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वायरल निमोनिया (Viral pneumonia) के लक्षणों की नहीं करें अनदेखी, यहां जानिए बचाव के उपाय

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 26, 2021

वायरल निमोनिया Viral pneumonia के लक्षणों की नहीं करें अनदेखी यहां जानिए बचाव के उपाय
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

पिछले 2 साल से कोरोना महामारी ने हम सबकी जिंदगी में काफी कुछ उथल-पुथल मचाकर रख दिया है। स्वास्थ्य महकमे का पूरा ध्यान कोरोना महामारी पर केंद्रित हो कर रह गया लेकिन इसके साथ ही अन्य बीमारियों से होने वाले नुकसानों पर भी तवज्जो देना चाहिए। कोरोना महामारी के दौरान बच्चों में फ्लू के टीकाकरण (Fku vaccination) में काफी हद तक कमी देखने को मिली है और यही वजह है कि इसका नुकसान अभी देखने को मिल रहा है। बात अगर राजधानी दिल्ली की करें तो हाल के दिनों में तमाम सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में वायरल न्यूमोनिया से ग्रसित बच्चों (Viral pneumonia in Kids) की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 20 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज किए जा रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक वायरल निमोनिया के मामलों में पिछले साल की तुलना में इसलिए भी तेजी देखी जा रही है क्योंकि आशंका है कि बच्चों के फ्लू वैक्सीनेशन कार्यक्रम कोरोना के चलते काफी प्रभावित हुए हैं। फ्लू वैक्सीन बच्चों को वायरल निमोनिया से बचाव करता था। हम आपको बता दें कि 6 माह से अधिक आय़ु के सभी बच्चों को फ्लू वैक्सीन निश्चित रूप से दिलवा देना चाहिए। हम आपको इस ब्लॉग में वायरल निमोनिया के लक्षण व बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी देने जा रहे हैं।

वायरल निमोनिया से क्यों बच्चे हो रहे हैं इस साल ज्यादा प्रभावित?

दिल्ली के बाबू जगजीवन राम अस्पताल में Consultant Physician Intensivist डॉ अमरेंद्र झा का कहना है कि मानसून के दौरान वायरल निमोनिया के मामले बढ़ जाते हैं लेकिन इस बार कुछ ज्यादा ही केस सामने आ रहे हैं। चार सप्ताह से कम उम्र के बच्चों में वायरल निमोनिया के केस ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। डॉक्टर इस बात को लेकर भी अंदेशा जता रहे हैं कि कोरोना के चलते बहुत सारे बच्चे फ्लू का वैक्सीन लेने से चूक गए थे और ये भी एक कारण हो सकता है कि घरों में लगातार रहने के चलते उनकी इम्यूनिटी में गिरावट आ गई हो। दिल्ली के मूलचंद अस्पताल, राम मनोहर लोहिया अस्पताल, एम्स, सफदरजंग, हिंदूराव समेत कई और अस्पतालों में वायरल निमोनिया के केस में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दिल्ली के अलावा बिहार समेत कई और राज्यों में भी वायरल निमोनिया को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सजगता बढ़ा दी है। बिहार के गोपालगंज जिले में ही ही 70 से ज्यादा बच्चे अस्पताल में भर्ती किए गए। बीमार बच्चों की उम्र 1 माह से लेकर 5 साल तक की है। यहां जानिए विस्तार से- क्यों नहीं करना चाहिए निमोनिया के लक्षणों की अनदेखी?

वायरल निमोनिया के क्या हो सकते हैं लक्षण?

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सौरभ अग्रवाल के मुताबिक बच्चों में सांस लेने में कठिनाई देखने को मिल सकते हैं, इसके अलावा हांफने की शिकायत भी हो सकते हैं। 

  • नींद की कमी महसूस होना

  • कान में दर्द, आंखों से धुंधला दिखना

  • बच्चे के जोड़ों, पैरों या सिर में दर्द की समस्या होना

  • बुखार का होना,

  • अचानक से मूड बदल जाना

  • गंध की कमी या स्पर्श को महसूस नहीं कर पाना

डॉ. अमरेंद्र झा  का कहना है कि अगर बच्चे को सर्दी खांसी या बुखार की समस्या हो तो तुरंत बच्चे को डॉक्टर से चेकअप करवा दें। वायरल बुखार से ग्रसित बच्चों का अगर समय पर इलाज नहीं किया गया तो नाक के सहारे इन्फेक्शन बच्चे को फेफड़ों तक पहुंच सकता है। फेफड़े में इन्फेक्शन होते ही बच्चा निमोनिया से ग्रसित हो जाता है। अगर इसका इलाज सही समय पर अच्छे से नहीं किया गया तो ये जानलेवा भी साबित हो सकता है।

वायरल निमोनिया के उपचार में किन बातों पर ध्यान दें?

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सौरभ अग्रवाल के मुताबिक वायरल निमोनिया से पीड़ित बच्चे को मेडिसिन के अलावा भाप देने की भी आवश्यकता होती है। डॉक्टरों के मुताबिक भाप की प्रक्रिया को करने से बच्चों में हांफने की समस्या कम हो सकती है और संक्रमण का प्रभाव भी धीरे-धीरे कम होता जाएगा। 

  • अपने बच्चे को समय समय पर पानी पिलाते रहें

  • ताजा और गर्म खाना ही बच्चे को खाने के लिए दें

  • ताजे फल और मौसमी  बच्चे को दे सकते हैं

  • अपने डॉक्टर की सलाह के मुताबिक ही बच्चे को दवा दें

  • जूस की बजाय फल काटकर खाने के लिए दें

  • बच्चे के पास साफ सफाई का खास ध्यान रखें, बच्चे को भी साफ कपड़ा पहनाएं और खुद भी बच्चे के पास गंदे कपड़े पहनकर ना जाएं

  • आपका बच्चा मास्क नहीं पहनता है तो आप खुद मास्क पहनकर ही बच्चे के पास जाएं

  • इस समय में घर पर बाहरी लोगों को ना बुलाएं

सबसे जरूरी बात की पैनिक ना होएं और डॉक्टरी सलाह का पालन करते रहें। अपने बच्चों का ध्यान रखें और टीकाकरण अवश्य करा लें। 6 माह की उम्र से ही सभी बच्चे को फ्लू का वैक्सीनेशन अवश्य करवा लेना चाहिए। गर्भावस्था के दौरान सभी वैक्सीनेशन जो आपके डॉक्टर ने सुझाया है उसको अवश्य करवा लें ताकि जन्म लेने के कुछ महीनों तक शिशु की इम्यूनिटी मजबूत रह सके और उनकी सुरक्षा में मदद मिल सके। ये बात इसलिए जरूरी है क्योंकि शिशु के जन्म होने से लेकर 6 माह की उम्र तक के लिए कोई फ्लू वैक्सीन नहीं है।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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