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जानिए क्या होता है लोटस बर्थ और इसका आपके बच्चे पर असर

Amrita
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Amrita के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Aug 31, 2018

जानिए क्या होता है लोटस बर्थ और इसका आपके बच्चे पर असर

नई माओं के बीच आजकल लोटस बर्थ का कॉन्सेप्ट ख़ासा ट्रेंड कर रहा है। ये तरीका प्राकृतिक तो है, लेकिन ये आपके शिशु को ख़तरे में भी डाल सकता है। ऐसा कहा जाता है कि लोटस बर्थ से बच्चा ज़्यादा स्वस्थ रहता है, लेकिन साइंस ये नहीं मानता।
 

क्या है लोटस बर्थ?/ What is Lotus Barth?

आम तौर पर बच्चे के जन्म के बाद गर्भनाल काट दी जाती है। लेकिन लोटस बर्थ में ऐसा नहीं किया जाता। आजकल कई देशों में नयी माएं इस ट्रेंड को आज़मा रही हैं। 'Lotus Birth’ में Placenta और गर्भनाल को अलग नहीं किया जाता है । इसे किसी टब, मटके या फिर थैले में बहुत ही साफ़-सफ़ाई के साथ रखा जाता है, ताकि इसमें किसी तरह के कीटाणु और बदबू न आए।

कुछ दिनों में गर्भनाल सूख कर अपने आप ही अलग हो जाती है। अमूनन इसमें 10 दिन का समय लग जाता है। Placenta को सुखाने के लिए माएं नमक और सेंटेड ऑयल्स का इस्तेमाल भी करती हैं।


क्या कहते हैं डॉक्टर?

ये प्रकिया बिल्कुल सेफ़ नहीं है। इस तरीके से बच्चे में इंफ़ेक्शन फैलने का ख़तरा बना रहता है। इस बात का अब तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि इससे बच्चे को किसी भी तरह का फ़ायदा होता है।

Placenta में खून होता है, इसलिए आसानी से इसमें संक्रमण फ़ैल जाता है और ये संक्रमण गर्भनाल के ज़रिये बच्चे तक भी पहुँच सकता है। जन्म के बाद Placenta किसी काम का नहीं होता, ये मृत कोशिकाओं का समूह मात्र रह जाता है।

ये ट्रेंड आपके शिशु के लिए वाकई ख़तरनाक है। जिस चीज़ की डॉक्टर भी सलाह नहीं देते, उसे केवल ट्रेंड होने के कारण आज़माना समझदारी नहीं है। 

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