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क्या है प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स (Cravings) के कारण और कैसे पाएं इस पर नियंत्रण?

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Apr 07, 2021

क्या है प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स Cravings के कारण और कैसे पाएं इस पर नियंत्रण
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स (Cravings) के बारे में आपने कई बार सुना होगा। गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान यह आम बात है, लेकिन कई गर्भवती महिलाओं में इसे लेकर कई तरह के सवाल होते हैं और इसे लेकर वह परेशान भी हो जाती हैं। पर इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं है। अगर आप भी प्रेग्नेंसी में क्रेविंग्स को लेकर परेशान हैं तो यह ब्लॉग आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें हम बताएंगे कि आखिर क्या है प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स, क्या है इसकी वजह, यह कब होती है और आपको किस-किस चीज की क्रेविंग्स हो सकती है।

क्या है प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स / What is Pregnancy Cravings In Hindi

प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स (Pregnancy Cravings) क्या है, इसे समझने से पहले आप क्रेविंग्स का अर्थ समझ लें। क्रेविंग्स (Cravings) का मतलब होता है तृष्णा, ललक, लालसा या किसी चीज को लेकर प्रबल इच्छा। प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती को रह-रहकर खाने व अलग-अलग अनहेल्दी चीजों के खाने की इच्छा होती है। कभी मसालेदार चीज तो कभी मीठा व खट्टा खाने की इच्छा उनमें जागती है। इस अवस्था में उनमें वो चीज खाने की इच्छा ज्यादा होती है, जो पहले उन्हें नापसंद थी। खाने की इसी लालसा को प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स कहते हैं। गर्भावस्था में यह सामान्य बात है। ऐसे में इसे लेकर आपको परेशान नहीं होना चाहिए।

क्या है क्रेविंग्स होने की वजह / Reasons For Pregnancy Cravings In Hindi

हालांकि इसके पीछे की सटीक वजह क्या है, इसके बारे में डॉक्टर अभी तक नहीं बता पाएं हैं। पर माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में कई तरह के हार्मोनल बदलाव आते हैं। किसी भी प्रेग्नेंट महिला के लगातार हार्मोंस में हो रहे बदलावों से स्वाद और सूंघने की क्षमता पर असर पड़ता है। यही वजह है कि प्रेग्नेंट महिलाओं व मेनापॉज से गुजर रहीं महिलाओं को क्रेविंग्स की दिक्कत होती है। वहीं कुछ डॉक्टर बताते हैं कि प्रेग्नेंसी में क्रेविंग्स आहार में कमी का भी संकेत होती है। यह स्थिति शरीर में पोषक तत्वों की कमी होने से बनती है। एक शोध के अनुसार, 50-90 प्रतिशत गर्भवती को प्रेग्नेंसी के दौरान फूड क्रेविंग्स से जूझना पड़ता है।

किस-किस चीज की होती है क्रेविंग्स

ऊपर हमने बताया कि क्रेविंग्स क्या है और यह क्यों होता है। अब आपके लिए यह जानना भी बहुत जरूरी है कि क्रेविंग्स किस-किस चीज की हो सकती है। दरअसल प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को मीठा खाने जैसे कि आइसक्रीम व चॉकलेट या फिर अलग-अलग तरह के फल, सब्जियां व कुछ अन्य भोजन खाने का मन करता है। किसी-किसी के अंदर चाइनीज, फास्ट फूड, मसालेदार खाना या फिर खट्टी चीजें खाने की ललक लगती है। कुछ महीने पहले करीना कपूर खान और अनुष्का शर्मा ने प्रेग्नेंसी के दौरान अपनी क्रेविंग्स के बारे में बताया था। अनुष्का ने जहां हलवा-पूरी खाने की बात कही थी, तो करीना कपूर ने पिज्जा बेक करते हुए तस्वीर डाली थी। ये भी जरूर पढ़ लें:- अनुष्का शर्मा ने प्रेग्नेंसी के दौरान किन 10 बातों का रखा था खास ख्याल

प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स शुरू होने का समय

डॉक्टरों की मानें तो अधिकतर केस में क्रेविंग्स प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही यानी फर्स्ट ट्राईमेस्टर (First Trimester Pregnancy) में शुरू होती है और दूसरी तिमाही/सेकेंड ट्राईमेस्टर (Second Trimester Pregnancy) दूसरी तिमाही में जाकर इसकी अधिकता बढ़ जाती है। वहीं तीसरी तिमाही/थर्ड ट्राईमेस्टर (Third Trimester Pregnancy) में जाते-जाते क्रेविंग्स में गिरावट आती है। हालांकि डॉक्टर बताते हैं कि कुछ केस में डिलिवरी के बाद भी क्रेविंग्स देखी गई है।

फूड क्रेविंग्स है सबसे आम

कई रिसर्च से यह बात सामने आई है कि गर्भावस्था क्रेविंग्स में फूड क्रेविंग्स सबसे आम है। इसमें भी अधिकतर महिलाएं अनहेल्दी फूड की इच्छा करती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इस अनहेल्दी फूड में भी मीठे खाद्य पदार्थ, स्टार्चयुक्त कार्बोहाइड्रेट की इच्छा सबसे ज्यादा होती है। कुछ सामान्य प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स में दूध, मसालेदार भोजन, आइसक्रीम, उच्च कार्बोहाइड्रेट खाद्य पदार्थ, चॉकलेट, अचार, अनाज और फल व सब्जियां शामिल हैं।

फूड अवर्शन (Food aversions) को भी समझें

फूड अवर्शन फूड क्रेविंग्स (Food Craving) के विपरित है। इसकी शुरुआत भी उसी समय से होने लगती है, जब से प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स की। अवर्शन का मतलब होता है अरुचि, घृणा या किसी चीज से विरक्ति। अतः फूड अवर्शन का मतलब है गर्भावस्था में किसी चीज से अरुचि होना। प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ महिलाओं को ये दिक्कत भी आती है। इसमें आप अचानक किसी निश्चित भोजन के स्वाद या गंध (या फिर दोनों) को सहन नहीं कर पातीं या आपको इसका अहसास ही नहीं होता। मछली और कॉफी के स्वाद में इस तरह की दिक्कत सबसे ज्यादा आती है। इसे तो आप जरूर पढ़ लें :- गर्भवती महिलाओं को कौन से फल खाने चाहिए और किन फलों से करना चाहिए परहेज

प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स को ऐसे कर सकते हैं कंट्रोल / Healthy Ways to Control Pregnancy Cravings In Hindi

वैसे तो प्रेग्नेंसी में क्रेविंग्स आम बात है और कुछ अपवाद को छोड़ दें तो यह कहीं से भी नुकसानदायक नहीं है। फिर भी अगर आप इस पर कंट्रोल करना चाहते हैं तो यह संभव है। बस आपको कुछ सावधानियां बरतते हुए कुछ महत्वपूर्ण बातों को फॉलो करना होगा। आइए जानते हैं कि आप कैसे कर सकते हैं इसे नियंत्रित...

  • गर्भावस्था के शुरुआती स्टेज पर ही क्रेविंग्स की समस्या सामने आती है। अगर आप इससे बचना चाहती हैं, तो इस दौरान ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं। कोशिश करें कि पानी थोड़ा ठंडा हो। आप कुछ पानी वाले फलों को भी आजमा सकती हैं। इससे शरीर में तरल पदार्थ की मात्रा भी बढ़ेगी। ज्यादा पानी पीने से अनहेल्दी चीज खाने का मन नहीं करेगा।
     
  • सुबह याद करके नियमित रूप से नाश्ते की आदत डालें। पौष्टिक और संतुलित नाश्ता (Breakfast) आपको पूरे दिन क्रेविंग्स से दूर रखेगा।
     
  • पहली से तीसरी तिमाही के बीच अगर आपका मन मीठा, तला व भुना हुआ, मसालेदार या चटपटा खाने का कर रहा है, तो फल लें या फिर सलाद खाएं।
     
  • प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स में देखा गया है कि गर्भवती को मीठा ज्यादा खाने की इच्छा होती है। इसमें भी उनके अंदर चॉकलेट खाने की इच्छा अधिक मिलती है। ऐसी स्थिति में बेहतर होगा कि आप मिल्की चॉकलेट न खाकर डार्क चॉकलेट लें। इससे आपका मूड ठीक होगा और तनाव भी कम होगा। हालांकि इसकी मात्रा अधिक न करें।
     
  • गर्भावस्था की शुरुआती महीनों में आपको ज्यादा से ज्यादा संतुलित आहार लेना चाहिए। वसा (फैट), शुगर व केमिकल युक्त चीजों को खाने से परहेज करें। इन सबके सेवन से आपको वजन बढ़ने व कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
     
  • प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स से बचने का एक बेहतर तरीका ये भी है कि आप ध्यान को भटकाएं। जब कभी आपको कुछ अनहेल्दी चीज खाने का मन करे, तो ऐसी स्थिति में आप अपना ध्यान उस पर से हटा लें। आप किसी से फोन पर बात करना शुरू कर सकती हैं, चाहें तो आप खुद को किसी और काम में व्यस्त कर सकती हैं।
     
  • वैकल्पिक आहार पर ध्यान देकर भी आप क्रेविंग्स को कंट्रोल कर सकती हैं। आप अधिक कैलोरी वाले भोजन की जगह कम कैलोरी वाले भोजन के विकल्प पर ध्यान दें। मान लीजिए आपको फास्ट फूड या पनीर बर्गर खाने का मन कर रहा है, तो आप इसके विकल्प में घर पर खुद कम वसा वाले पनीर से बर्गर बनाकर खा सकती हैं। इसी तरह आलू चिप्स की जगह आप साधारण नमकीन का सहारा ले सकती हैं।
     
  • उच्च फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ भी आपको क्रेविंग्स कंट्रोल करने में मदद कर सकता है। फल, सब्जियां, साबूत रोटी व फली बेहतर विकल्प हैं। इससे आप लंबे समय तक भूख महसूस नहीं करेंगी। इसके अलावा यह शरीर को जरूरी विटामिन और खनिज भी देता है, जिससे ऊर्जा का स्तर बना रहता है।
     
  • नियमित अंतराल पर खाना खाकर भी आप इसे कंट्रोल कर सकती हैं। दरअसल नियमित अंतराल पर खाना न खाने से ब्लड शुगर गिरने लगता है और इससे क्रेविंग्स बढ़ती है। ऐसे में जरूरी है कि आप कुछ अंतराल पर कुछ-कुछ करके भोजन करतीं रहें। आप 2-3 घंटे का गैप रख सकती हैं।
     
  • प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स को कंट्रोल करने के लिए रेगुलर एक्सरसाइज भी अच्छा विकल्प हो सकता है। हालांकि आपको कम तीव्रता वाले व्यायाम करने चाहिएं। आप ब्रिस्क वॉकिंग, योगा, मेडिटेशन आदि कर सकती हैं। हालांकि एक्सरसाइज किस तरह का करें इसे लेकर एक बार अपने डॉक्टर से भी बात जरूर करें।
     
  • प्रेग्नेंसी में पर्याप्त नींद भी बहुत जरूरी है। इससे शरीर के हार्मोन को ठीक रखने में मदद मिलती है। अगर आप ठीक से सो नहीं पाती हैं तो आपको भूख भी ज्यादा लगेगी, इससे क्रेविंग्स ट्रिगर होगा। ऐसे में जरूरी है कि आप पर्याप्त नींद लें।

इस स्थिति में खतरनाक है प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स

वैसे तो प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स बड़ी समस्या नहीं है और इसे लेकर डरने की जरूरत नहीं है। पर कुछ परिस्थितियों में इस पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है। कुछ केस में यह नुकसानदायक हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर आपके अंदर कुछ गलत चीज जैसे – मिट्टी, चॉक, साबुन, तंबाकू, गुटखा खाने या शराब पीने व स्मोकिंग करने की इच्छा बार-बार हो तो आपको फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आप गर्भावस्था के दौरान इन चीजों का सेवन करेंगी तो ये न सिर्फ आपके लिए बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी खतरनाक हो सकता है।

 प्रेग्नेंसी क्रेविंग्स गर्भावस्था के दौरान आम बात है। 50-90 प्रतिशत गर्भवती को प्रेग्नेंसी के दौरान इससे जूझना पड़ता है। इसमें परेशान होने वाली कोई बात नहीं है। आप थोड़ी सी सावधानी बरतकर इसे आराम से कंट्रोल कर सकती हैं। शराब पीने, स्मोकिंग करने व नुकसानदायक चीजों को लेकर क्रेविंग्स खतरनाक हो सकती है, ऐसी स्थिति में आपको फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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