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जंग के माहौल या आतंकी हमले के दौरान बच्चे के सामने क्या करें और क्या ना करें

Prasoon Pankaj
1 से 3 वर्ष

Prasoon Pankaj के द्वारा बनाई गई
संशोधित किया गया Mar 01, 2019

जंग के माहौल या आतंकी हमले के दौरान बच्चे के सामने क्या करें और क्या ना करें

क्या कभी आपके बच्चे ने आपसे इस तरह का सवाल पूछा है कि आतंकी कौन होते हैं या फिर दो मुल्क आपस में क्यों लड़ते हैं? भारत-पाकिस्तान के मौजूदा तनावपूर्ण हालात को देखते हुए आपके बच्चे के मन में भी कई तरह के सवाल उमड़ रहे होंगे। अगर पैरेंट्स की बात करें तो इस तरह के कठिन सवालों का जवाब किस तरीके से दिया जाना चाहिए ये उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है। तो आज हम इस ब्लॉग में आपको बताने जा रहे हैं कि आतंकी हमले और सीमा पर चल रहे टकराव की स्थिति में हमें अपने बच्चों को किस तरह की बातें जरूर बतानी चाहिए और इसके साथ ही किन बातों से परहेज भी करना चाहिए।

 

आतंकी हमले और जंग की स्थिति में बच्चे के सामने किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

आतंकवाद की समस्या से ना सिर्फ हमारा देश बल्कि दुनियाभर के मुल्क जूझ रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 15 वर्षों में दुनियाभर में पैदा हुए तमाम बच्चे युद्ध और आतंकी हमले को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से झेलने को मजबूर हैं। 

  • अपने बच्चों से खुलकर बातचीत करें- बच्चों का मन बहुत ही कोमल होता है ऐसे में जब वे सुनते हैं कि आतंकियों ने कहीं किसी जगह पर धमाका कर दिया तो उनका मन बहुत ज्यादा व्यथित हो जाता है। ना सिर्फ बच्चे बल्कि इस तरह की घटनाओं को देखकर हम बड़े लोग भी विचलित हो जाते हैं। ऐसे समय में आप अपने बच्चे के तमाम सवालों को गंभीरता पूर्वक सुनें और उनके सवालों का भरसक जवाब देने का प्रयास करें। आप इस बात को गांठ बांधकर रख लें कि सवालों को टालना या सवालों से मुंह मोड़ लेना किसी समस्या का समाधान कभी नहीं हो सकता है। आप उनको ये बताएं कि कुछ लोग मानवता के फर्ज को भूलकर गलत राह का चयन कर लेते हैं उनको ही आतंकवादी कहा जाता है। आप उनको बताएं की आतंकवादी इंसानियत के सबसे बड़े दुश्मन हैं। अगर आपके बच्चे 10-12 साल से ज्यादा उम्र के हो चुके हैं तो आप उन्हें लादेन, कसाब और अफजल गुरु जैसे आतंकियों के अंत की कहानी भी जरूर सुनाएं ताकि उनके मन में ये बात पुख्ता हो सके कि गलत राह पर चलने वालों का हश्र भी बुरा होता है। 
     
  • आपका बच्चा न्यूज चैनलों पर क्या देख रहा है इस पर नजर बनाए रखें: ये सबसे जरूरी बात है जिसका आपको जरूर ध्यान रखना चाहिए। दरअसल किसी भी आतंकी हमले के तुरंत बाद  लगभग सभी न्यूज चैनलों पर लाइव कवरेज के दौरान कुछ इस तरह की तस्वीरें भी दिखा दी जाती है जिसे देख कर बच्चों का हृदय विचलित हो सकता है। 

    #1. न्यूज चैनलों पर लाइव डिबेट के दौरान भी कुछ वक्ता अपना आपा खो बैठते हैं और वे ऐसी बातें भी बोल जाते हैं जिनको सुनकर बच्चों पर गलत असर हो सकता है।

    #2. साल 2017 में आई एक रिसर्च के मुताबिक  नौ साल की उम्र के बच्चे रोज 7 घंटे से ज्यादा टीवी देखते हैं हालांकि ये उनके स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदेह है लेकिन एक पैरैेंट्स होने के नाते आपको ध्यान रखना चाहिए कि आपका बच्चा टीवी पर किस तरह के कार्यक्रमों को देखता है। [ये ब्लॉग आपको पढ़ना​ चाहिए - क्या बच्चे की बौद्धिक क्षमता को नुकसान पहुंचा रहा है मोबाइल/टीवी/कंप्यूटर?]

    #3. Parentune के फाउंडर व शिक्षा विशेषज्ञ नितिन पांडे का कहना है कि जब आप अपने बच्चों के साथ बैठकर टीवी देख रहे होते हैं तो अपनी भावनाओं और त्वरित प्रतिक्रिया के दौरान अपशब्दों का प्रयोग ना करें, हालांकि ये थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि इन परिस्थितियों में हम जोश और उत्साह में आकर वैसे शब्दों का प्रयोग कर जाते हैं जिनका इस्तेमाल हम लोग आमतौर पर नहीं करते हैं।  आपका बच्चा ये मान कर चल सकता है कि गुस्से या उत्तेजित अवस्था में इसी तरह के शब्दों का प्रयोग करना चाहिए। आपका बच्चा आपकी एक एक गतिविधियों को अच्छे से वॉच करता है और वो आपकी अच्छाई और बुराई दोनों को सहज तरीके से स्वीकार करता है।

    #4. बाल मनोचिकित्सा विशेषज्ञ स्वप्ना नायर का कहना है कि आतंकी हमले या सीमा पर टकराव की स्थिति में टीवी देखने के समय हमें ज्यादा उत्तेजित नहीं होना चाहिए बल्कि गंभीरता पूर्वक विश्लेषण करके अपने बच्चे को सही जानकारी देनी चाहिए।
  •  सहानुभूति और सहयोग करने का संदेश दें- आतंकी हमलों या सीमा पर युद्ध छिड़ने के दौरान हमारे कई जवान शहीद हो जाते हैं। एक सजग नागरिक होने के नाते ये हमारा भी फर्ज बनता है कि हम शहीदों के परिवारों की आर्थिक या अन्य तरीके से मदद करें। अगर आप इस तरह का सहयोग करते हैं तो इस काम में अपने बच्चे को जरूर शामिल करें और उनको ये जरूर बताएं कि ऐसा करना क्यों जरूरी होता है। 
     
  • सेना का सम्मान करना सीखाएं- सेना के जवानों की मुस्तैदी की वजह से ही हमारे देश की सरहदें सुरक्षित है। वे अपने जान की बाजी लगा कर हमारी हिफाजत करते हैं। आप अपने बच्चे को जरूर सीखाएंं कि सेना के जवान किन कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हैं। जब कभी आपको सेना के जवान नजर आएं तो उनको सैल्यूट करें और ये काम अपने बच्चे को भी सीखाएं। इस ब्लॉग को भी पढ़ें - भारत का गौरव है भारतीय सेना  
     
  • धार्मिक कट्टरता से बच्चे को बचा कर रखें- जब कभी भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव की स्थिति बनती है तो कुछ कट्टरपंथी प्रवृत्ति के लोग इसको धार्मिक भावना से जोड़ना शुरू कर देते हैं। धर्म में विश्वास रखना और धार्मिक कट्टरता दो अलग-अलग बातें हैं। धार्मिक कट्टरता की बातें अगर आप अपने घर में करेंगे तो इसका सीधा असर आपके बच्चे पर होगा। बाल मनोचिकित्सा विशेषज्ञ स्वप्ना नायर बताती हैं कि हमें अपने बच्चे के सामने धार्मिक कट्टरता की बातें नहीं करनी चाहिए। 
     
  • सही तथ्य प्रस्तुत करें- अगर आपके बच्चे 5 साल से ज्यादा के हो चुके हैं तो आप उनके सामने सही तथ्य प्रस्तुत करें क्योंकि वे अब ऐसी बातों को समझ सकते हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच टकराव की असली वजहें बच्चे को बताना जरूरी है। तो इसलिए आप पहले खुद को तैयार करें और सही जानकारी ही अपने बच्चे के सामने प्रस्तुत करें।
     
  • सोशल मीडिया पर गलत जानकारियों से बच्चे को बचाएं- सोशल मीडिया पर कुछ लोग अज्ञानतावश गलत तथ्यों को प्रस्तुत करते हैं तो ऐसे में ये ज्यादा जरूरी है कि पहले इनकी वास्तविकता को जानें। आप अपने बच्चे के सोशल मीडिया की एक्टिविटीज पर भी गौर करें। भावनाओं को भड़काने वाले और गलत जानकारियां बच्चे के बौद्धिक विकास के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। इस ब्लॉग को भी पढ़ें - इंटरनेट इस्तेमाल करते समय कैसे रखें अपने बच्चे को सुरक्षित - 7 तरीके
  • बच्चे को निडर बनाएं- जंग के माहौल में या आतंकी हमले के दौरान ये स्वाभाविक है कि हमारे आसपास के लोग इस तरह की बातचीत करते हैं जिनसे भय का माहौल बन जाता है। लेकिन आप इस बात का ध्यान रखें कि अपने बच्चे के सामने नकारात्मक बातें ना करते हुए उसका उत्साह वर्धन करें और उसको किसी भी विपरित परिस्थिति का डट कर मुकाबला करने के लिए तैयार करें। देशभक्त एवं महापुरुषों की वीरता की कहानियां सुनाएं। बच्चे को निडर बनने के लिए प्रेरित करें। इस ब्लॉग को जरूर पढ़ें :-  महाराणा प्रताप की जीवनी से प्रभावित होकर आपका बच्चा भी बनेगा निडर
     
  • देश के नेतृत्वकर्ता और सेना पर भरोसा करना सीखाएं- आपने नोटिस किया होगा कि जैसे ही कोई आतंकी हमला होता है तो लोग फौरन देश के नेतृत्वकर्ता पर सोशल मीडिया के माध्यम से या प्रत्यक्ष रूप से सवाल खड़ा करना शुरू कर देते हैं। कुछ लोग तो ये भी भूल जाते हैं कि उनकी बातों को बच्चा गौर से सुन रहा है। ध्यान रखें कि ऐसे समय में आप अपने बच्चे को ये बताएं कि हमारे देश का नेतृत्व कर रहे एवं उच्च पदों पर आसीन व्यक्ति इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं और वे इस पर उचित कार्रवाई जरूर करेंगे। 
     
  • स्कूल एवं दोस्तों के संग इन मुद्दों पर हो रही चर्चा के बारे में भी पूछें- आपका बच्चा जब स्कूल से वापस लौटता है तब आप उससे ये जरूर पूछें कि उसके टीचर एवं दोस्त इस मामले पर किस तरह की चर्चा कर रहे हैं। अगर आपको ये एहसास हो कि आपका बच्चा नकारात्मक बातें कर रहा है तो उसको प्यार से समझाएं एवं वास्तविक घटना के बारे में जानकारी देने का प्रयास करें।
     
  • युद्ध के उद्देश्यों के बारे में बताएं- आप अपने बच्चे को ये भी जरूर बताएं कि दो देशों के बीच जंग क्यों छिड़ जाती है। आप अपने बच्चे को कुछ इस तरीके से भी समझा सकते हैं कि भविष्य में होने वाले और बुरी बातों से बचने के लिए लड़ाई लड़ी जाती है। आप अपने बच्चे को ये जरूर बताएं कि हालांकि हिंसा के रास्ते को कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता है लेकिन कई बार कुछ देश इसलिए भी आपस में जंग लड़ते हैं कि ताकि भविष्य में आम आदमी सुरक्षित रह सकें।
     
  • किशोरावस्था के बच्चों की बातों को भी सुनें- जब आपके बच्चे किशोरावस्था में पहुंचते हैं तो उनके सोचने और समझने की शक्ति पूर्ण रूप से विकसित हो चुकी होती है। युद्ध को लेकर आप उनकी बातों को भी सुनें और अगर आपको लगता है कि वे तार्किक बातें कह रहें हैं तो उनको उत्साहित करें लेकिन अगर आपको ये लग रहा है कि आपका बच्चा अतार्किक बातें कर रहा है तो उसपर गुस्सा करने या बहस करने की बजाय उसको प्यार से समझाएं।

 

हो सकता है कि युद्ध जैसे माहौल में आपका बच्चा चिंतित महसूस करें या तनावग्रस्त हो जाए। संभवत: उसने किसी माध्यम से युद्ध या आतंकी हमले से संबंधित कोई ऐसी तस्वीर देख ली हो जिससे उसका मन विचलित हो गया हो तो आप उसको मानसिक रूप से मजबूत बनाएं। अगर आपका बच्चा बहुत ज्यादा विचलित नजर आए तो उसको डॉक्टर से भी जरूर दिखलाएं।

 

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