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बारिश के मौसम में गर्भवती महिलाओं को कौन से 5 काम नहीं करना चाहिए ?

Sadhna Jaiswal
गर्भावस्था

Sadhna Jaiswal के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Jul 13, 2020

बारिश के मौसम में गर्भवती महिलाओं को कौन से 5 काम नहीं करना चाहिए
विशेषज्ञ पैनल द्वारा सत्यापित

 गर्भावस्था का समय बहुत संवेदनशील होता है अर्थात उतार चढ़ाव वाला समय होता है। एक तरफ जहाँ नए शिशु के आने की ख़ुशी होती है वही दूसरी तरफ आपको बहुत पीडाएं भी झेलनी पड़ती है, ऐसे में भीषण गर्मी के बाद जब बारिश का मौसम आता है तो प्रेगनेंसी में बड़ी राहत मिलती है, लेकिन मानसून ख़ुशी के साथ-साथ बहुत सी चुनौतियाँ भी लेकर आता है क्योकि यह एक ऐसा समय होता है, जब कई तरह के बैक्टीरिया, वायरस, फ्लू और मच्छरों से रिलेटेड बीमारियाँ होती है, जो आपके और आपके शिशु के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। यदि आपको मानसून का आनंद लेना है तो आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए तो आइये जानते है कि गर्भवती महिलाओं को बारिश के मौसम में क्या नहीं करना चाहिए।   

बारिश के मौसम में कुछ बातों का रखें ख्याल / Take special care of these things in the rainy season In Hindi  

आपको बारिश के मौसम में अपना विशेष ध्यान रखने की जरुरत होती है। यदि आप कुछ बातों का ध्यान दें तो आप मानसून में होने वाली समस्यों से बच सकती है। 

  1. बाहर का कोई भी फ़ूड न खाएं – बारिश के मौसम में आपको बाहर का बना कोई भी फ़ूड नहीं खाना चाहिए।  मानसून के दौरान बाहर बने दूषित खाने से इन्फेक्शन होने के चांसेस बढ़ जाते है। गर्भवस्था में आमतौर पर रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity) सामान्य से कम हो जाती है, इसलिए आप बड़ी आसानी से इन्फेक्शन का शिकार हो सकती है। गर्भावस्था में ज्यादा दवाइयां लेना गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए अच्छा नहीं होता है, इसलिए बारिश के मौसम में ताजे फल और घर का बना ताजा खाना ही खाएं। 
     
  2. नार्मल पानी बिलकुल ना पिए – बारिश के मौसम में आपको RO का पानी ही पीना चाहिए और यदि RO का पानी उपलब्ध नहीं है तो पानी को बॉईल करके ठंडा करें और फ़िल्टर करके ही पिए। बारिश के मौसम में साफ़ पानी में भी बैक्टीरिया आ जाते है और पानी गन्दा हो जाता है, इस मौसम में पानी से रिलेटेड बिमारियां ज्यादा फैलती है, खासकर के डायरिया (Diarrhea), पीलिया (Jaundice) और अन्य कई तरह के वायरस की वजह से होने वाली बीमारियाँ। इस समय शारीर में पसीने की वजह से डीहाईड्रेसन की समस्या भी आम होती है, इसलिए खूब पानी पिए, थोड़ी थोड़ी देर में कई बार पानी पिए। 
     
  3. सिंथेटिक कपडे नहीं पहने – बारिश के मौसम में हवा में नमी होने के कारण, बारिश के बाद हुमिनिदिटी बढ़ने लगती है, जिसकी वजह से ज्यादा पसीना आता है, जिसकी वजह से डीहाईड्रेसन की समस्या हो सकती है इसलिए जरुरी है कि ज्यादा टाईट फिटिंग और सिंथेटिक कपडे ना पहने, बारिश के मौसम में आपको कॉटन के और ढीले ढाले आरामदायक कपडे पहनने चाहिए, जिससे आप बारिश के मौसम का पूरा आनंद ले सकें।
     
  4. ठंडी चीजे खाने से बचे – इस दौरान मौसम के तापमान में काफी उतार –चढाव होता है और हवा में नमी की मात्रा 80 से 100 परसेंट तक पहुच जाती है जो शरीर में पसीने के कारण की मुख्य वजह होती है और अक्सर हम पसीने और गर्मी से घबराकर ठंडी चीजे खाने की कोशिश करते है जैसे कोल्डड्रिंक, आइस क्रीम या फ्रिज का पानी, जिसकी वजह से आप सर्दी जुखाम और कई तरह के इन्फेक्शन का शिकार हो सकती हैं। 
     
  5. भीगने से बचे – बारिश के मौसम में आपको भीगने से बचना चाहिए, क्योकि भीगने से सर्दी-जुखाम या इन्फेक्शन होने का डर हो सकता है, जो आपके और आपके शिशु के लिए अनुकूल नहीं होगा।
     
  6. बुखार या थकान को नहीं करे नजरंदाज – बारिश के मौसम में जब कोई वायरस शरीर पर हमला करता है तो सबसे पहला लक्षण बुखार के रूप में सामने आता है, इसके बाद ही दूसरी परेशानियाँ जैसे अधिक प्यास लगना, पसीना आना, थकान आदि महसूस होने लगती है इसलिए इस समय बिना देरी किये तुरंत आपको अपने डॉक्टर  से सलाह लेनी चाहिए।   

इस तरह बारिश के मौसम में आप अपना विशेष ध्यान रखें, क्योकि गर्भवस्था का समय थोडा सा संवेदनशील होता है तो इस समय ऊपर दिए गए कुछ जरुरी बातों का ध्यान रखकर आप बारिश के मौसम का पूरा आनंद लें।

 

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इस ब्लॉग को पेरेंट्यून विशेषज्ञ पैनल के डॉक्टरों और विशेषज्ञों द्वारा जांचा और सत्यापित किया गया है। हमारे पैनल में निओनेटोलाजिस्ट, गायनोकोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन, न्यूट्रिशनिस्ट, चाइल्ड काउंसलर, एजुकेशन एंड लर्निंग एक्सपर्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, लर्निंग डिसेबिलिटी एक्सपर्ट और डेवलपमेंटल पीड शामिल हैं।

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