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मिसाल : जीवनरक्षक बनकर सामने आई 2 बहनें, भाई को लिवर डोनेट कर बचाई जान

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 23, 2021

मिसाल जीवनरक्षक बनकर सामने आई 2 बहनें भाई को लिवर डोनेट कर बचाई जान
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

भाई बहनों के बीच अटूट प्यार के रिश्ते को समर्पित है रक्षाबंधन का त्योहार। ऐसा कहा जाता है कि बहनें अपने भाई को राखी बांधती है और बदले में भाई उनकी रक्षा करने का संकल्प लेता है लेकिन बदलते वक्त के साथ अब राखी बांधने की सोच में भी काफी सकारात्मक बदलाव आए हैं। सिर्फ भाई ही क्यों, क्या बहनें अपने भाइयों की रक्षा करने में सक्षम नहीं हैं? बिल्कुल हैं और इस बात की पुष्टि की है यूपी के बदायूं की 2 बहनों ने जिन्होंने गंभीर बीमारी से ग्रसित अपने भाई को आधा-आधा लिवर डोनेट करके एक मिसाल कायम कर दिया है। बदायूं के जवाहरपुरी निवासी व बिल्सी के नन्नूमल जैन इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य राजेश गुप्ता के परिवार में इस साल राखी का ये त्योहार बहुत महत्वपूर्ण है। राजेश गुप्ता की दो बेटियां और एक बेटा अक्षत उर्फ कृष्णा है। अक्षत का लिवर पूरी तरह से डैमैज हो चुका था। 

14 साल के अक्षत को पीलिया हो गई थी और उसका लीवर डैमेज हो चुका था। इसके साथ ही एक बड़ी समस्या ये थी कि उसका वजन 92 किलो था। गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। अक्षत की दोनों बहनें 29 साल की नेहा और 22 साल की प्रेरणा ने अपना आधा-आधा लिवर देकर भाई के जान की रक्षा की। ये ऑपरेशन अपने आप में कठिन था क्योंकि दो अलग अलग हिस्सों के लिवर को अक्षत की बॉडि में फिट करना काफी चुनौती भरा काम था।

मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों ने इस चुनौती का सामना किया। डॉक्टरों के मुताबिक एक ही समय में तीनों भाई-बहन ऑपरेशन रूम में थे। डॉक्टर ने जानकारी देते हुए कहा कि एक सफल ट्रांसप्लांट के लिए बहुत जरूरी है कि लीवर का वजन रोगी के शरीर के वजन का कम से कम 0.8% से 1% हो। इस मामले अगर हम सिर्फ एक बहन से लिवर लेते तो उसक वजन सिर्फ 0.5 से 0.55% होता है। इसलिए हमें दोनों बहनों से लिवर लेने की जरूरत पड़ी।

ऑर्गन डोनेट का ये एक अनोखा उदाहरण है। इस ऑपरेशन से एक और संदेश सामने आया है कि कोई भी स्वस्थ व्यक्ति बिना किसी नुकसान के अपना आधा लिवर या एक किडनी किसी को डोनेट करके उसके प्राणों की रक्षा कर सकता है। नेहा और प्रेरणा ने सही मायने में एक मिसाल कायम किया है। अक्षत अब ऑपरेशन के सफल होने के बाद घर वापस लौट चुका है और दोनों बहनों ने रक्षाबंधन के अवसर पर राखी बांधकर अक्षत की रक्षा करने का वचन दिया है।

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