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बाढ़ के दौरान बीमारियों से बचने के लिए क्या करें और क्या नहीं?

Prasoon Pankaj
गर्भावस्था

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Sep 14, 2020

विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

देश के कई हिस्सों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बाढ़ का पानी हटने के बाद सबसे ज्यादा खतरा बीमारियों के फैलने का होता है और इसकी चपेट में बच्चे भी आ सकते हैं। जरूरत इस बात की है कि आप कुछ सावधानियों को जरूर बरतें। इस ब्लॉग में हम आपको विस्तार से बताने जा रहे हैं कि बाढ़ के दौरान व बाढ़ के बाद बीमारियों के प्रकोप से बचने के लिए आपको किन उपायों को आजमाना चाहिए। 

बाढ़ के दौरान किस तरह की बीमारियों के फैलने का खतरा होता है? / What Diseases Can Floods Cause  In Hindi?

बाढ़ के चलते अनेक प्रकार की बीमारियां फैलती हैं जिनमें से मलेरिया, डेंगू, बुखार, हैजा, हेपेटाइटिस ए व चिकनगुनियां प्रमुख हैं।

 

  1. जरूरी ये नहीं कि बाढ़ के तुरंत बाद ही बीमारियां फैल जाएं। ये भी मुमकिन है कि बाढ़ के आने के कुछ सप्ताह या महीने के बाद भी बीमारियां अपने चपेट में ले सकती हैं। प्रदूषित जल के संपर्क में आने से दस्त और लैप्टोस्पायरोसिस जैसी बीमारियां फैलती है।
     
  2. स्थिर जल में मच्छरों की प्रजनन क्षमता कई गुना बढ़ जाती है और इसलिए मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती है।
     
  3. बाढ़ के दौरान चूहों की संख्या में वृद्धि हो जाती है। चूहों के मूत्र में लैप्टोस्पाइरा होती है और ये बाढ़ के पानी में मिल जाता है। इसकी वजह से कीटाणुओं का काफी विस्तार हो जाता है। जब जल स्तर कम होने लगता है तब भी मच्छरों की संख्या में बढ़ोतरी हो जाती है।
     
  4. बाढ़ की वजह से ना सिर्फ मच्छर बल्कि कॉकरोच की संख्या भी बढ़ जाती है और पीने का पानी भी प्रदूषित हो जाता है। यही वजह है कि कॉलरा, टायफाइड और दस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। साल 2008 में बाढ़ के बाद बिहार में कॉलरे का भंयकर प्रकोप फैला था और हजारों की संख्या में लोग इससे प्रभावित हुए थे।

बाढ़ के बाद बीमारियों से बचने के लिए किन उपायों को आजमाएं / Prevent Illness After a Disaster In Hindi

बाढ़ के बाद बीमारियों से निपटने के लिए हालांकि सरकारी स्तर पर भी काफी प्रयास किए जाते हैं लेकिन इनके ऊपर पूरी तरह निर्भर रह जाने की बजाय आपको खुद भी सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। सबसे जरूरी इस बात की है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों को भी स्वच्छता बरतने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। आप खुद जागरुक बनें और लोगों को भी जागरुक करें 

  • बाढ़ के पानी में जहां तक हो सके चलने से परहेज करें क्योंकि उनमें कचरा और मल मूत्र मिला होता है। अपने बच्चो को बाढ़ के पानी के संपर्क में आने से जरूर बचाएं।
     
  • अगर आपको पहले से स्किन की कोई समस्या है या कोई घाव है तो उसको बाढ़ के पानी से बचा कर रखें नहीं तो इन्फेक्शन होने का खतरा हो सकता है। अपने घावों को साफ पानी से धोएं और उन पर पट्टी बांधकर जरूर रखें।
     
  • अगर फिर भी मान लिया जाए कि आपको किन्हीं मजबूरियों की वजह से बाढ़ के पानी के संपर्क में आना ही पड़ जाता है तो इस बात का जरूर ध्यान रखें कि इस पानी में डूबी हुए या तैरते हुए किसी सामान को ना छुएं। आप जब वापस लौटें तब साबुन और साफ पानी से हाथ-पैरों को जरूर अच्छे से धो लें। गंदे हाथों से खाने के सामान को ना छुएं।
     
  • अगर किसी प्रकार की कोई खाद्य सामग्री या दवाएं बाढ़ के पानी के संपर्क में आ गए हों तो उनका इस्तेमाल ना करें
     
  • डब्बाबंद भोजन का प्रयोग कर रहे हैं तो डब्बे को अच्छे तरीके से साफ कर प्रयोग में लाएं
     
  • पीने के पानी को उबाल लें और फिर सामान्य होने के बाद प्रयोग करें
     
  • दिन के समय में भी मच्छरदानी का प्रयोग करें व बच्चों को फूल बाजू बंद कपड़े पहनाएं। 
     
  • सड़कों पर कचड़ा ना फेंकें और अपने घर के अंदर और बाहर सफाई रखें।
     
  • बाढ़ का पानी जब घर से निकल जाए उसके बाद अपने घर के कोने-कोने की अच्छे से सफाई करें। फिनायल व अन्य कीटनाशक का प्रयोग कर स्वच्छता बनाए रखें।
     
  • बाढ़ के दौरान या लगातार बारिश होने की वजह से रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले कपड़े व बिस्तर में नमी रह सकती है। इन सबको कुछ देर तक धूप में जरूर रख दें।
     
  • बाढ़ के बाद स्किन इन्फेक्शन होने का बड़ा खतरा होता है। नीम की पत्तियों को पानी में डालकर उबाल लें और उसके बाद इन पत्तियों को हटा कर उस पानी से नहाएं और इस पानी से कपड़े भी साफ करें।
     
  • ताजा गर्म खाना का ही इस्तेमाल करें और बासी खाने से परहेज रखें। बाढ़ के दौरान छोटी मछलियां बिल्कुल ना खाएं।
     
  • बाढ़ के बाद किसी प्रकार की अस्वस्थता महसूस करने पर नजदीकी अस्पताल में जरूर चेकअप करवा लें

ये बात बिल्कुल सच है कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा है और इसको रोकना मुमकिन नहीं लेकिन हम बाढ़ के बाद बीमारियों को पनपने से जरूर रोक सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हम मिल जुलकर प्रयास करें।  परिवार के स्वास्थ्य का ख्याल रखें और अपने पड़ोसियों और करीबी लोगों को भी जागरुक बनाएं।

आपका एक सुझाव हमारे अगले ब्लॉग को और बेहतर बना सकता है तो कृपया कमेंट करें, अगर आप ब्लॉग में दी गई जानकारी से संतुष्ट हैं तो अन्य पैरेंट्स के साथ शेयर जरूर करें।

इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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कमैंट्स ()
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| Nov 02, 2019

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| Jul 21, 2020

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| Sep 25, 2020

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