वेरजानी कप में तीसरा नॉर्म हासिल किया

  • इटली में हुए प्रतियोगिता के दौरान वे यूक्रेन के विताली बर्नाडस्की के बाद दूसरे स्थान पर रहे

  • मेंडोंका ने मार्च से लेकर दिसंबर 2020 तक कुल 16 टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और अब उनकी ELO रेटिंग बढ़कर 2544 हो चुकी है। 

बच्चे का कैरियर चुनाव में पेरेंट्स की भूमिका

ग्रैंडमास्टर लियोन मेंडोंका ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। आप जानते हैं कि बच्चे के प्रथम गुरु उनके माता पिता ही होते हैं। ये माता पिता ही तो होते हैं जो बच्चे को पहली बार चलना, पहली बार बोलना और पहला अक्षर ज्ञान भी तो सिखाते हैं। पेरेंट्स बच्चे को सही राह पर चलना सिखाते हैं। बच्चे के कैरियर चयन में भी पेरेंट्स की अहम भूमिका होती है। अगर आपने अपने बच्चे की रूचियों और उनकी हॉबीज के बारे में अच्छे से जान लिया औऱ फिर उनको सही प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया तो यकीन मानिए आपका बच्चा भविष्य में बहुत बेहतर कर सकता है।

  1. बच्चे की रूचि के बारे में जानने का प्रयास करें- जरूरी नहीं कि सभी बच्चे पढ़ाई में बहुत होशियार हों, कुछ बच्चे की रूचि स्पोर्टस् में तो कुछ कि आर्ट और अन्य गतिविधियों में भी हो सकती है। लियोन मेंडेंका की इस कामयाबी ने एक औऱ बात सिद्ध कर दिया है कि स्पोर्ट्स का मतलब सिर्फ क्रिकेट नहीं होता है बल्कि और अन्य गेम्स भी हो सकते हैं। आप सबसे पहले इस बात को नोटिस करें कि आपका बच्चा किस काम को बड़े मनोयोग से करता है। आपका बच्चा अगर पेंटिंग करने में रूचि दिखाता है तो उसकी हॉबी में अच्छे से ट्रेनिंग दिलवाएं।

  2. भविष्य को देखते हुए चयन करें- पेरेंट्स होने के नाते यकीनन आप अपने बच्चे के भविष्य के बारे में गंभीरतापूर्वक विचार करते होंगे। आप इसके बारे में जरूर विशेषज्ञों से जानकारी लें कि किसी क्षेत्र विशेष में क्या-क्या संभावनाएं हो सकते हैं। 

  3. दिखावे पर नहीं जाएं- कई बार होता है कि आपके किसी सगे संबंधी या दोस्तों के बच्चे किसी काम में बहुत बेहतर परफॉर्म करते होंगे तो इसका कतई ये मतलब नहीं कि आप अपने बच्चे को वही काम करने के लिए दबाव बनाएं। बच्चे को अपनी हॉबी का चयन करने की स्वतंत्रता दें। मान लीजिए कि कोई बच्चा डांस बहुत अच्छा करता है तो हो सकता है कि दूसरे बच्चे का डांस करने में उतना मन नहीं लगता हो। यह भी मुमकिन है कि आपके बच्चे को सिंगिंग में अभिरूचि हो। तो कुल मिलाकर हर वो काम जो आपका बच्चा दिल से करता है उसको वही करने दें।

  4. उचित प्रशिक्षण दिलवाएं- अगर आपको अपने बच्चे की हॉबी के बारे में जानकारी मिल गई है तो उसके बाद अब आपका अगले लेवल का काम शुरू होता है। ये बहुत जरूरी है कि आप अपने बच्चे को सही तरीके से प्रशिक्षण दिलवाएं। बच्चे को सही कोच मिल जाए तो आपका आधा काम सही हो सकता है। उदाहरण के तौर पर सचिन तेंडुल्कर को बचपन में उनके गुरु रमाकांत अचरेकर नहीं मिले होते तो शायद आज क्रिकेट को सचिन नहीं मिल पाता।

आप अपने बच्चे का सही करियर चुनने में मदद करें लेकिन उन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डालें। बच्चे के साथ संवाद करें, उनसे जानने का प्रयास करें कि वे क्या करना चाहते हैं।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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