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एक गांव जहां बेटी के जन्म लेने पर लगाए जाते हैं पेड़

Prasoon Pankaj
7 से 11 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Feb 02, 2019

एक गांव जहां बेटी के जन्म लेने पर लगाए जाते हैं पेड़

बेटी पढाओ बेटी बचाओ मुहिम को आगे बढ़ाने में सरकार और कई सामाजिक संस्थाएं मिलकर काम कर रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जिस गांव में बेटियों के जन्म के साथ ही पौधे लगाने की परंपरा है। बिहार के भागलपुर जिले का धरहरा गांव आज की तारीख में पूरे देश को पर्यावरण बचाओ और बेटी बचाओ का संदेश एक साथ दे रहा है। साल 2010 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने धरहरा गांव को मॉडल विलेज बनाने का ऐलान किया।

कैसे शुरु हुई ये परंपरा ? How Did This Tradition Begin In Hindi

भागलपुर के धरहरा गांव में जिनके घर बिटिया का जन्म होता है तो उस परिवार के सदस्य गांव में 10 पौधे लगाते हैं। खास बात ये है कि पहले इस गांव में वृक्ष कम थे लेकिन आज ये गांव पेड़ पौधों से भरा पड़ा है। आज इस गांव में तकरीबन 1200 एकड़ जमीन में आम और लीची के पेड़ों से घिरा हुआ है। ये वृक्ष गांव वालों को आर्थिक रूप से भी सबल बना रहे हैं। गांव के मुखिया की माने तो ये परंपरा इस गांव में बहुत साल पहले से चली आ रही है। बेटी के जन्म के साथ जो 10 पौधे लगाए जाते हैं वे विवाह के समय तक बड़े हो जाते हैं। एक और खास बात बता दें कि परिवार के लोग जिस दिन बेटी का जन्मदिन मनाते हैं उस दिन पेड़ों का जन्मदिन भी साथ में मनाया जाता है।

ये गांव आसपास के इलाके में रोल मॉडल बन चुका है और अब इस गांव की परंपरा को देख कर दूसरे गांवों के लोग भी इसको अपनाने लगे हैं। बिहार जैसे राज्य में जहां दहेज उत्पीड़न और लैंगिक भेदभाव के कई मामले देखने को मिलते हैं वहीं पर इस गांव में आज तक इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है।  भागलपुर जिले का लिंगानुपात 1000 पुरुषों पर सिर्फ 879 महिलाएं हैं वहीं पर इस गांव में यह अनुपात 957 है। 

डाक विभाग  ने धरहरा की परंपरा से प्रभावित होकर इस गांव को सूबे का पहला सुकन्या ग्राम बनाने की ठानी है। इसको लेकर धरहरा की सैकड़ों लड़कियों के नाम पर खाते खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गांव में बेटियों की संख्या भी सर्वाधिक है। इसलिए इस गांव को सुकन्या ग्राम बनाने के लिए चयनित करने की योजना है। पर्यावरण संरक्षण और महिला अधिकार के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए धरहरा गांव पूरे देश के लिए मिसाल है।

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